क्या सीता रावण और मंदोदरी की पुत्री थी?

Posted on by Alisha Bhatt
 
  

सीता, देवी लक्ष्मी का अवतार, अजेय राक्षस-राज रावण को नष्ट करने के धरती पर अवतरित हुयी थीं। संत वाल्मीकि जिन्होंने रामायण को लिखा था, महाकाव्य में लिखा कि सीता एक परित्यक्त बालिका थीं, और एक सहृदय और धार्मिक राजा जनक के द्वारा लायी गयीं थीं, जो मिथिला के शासक थे। हालांकि, बहुत सारी लोकोक्तियों और कहानियों में सीता के जन्म के बारे में बहुत विरोधाभास भी मिलते हैं।

Birth of Sita

मिथिला के राजा जनक को खेत को जोतते समय एक बालिका प्राप्त हुयी थी, उन्होंने उसे गोद ले लिया और उसका नाम सीता रखा।

अत: क्या रावण, दस सिर वाले लंका के राजा, ने कोई अपराध किया था, जब वह सीता के प्रति सम्मोहित हो गया था? यद्यपि वाल्मीकि की रामायण, रावण की पत्नी मंदोदरी को सीता की मां के रूप में चित्रित नहीं करता है, लेकिन कुछ बाद में लिये गये अंश उन्हें जैविक मां के रूप में चित्रित करते है और कुछ अन्य कहानियां लंका की रानी को सीता के जन्म के लिये एक कारण के रूप में दिखाया गया है।

वाल्मीकि ने राम और उनके भाइयों के जन्म, वानरों और यहाँ तक कि द्वितीयक चरित्र को महाकव्य में बहुत विस्तार से बतलाया है, लेकिन वह भी नायिका के मुख्य अंश पर संदेहास्पद तरीके से चुप्पी साधे हुये है, जिसे वह सीता का चरित्र महान कहते हैं (रामायण नाम वाल्मीकि द्वारा नहीं दिया गया था) ।

Ravana and Mandodari

रावण का विवाह मंदोदरी के साथ हुआ था क्योंकि वह देवी पार्वती के लिये एक प्रारब्धिक अस्तित्व को धारण किये हुये थी, जिसे लंका का राजा पाना चाहता था।

सबसे सामान्य कहानी जो बतलायी जाती है: सीता देवी लक्ष्मी की प्रतिमूर्ति थी; उनकी न तो कोई शुरुआत है और न ही कोई अंत इसलिये उनके जैविक माता-पिता के अस्तित्व में होने के बारे कोई प्रश्न ही नहीं उठता है।

अद्भुत रामायण बतलाता है कि रावण ने संत और महात्माओं की हत्या करवाई थी और उनके खून को एक बर्तन में संग्रहित किया था। इस मिश्रण को धरती पर सबसे भयंकर विष माना गया था। इसी बीच संत गृत्समद ने लक्ष्मी को अपनी पुत्री के रूप में प्राप्त करने के लिये मना किया था। उन्होंने दर्भा घास से दूध निकाल कर इकट्ठा किया और एक मिट्टी के बर्तन में इकट्ठा किया जिससे कि देवी उसमें निवास कर सकें। रावण, एक विघटनात्मक शक्ति होने के कारण, संत के बर्तन को लेकर चला गया और अपने खून वाले बर्तन में जाकर मिला दिया।

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सीता ने राम को सोने का मृग लाने के लिये भेज दिया

मंदोदरी ने, अपनी पति के गलत आचरण को देखकर, कई बार अपने आपको मारने की कोशिश के लिये रावण के बर्तन से तरल को निकाल कर पिया था। लेकिन क्योंकि उसमे गृत्समद का पवित्र दूध भी मिला था इसलिये मिश्रण में चिकित्सकीय गुण आ गये थे, और रानी मरने के बजाय गर्भवती हो गयी थी। उन्होंने अंततोगत्व एक बालिका को जन्म दिया, लेकिन अपने पति के प्रकोप के भय से अपने नौकर से मिथिला में दफनाने के लिये कहा। जनक ने बच्ची को धान के खेत में पाया और उसे पनी बच्ची के रूप में लाकर उसका नाम सीता रखा।

देवी भागवत पुराण के अनुसार, जब रावण ने मंदोदरी से विवाह करने की इच्छा को व्यक्त किया तब उसे चेतावनी दी गयी थी कि उसकी पहली संतान उसे मार देगी। इसके बावजूद, रावण ने मंदोदरी से विवाह किया और जब उसकी पत्नी ने उसके लिये लड़की को जन्म दिया, तब उसने नवजात को पिटारे में छुपा दिया और पिटारे को मिथिला भेज दिया था। और इस तरह जनक को सीता प्राप्त हुयी थी।

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रावण ने सीता को प्रभावित करने की कोशिश किया जब उन्होंने उनके लगातार प्रणय निवेदन पर कोई भी उत्तर नहीं दिया था। लेकिन मंदोदरी ने हर बार दखलंदाजी की और सीता के जीवन को बचाया था।

वासुदेव हिंदी और उत्तर-पुराण, रामायण का जैन रूपांतरण कहता है कि सीता, रावण और मंदोदरी की संतान है, और जब उनके बारे में भविष्यवाणी हुई कि वह रावण और उनके परिवार के अंत का कारण होगी तब उन्हें छोड़ दिया गया।

एक अन्य कहानी वेदवती से बतायी जाती है, जिन्होंने रावण के द्वारा उन्हें अपवित्र करने की कोशिश पर अपने आप को बलिदान कर दिया था। पृथ्वी, धरती की देवी, की पुत्री के रूप में उनका पुनर्जन्म हुआ, जिन्होंने जनक द्वारा धरती को जोतने के समय अपनी पुत्री को उन्हें दान कर दिया।

आनंद रामायण में, वेदवती को पद्मा के स्थान पर चित्रित किया गया है जो पद्माक्ष राजा की पुत्री है। जब वह तपस्या में लीन थी, तब रावण द्वारा उन्हें यौनाचार के द्वारा अपवित्र करने की कोशिश करता है। क्रुद्ध होकर, राजकुमारी ने अपना बलिदान कर दिया और उनके स्थान पर पांच रत्न दिखाई पड़ने लगे। रावण ने उन रत्नो को एक टोकरी में रख लिया और उन्हें लंका लेकर आया। जब मंदोदरी ने उसे खोला तो उस टोकरी में एक बच्ची को पाकर आश्चर्यचकित हो गयी।

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मंदोदरी को उसमें अपनी पति की मृत्यु का भविष्य दिखाई दिया.. तब उन्होंने अपने नौकरों को टोकरी को समाप्त करने का आदेश दिया। नौकर मिथिला के राज्य में पहुंचे, जहाँ उन्होंने उसे दफना कर छोड़ दिया।

इन सभी कहानियों में एक सामान्य बात है: रावण और मंदोदरी। उन दोनों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में सीता के जन्म होने में अपनी भूमिका निभाई है। किसी भी प्रकार से, यही बात दुहरायी जाती है कि जब लंका में उनके अस्थाई निवास के द्वारा रावण सीता के प्रति कामुक हुआ, तब उसने अंजाने में सगे-सम्बंधियों के साथ व्यभिचार किया, और राम के हाथों मारे जाने के द्वारा सबसे बड़ी कीमत को अदा किया।

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