आखिर इसके पीछे क्या है: सुब्रह्मणियम स्वामी का राहुल और सोनिया गांधी को घेरने के पीछे छुपा एजेंडा है- उन्हें खत्म करना!

Posted on by Anand Mukherjee
 
  

सुब्रह्मणियम स्वामी का राहुल और सोनिया गांधी की जिद्दी जांच के पीछे, राष्ट्रहित के लिये भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने के नाम पर, गहरा और काला स्वार्थ हो सकता है। अच्छे के लिये गांधियों और कांग्रस पार्टी को खत्म करना! यह स्वीकार करने योग्य नहीं है, लेकिन स्वामी, स्वामी है, वे भीषण साहसी और आपत्ति के साथ मूर्ख व्यक्ति है। अगर वे प्रतिशोध की राजनीति को लगातार करते रहे, तो वह राहुल का उच्चारण कर सकने से पहले खत्म हो जायेंगे।

Subramaniam Swamy

ऐसा लगता है कि स्वामी को इस दुनिया की किसी अन्य चीजों में कोई रूचि नहीं है। हर बार टेलीविज़न पर आते हैं, और भारतीय राजनीति के दुष्टों के बारे में बात करते हैं। यही कारण है कि वह बदकिस्मत कांग्रेस पार्टी के बारे में निश्चित रूप से महसूस करते हैं। यह बहुत पुरानी पार्टी कई अतिक्रमणों, 2जी स्पेक्ट्रम, घोटाला, कॉमनवेल्थ खेल घोटाला, चॉपर घोटाला, टाट्रा ट्रक घोटाला, वोट के लिये नगद घोटाला और कई प्रमुख मुद्दों के कारण अपराधी हैं, लेकिन वे घृणा की पात्रता नहीं रखते हैं।

स्वामी ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी को नेशनल हेराल्ड मुकदमे में भ्रष्टाचार के आरोप पर उत्तर देने के लिये शनिवार को दिल्ली हाइकोर्ट के सामने हाजिर होने का दबाव दे चुके हैं। उनका आरोप कहता है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 90.25 करोड़ रूपये का ब्याज रहित कर्ज एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को दिया है, जो नेशनल हेराल्ड समाचारपत्र का मालिक है। उन्होंने कहा कि वह कर्ज कभी भी अदा या नगद में अदा नही किया गया, जो आयकर अधिनियम का उल्लंघन है।

Subramaniam Swamy

स्पष्ट रूप से, एकाधिकारवत कम्पनी, यंग इंडियन, 5 लाख रूपये की पूंजी के साथ नवम्बर 2010 में बनायी गयी थी, और एजेएल की लगभग सम्पूर्ण हिस्सेदारी और उसकी सभी सम्प्तियों (कथित रूप से 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य) को हासिल कर लिया। स्वामी ने इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के ऊपर आपराधिक हेराफेरी का आरोप लगाया है।

अगर वे अपराधी पाये जाते हैं, तो वे जेल जायेंगे- ये उनके अंत की शुरुआत होगी। तब कांगेस के अंत के लक्ष्य को पाना आसान होगा। लेकिन इस प्रकार की राजनीति को हम नहीं चाहते हैं, जिसे कोई अकेला चाहता है। लेकिन संदिग्ध व्यक्तियों को खोज करना भारतीय राजनीति के डीएनए में है। इसे सदैव के लिये हमें सहना पड़ेगा।

Subramaniam Swamy

अगर स्वामी देश में भ्रष्टाचार को उजागर करना चाहते हैं, तो यहाँ गांधियों के अतिरिक्त भी बहुत से लोग हैं। वह लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, मायावती, शरद पवार पर दयाहीन क्यों नहीं होते हैं? क्योंकि वे स्थानीय स्तर के नेता हैं, इसलिये कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतोयोगिता नहीं हैं? वह जयललिता के पीछे क्यों नहीं है क्योंकि सम्भावना है कि वे भविष्य में गठबंधन बना लें? वह उनके पीछे 1996 में केवल एक बार पड़े थे। नितिन गडकरी और बी येद्दियुरप्पा के बारे में क्या?  वे भ्रष्ट हो सकते हैं, लेकिन वे घर के हैं, स्वामी के गठबंधन का हिस्सा है, इसलिये छोड़ दिये गये हैं।

स्वामी ने अपने दांव अच्छी तरह से चले हैं, अपने आपको को शक्ति स्थान पर स्थापित किया जहाँ से वह अपनी कल्पना के आधार पर हमला कर सकें। ठीक राष्ट्रीय चुनावों से एक साल पहले, पूर्व की जनता पार्टी के अध्यक्ष ने 2013 में बीजेपी के साथ सम्मिलित हो गये। उन्होंने राष्ट्र के मिजाज को आसानी से देखा जो कांगेस से ऊब चुकी है और बीजेपी की ओर देख रही है, और उन्होंने इसका लाभ उठाया।

Subramaniam Swamy

स्वामी का इतिहास उनका साथ नहीं दे रहा है। उनके विचार अभिमानी और स्वयं कि सेवा करने वाले हो चुके हैं।

तमिलनाडु में पैदा, 76 वर्षीय राजनीतिज्ञ का विश्वास है कि हिंदुओं को लक्ष्य किया जा रहा है और भारत के मुसलमानों को धीरे, प्रतिक्रिया प्रक्रिया के द्वारा स्वच्छंद बनाने के लिये तैयार किया जा रहा है, जिससे वे हिंदुओं के विरूद्ध आत्महत्या के लिये तैयार रहें। इस प्रकार के विचार हो सकता है कि 21 वीं सदी के भारतीय, जो आगे के बारे में सोचता हो, के न हों।

वह ऐसे राष्ट्रीय नियम को भी लागू करना चाहते हों जो हिंदू धर्म से किसी अन्य धर्म में धर्म परिवर्तन का निषेध करता हो। अगर कोई व्यक्ति मुक्त भारत में इस्लाम या इसाइयत में परिवर्तित होना चाहता हो, तो उसे जेल हो जायेगी। यह बहुत ही घृणास्पद कथन है: केवल वही मुसलमान जो “स्वीकार करते हों कि उनके पूर्वज हिंदू थे”, को ही भारत में मत देने दिया जाय। वह हिंदू मानसिकता विकसित करने का प्रचार करना चाहते हैं……………

Subramaniam Swamy

यह मुश्किल है, जहाँ तक मैं समझता हूं, अपने समर्थन के साथ सुब्रह्मणियम स्वामी को श्रेय देता हूं। सोनिया और राहुल अपराधी हो या नहीं हो सकते हैं, लेकिन जिस तरह से स्वामी उन्हें अकेला करके कर रहे है उसे केवल गंदी राजनीति कहा जायेगा।

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