MI6 ब्रिटेन की खुफिया सेवा ने लादेन को £100,000 मुअम्मर गद्दाफी को मारने के लिये अदा किया था

Posted on by Rubi
 
  

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हाल ही में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून और उनके यूरोपियन सहयोगियों को लीबिया (अफ्रीका) में 2011 के बाद अंतर्राष्ट्रीय दखलंदाजी की निंदा किया, जिसमें लीबिया के नेता कर्नल मुअम्मर गद्दाफी की हत्या हुई। ओबामा ने कहा कि 2011 की दखलन्दाजी के बाद कैमरून भटक गये थे और कहा कि यूके, फ्रांस और अन्य यूरोपियन देश खुशी से लाल हो गये थे।

Muammar Gaddafi

कर्नल गद्दाफी, लीबियन नेता, पहला व्यक्ति था जिसने ओसामा बिन लादेन के विरुद्ध एक इंटरपोल गिरफ्तारी वारंट जारी किया

यूके और यूएस 1996 में लिबिया में आघात के लिये अल कायदा के साथ सहअपराधी थे। यह एक अन्य बात है कि इस्लामी आतंक समूह और दो शक्तिसम्पन्न राष्ट्रों के बीच के सम्बंध आने वाले सालों में उग्रता से बदले।

यह वही लीबिया था जिसने पहला इन्टरपोल गिरफ्तारी वारंट लादेन के विरुद्ध 1998 में अपने राष्ट्रपति कर्नल गद्दाफी की हत्या करने की कोशिश के लिये जारी किया था। विश्व का सबसे खतरनाक आतंकी ओसामा बिन लादेन अमेरीका में होने वाले 9/11 हमले के बहुत पहले से एक “घोषित अपराधी” था।

Muammar Gaddafi

डेविल शायलर 1997 में एक मुखबिर हुआ था, यह बता कर कि एमआई6 का अल्कायदा के साथ सम्बंध था

अल मुक़ातिल, लीबिया में अल कायदा के भाग ने, गद्दाफी की गाड़ियों पर हमला करके हत्या की कोशिश किया था। यह घटना फरवरी 1996 में हुयी थी, लेकिन गलत कार उड़ गयी थी, जिसमें गद्दाफी के बहुत से अंगरक्षक मारे गये थे। लीबियाई नेता बिना किसी चोट के बच गये थे।

एमआई5 ( ब्रिटिश खुफिया सेवा) के लीबियाई भाग के प्रमुख ने गद्दाफी पर हुये हमले को कुत्सित सुरक्षा प्रदान किया था। डेविस शायलर, एक खुफिया एजेंट, एमआई5 के जी9 का भाग था जो लीबिया में काम कर रहा था। 1997 में, एजेंट ने पाया कि यह उसकी अपनी ही एजेंसी थी जो गद्दाफी पर हुये हमले में असफल रही है।

Muammar Gaddafi

पश्चिमी विश्व ने ओसामा बिन लादेन को आतंक के सबसे खतरनाक चेहरे के रूप में अमेरिका में हुये 9/11 हमले के बाद पहचाना।

लीबिया में एसआईएस( सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस) के साथ एक सन्युक्त मीटिंग में, सामान्य रूप से एमआई6 के रूप में संदर्भित, शायलर ने पहली बार एक एजेंट के छद्मनाम टनवर्थ को सुना। वह टनवर्थ के आतंकी समूह अल मुक़ातिल के साथ समझौते के बारे में विस्तार से जान पाया, जो कर्नल गद्दाफी को मारने की योजना बना रहा था।

अपने सहयोगी के साथ एक चर्चा के दौरान, शायलर ने पता लगाया कि जब कत्ल करने की योजना अपने चरम पर पहुंची, तब एजेंट टनवर्थ को £100,000 दिया गया था, जिसे बदले में अलकायदा को दिया गया था। इन सब के बीच, ब्रिटेन को इस बारे में पूरी जानकारी थी कि गद्दाफी की ज़िंदगी पर कत्ल की योजना कार्यान्वित होने वाली है और टनवर्थ अल कायदा की लिबियाई भाग के साथ मध्यस्थता कर रहा था।

Abu Anas al-Liby

अबू अनास अल लिबी, लिबियाई हिस्से का अल कायदा प्रमुख

एमआई5 एजेंट ने अपनी सेवा छोड़ दी और 1997 में मुखबिर बन गया। उसने लीबिया में तख्तापलट की कोशिश में एजेंसी के सम्बंध को बतलाया। शायलर को फ्रांस जाने के लिये दबाव बनाया गया, और 1998 में, उसने दावा किया कि गद्दाफी को मारने की योजना में अल मुकातिल के साथ एमआई6 द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की गयी थी। बिन लादेन का अल मुकातिल से नज़दीकी सम्बंध था, इसलिये गद्दाफी को इस निष्कर्ष में पहुंचने में देर नहीं लगी कि अल क़ायदा उसे मारना चाहती थी।

David Shayler

खुफिया सेवाओं को छोड़ने के समय, 2007 में, डेविड शायलर तटस्थ हो गया था। उसने अपना नाम डेलोरेस काने से बदल लिया, और अपने आपको भगवान घोषित कर दिया और अवैध निवासी हुआ।

शायलर के खुलासे के बाद ठीक उसी साल, लीबिया ने बिन लादेन के खिलाफ वारंट को जारी किया और फ्रांस में इंटरपोल के पास अग्रेसित कर दिया। दिलचस्प है, लादेन के ऊपर लगाये गये आरोप गाड़ी पर हुये हमले के खिलाफ नहीं थे, बल्कि जर्मन जासूस और उसकी पत्नी की हत्या गद्दाफी के अपने शहर में होने के कारण था। ब्रिटिश और यूएस खुफिया एजेंसी ने लीबिया द्वारा जारी किये गये गिरफ्तारी के वारंट को महत्व नहीं दिया; या हो सकता है कि इससे उनका आतंक के साथ घिनौना सहयोग विश्व के सामने खुल जायेगा।

शायलर के लगाये गये आरोप ब्रिटिश सरकार द्वारा, पूर्व एजेंट को बेइज्जत करने की कोशिश में, महज “कल्पना” बताने के द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। विडम्बना है कि उसे अदालत में, खुफिया एजेंट के रूप में अपने खुफिया काम करने के दौरान के, “संवेदनशील” आंकड़ों का खुलासा करने के लिये घसीटा गया, यद्यपि उसी अधिकारी वर्ग ने उसके दावों को ”मनगढ़ंत” घोषित किया था। अपने सुनवाई भाषण में, शायलर अड़ा रहा कि उसने कहा था कि गद्दाफी पर हुआ हमला एमआई6 के शीर्ष अधिकारियों की तरफ से आया था, और यूके के विदेश कार्यालय द्वारा प्रमाणित किया गया था। शायलर को छ: महीना के लिये कारावास दिया गया था।

Muammar Gaddafi

2007 में एक मीटिंग में पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, लीबियाई कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के साथ

शायलर का दावा सही सिद्ध हुआ था, जब अल मुक़ातिल का प्रमुख अनस अल लीबी, को ब्रिटेन में आश्रय दिया गया था। एमआई6 का लीबियाई आतंकवादी संगठन के माध्यम से लादेन के साथ नज़दीकी सम्बंध पर्याप्त सिद्ध हो चुका है। अल लिबी मैंचेस्टर में मई 2000 तक रहा जबतक वह पुलिस के छापे में अपने घर से बचकर और इंगलैंड से फरार नहीं हो गया था।

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  1. David July 6, 2017 at 5:26 pm -

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