क्या नरेंद्र मोदी को जनसंख्या वृद्धि रोकने के लिये एक बच्चे नीति को लागू करना चाहिये? चीनी किताबों की परतों में देखते हैं!

Posted on by Anand Mukherjee
 
  

पिछले तीन दशकों में, अब तक, चीनी जोड़ों ने केवल एक बच्चा पैदा करने तक अपने को सीमित किया है। इस नियम को 1980 में गुणोत्तर जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिये प्रेरित किया गया था।

पिछली साम्यवादी सरकार ने कर्मचारियों के दबाव की मांग को देखते हुये लोगों को एक से अधिक बच्चे पैदा करने के लिये प्रोत्साहित किया, लेकिन, यह हाथ से फिसल गया। 1950 तक, चीनी जनसंख्या लगभग 2 प्रतिशत की दर से हर साल बढ़ रही थी। यह असंतुलित हो चुकी थी। बच्चों के जन्म को रोकना इसका एक मात्र उत्तर था, और इसने अपना प्रभाव दिखाना अब शुरू कर दिया है।

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2050 में, भारत की जनसंख्या का अनुमान 1.69 बिलियन है। चीन का 1.31 बिलियन होगा।

क्या नरेंद्र मोदी को अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि रोकने के लिये एक बच्चा नीति को लागू करना चाहिये। प्रधानमंत्री को इस संदर्भ में दृढ़ निश्चय करना होगा। इसका विरोध भी होगा, लेकिन, एक आत्मविश्वासी नेता अंतिम प्राप्ति- एक स्वस्थ, सुरक्षित, और खुशहाल समाज- और वहाँ से अपनी ताकत में वृद्धि को देख सकता है।

प्रधानमंत्री, अगर अपने वादों को पूरा करते हैं, के पास दूसरे दौर के लिये हर मौका है। वह इन्हें 10 साल देगा, जिसमें वह एक बच्चा नीति के परीक्षण और लाभ और हानि का अध्य्यन करने का पर्याप्त मौका देगा।

2001 से 2011 के बीच, भारत ने 181 मिलियन लोगों को विश्व जनसंख्या में जोड़ा है, यह जनसंख्या ब्राजील की कुल जनसंख्या के लगभग नज़दीक है! इस दर से, भारत में जल्द ही जनसंख्या विस्फोट होगा। हम इसे लोगों की बुद्धिमत्ता पर नहीं छोड़ सकते। लड़के की चाह में दम्पति पहली लड़की के जन्म पर नहीं रुकते है। वे बार बार प्रयास करते है जब तक कि उन्हें वह नहीं मिल जाता जिसे वह चाहते हैं। तब तक परिवार में 6 से 7 बच्चे हो जाते हैं। उपेक्षित और बिना देखभाल के, ये बच्चे समाज के जिम्मेदार सदस्य नहीं बन पाते, लेकिन अपने बढ़ने की उम्र में अपराधी बन जाते हैं।

लालू यादव 10 बच्चों को पाल सकते हैं क्योंकि उनके पास वित्तीय और राजनैतिक शक्ति है। उनके बच्चे जीवनयापन कर सकते हैं। सामान्य रूप से, मध्यमवर्गीय लोग बहुत सारे बच्चों को नहीं पाल सकते हैं लेकिन वे करते है।

भारत की 76 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या लगभग 2 डॉलर प्रतिदिन में जीवित रहती है। जनसंख्या हमारे समाज के गरीब सामाजिक-आर्थिक स्तर से ऊपर उठ चुकी है।

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आधारिक ढ़ांचे के विकास के संदर्भ में, भारत अन्य पूर्व एशियाई देशों की तुलना में बहुत पीछे चल रहा है। नाज़ुक से कठोर आधारिक ढ़ांचे, शिक्षा के विस्तार, स्वास्थ्य देखभाल, सड़कों और सामान्य विकास के सन्दर्भ में, भारत पहले से ही तनाव में है, जनसंख्या में वृद्धि भूख, बेरोजगारी और अपराध को बढ़ावा दे रही है।

अगर मोदी सरकार एक बच्चे नीति को ध्यान में रखती है, तो भारत 2050 तक अमेरिका के बराबर शक्ति रख सकता है! पागलपन की बड़ी जनसंख्या के साथ एक समाज कभी विकसित नहीं हो सकता, वह कभी चमक नहीं सकता है। विश्व समुदाय में यह बहुतायत से विश्वास है कि अमेरिकी सरकार स्वास्थ्य अनुदान कोष उन्हीं देशों को देता है जिन्होंने गर्भपात को अवैध घोषित किया है। अमेरिका विश्वास करता है, जैसा हम करते हैं, कि जनसंख्या आधिक्य के साथ समाज कभी खुश नहीं होगा।

चीन की एक बच्चा नीति को विश्वभर में निंदा की गयी, लेकिन चीन ने इस दबाव को नकारा और अपने नीति पर अडिग रहा। अब यही कारण है कि पीपुल’स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ चाइना दो बच्चों की अनुमति देने की सोच रहा है।

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अतिसाहसिक परिस्थितियां अतिसाहसिक मापक चाहती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खुशहाल भारत की सोच वर्तमान परिस्थितियों में वास्तविकता में नहीं बदल सकती है। अगर भारत बढ़ती हुई जनसंख्या का सफलतापूर्वक पालन करता है, तो यह वृद्धि पर्यावरणीय स्थिरता नहीं दे सकता है। 2050 तक जल के लिये वैश्विक मांग 2001 की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक होगी। खाद्य मांग भी बढ़ रही है यह तब आश्चर्यजनक नहीं होगा कि अंतर्राष्ट्रीय अंतर्विरोध जल के संदर्भ में हीं होंगे, भारतीय राज्यों के मध्य जल विवाद में उच्चतम न्यायालय का हस्तक्षेप से समझा जा सकता है।

बड़ा प्रश्न यह है कि नरेंद्र मोदी इस बात पर अवश्य चिंतन कर सकते हैं कि: भारत अपने 1.7 बिलियन लोगों को उनकी आधारिक और न्यूनतम मांगों को कैसे पूरा करेगा?

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