उन्होंने बहु प्रतीक्षित दरों में कटौती की मांग की, लेकिन वित्तीय समस्या की भविष्यवाणी करते हुए! सुब्रमणियम स्वामी और रघुराम राजन की मतभेद हुई

Posted on by Samiksha Pathak
 
  

वह एक अर्थशास्त्री है, लेकिन वह राजनीतिक भी है। इसलिये जब वह यह कहते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था कयामत का दिन देख रही है, क्या स्वामी जिम्मेदार भारतीय होने के नाते भारतीय अर्थव्यवस्था के रखवाले को चेतावनी के प्रारम्भिक संकेत दे रहे हैं या क्या यहां बहुत गहाराई में वह लाल झंडे को दिखा रहे है।

Subramaniam Swamy, Raghuram Rajan

इस नवम्बर और फरवरी 2016 के बीच एक अचानक गिरावट की भविष्यावाणी द्वारा, स्वामी भारतीय रिजर्व बैंक गवर्नर के रिपोर्ट कार्ड पर दाग लगाने की कोशिश कर रहे हैं, बहुत सारे बाजार के विशेषज्ञ यह अनुमान लगाते हैं। अगर राजन की निगरानी में अर्थव्यवस्था गिरने की आशंका होती है, तो वह ठीक अपने ऊपर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा।

स्वतंत्र विचारों वाले भारतीय जनता पार्टी नेता ने प्रधानमंत्री से निवेदन किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर को निर्देश दें कि या तो वह ब्याज दरों में कटौती करें या पदच्युति का सामना करें।

स्वामी ने लिखा: “भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न संकेतकों पर आधारित मेरे अध्ययन के आधार पर, मैं आपको सूचित करना मजबूरी महसूस करता हूं कि भारतीय अर्थव्यवस्था चक्कर खाकर गिरने के पहले चरण में है। अगर उपचारत्मक मानक नहीं शुरू किये गये तो आने वाले नवम्बर और फरवरी 2016 के बीच बहुत बड़ी गिरावट हो सकती है।

Subramaniam Swamy, Raghuram Rajan

उन्होंने यहाँ तक कहा: “प्रधानमंत्री भारतीय रिजर्व बैक गवर्नर को साफ बता दें: दर में कटौती अभी या राजन को हटाया जा सकता है”। उन्होंने अर्थव्यवस्था को दुबारा शुरू करने के उद्देश्य से कुछ सिफारिशें भी प्रस्तावित की हैं।

लेकिन स्वामी इसे निजी क्यों बना रहे हैं? लेकिन इसके बजाय, इसका कोई और मतलब नहीं निकलता कि पूरी तरह से सक्षम अर्थशास्त्री के पीछे वे क्यों जा रहे हैं। राजन ने अगस्त में इसका संकेत दिया था कि केंद्रीय बैंक साल में तीन बार ब्याज दरों में कटौती करेगा और इसे अधिक नीचे की ओर लाना चाहते थे। क्या राजन दरों में कटौती का विरोध करना चाहते थे, अंतत:, स्वामी का विस्फोट कुछ तार्किक लगता है। लेकिन ब्याज दरों में कटौती झगड़े का मामला नहीं है।

स्वामी अपने रास्ते से अलग हटकर मोदी  के ध्यान को आंकड़ों की तरफ खीचना चाहते है जो कमजोर अर्थव्यवस्था, विनाशकारी गिरावट की ओर सर करने की घोषणा कर रहा हैं।

Subramaniam Swamy, Raghuram Rajan

अर्थशास्त्री सूचित कर रहे है कि हम ऐसा कुछ भी बुरा नहीं देख रहे हैं जैसा कि अन्य मुद्राओं के साथ है। वस्तुत:, हम पिछले एक डेढ़ सालों में यूरो में 20% की कमजोरी के कारण ज्यादा मजबूत हुये हैं। ठीक यही स्थिति रूपये और येन के साथ है। चीन के स्टॉक बाज़ार में, और विश्व के बहुत से देशों में, अगस्त की खलबली के बाद सितम्बर में शान्ति में कमी देखी गयी है। चीनी अर्थव्यवस्था में धीमापन वास्तविकता में बुरी चीज़ नहीं है, जब आप विचार करते है कि मोदी उत्पादकों को अपने ‘मेक इन इंडिया’ के सुर से प्रलोभन देने की कोशिश कर रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञ विश्वास करते है कि अन्य एशियाई देशों की तरह भारत बाहरी झटकों के प्रति अतिसंवेदनशील नहीं है जैसा कि बहुत सारे पूर्वी एशियाई देशों उदाहरण के लिये दक्षिण कोरिया, थाईलैंड या मलेशिया की तुलना में कुल सकल घरेलू उत्पाद में निर्यातों का हिस्सा बहुत ही कम है।

इस संदर्भ में, स्वामी का स्वंतत्र कथन बर्रे के छत्ते को हिलाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है, राजन के अधिकार क्षेत्र के चारों ओर नकारात्मक परिस्थितियां बनाना है और नजदीक होने वाली गिरावट के लिये उन्हें उत्तरदायी प्रतीत कराना है।

Subramaniam Swamy, Raghuram Rajan

स्वामी, और बीजेपी, को याद रखना चाहिये कि कांग्रेस 2014 में शक्तिहीन हो गयी क्योंकि वह मुद्रास्फीति पर नियंत्रण करने में अयोग्य रही। सरकार भारतीय रिज़र्व बैंक गवर्नर द्वारा बनाये गये उपचारात्मक मानकों की रूपरेखा और उनकी पसंद को लेना चाहिये, लेकिन डॉ0 स्वामी के मूल्यांकन को अंदेखा नहीं कर सकते हैं सिर्फ इसलिये, अपने स्वयं के अधिकार से अर्थशास्त्री होने के अतिरिक्त, वह राजनेताओं की टोपी के अगुआ भी हैं।

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