महात्मा गांधी और मुसलमान के लिये उनका प्रेम एक गूढ़ प्रश्न है! एक स्थानीय मुसलमान उन्हें एक ‘मोहम्मदीय’ बुलाता था!

Posted on by Srishti Jain
 
  

मेरे पिता ने मुझे बताया कि 16 साल की उम्र में उन्होंने स्वतंत्रता के संघर्ष में प्रतिभाग किया था। उन्होंने दावा किया था कि वह महात्मा गांधी के साथ साथ चले थे और हर कार्य के अंत तक उनके बगल में हमेशा खड़े रहते थे। उनकी आंखों में गांधी जी के लिये बहुत गहरी आस्था थी। वह गर्व करते थे। मैं कैसे उनके अशांत जीवन के अध्याययों को साझा कर सकता हूं बिना मेरे पिता को उनके विषय में अशांत किये? वह एक ऐसे समूह से सम्बंधित थे जो महात्मा गांधी के बारे में आलोचना को सुन नहीं सकते थे।

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विभाजन के समय के दौरान बहुत सारे नेताओं की भूमिका रहस्यों के पर्दे में रही है। कौन भारत का विभाजन करने के लिये दबाव बना रहा था और कौन उसे एक बनाया रखना चाहता था, हम बहुत सुनिश्चित होकर नहीं कह सकते हैं। हम बहुत स्पष्ट होकर यह भी नहीं कह सकते कि गांधी की भूमिका क्या थी। इतिहासकारों का एक बहुत बड़ा हिस्सा विश्वास करता है कि भारत ने, सामान्य रूप से, गूढ़ प्रश्न, मोहनदास करमचंद गांधी, की सतह को खुर्चा तक नहीं है। भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में सबसे अधिक दिखायी देने वाला विश्वसनीय चेहरा था। हम सब ‘टहलते हुये’ गांधी के बारे में बहुत कुछ देख चुके हैं। हम सब उनके जोशीले भाषणों को देते हुये बहुत कुछ सुन चुके है। हम सब घटनाओं की परवाह नहीं करते हैं जो वास्तविकता में उस आदमी को परिभाषित करते थे। मैं गांधी जैसी शख्सियत का मूल्यांकन करने वाला नहीं हूं, लेकिन मैं सामान्य समूह में चर्चित कुछ प्रश्नों को अवश्य पूछूंगा जो गांधी के मानव होने के नाते, न कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के, अंधेरे पक्ष से सम्बंधित है।

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गांधी मुसलमानों के प्रति नरम थे, कोई कारण नहीं है कि उन्हें नहीं होना चाहिये था, लेकिन यह एक मुखौटा है जो अनैतिक है। अहिंसा के देवदूत ने हिंसा और अस्थिर विचारों को पोषित किया। उन्होंने हिंदु महिलाओं को मुसलमान पुरुषों द्वारा बलात्कार किये जाने पर बहुत अधिक विरोध करने के लिये मना किया! इसे पढ़ना बहुत हिला देता, लेकिन यह तथ्यों में सच है।

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6 जुलाई, 1926 के नवजीवन के प्रकाशन में गांधी का एक कथन उद्धृत है: “वह एक बहन की लज्जा भंग (मुसलमान) होने पर उसके कदमों को चूमेंगे। विभाजन से ठीक पहले, पश्चिमी पंजाब में जब हिंदू और सिख महिलायें बड़ी संख्या में मुसलमानों द्वारा बलात्कार की जा रही थी, गांधी ने महिलाओं को सलाह दिया कि अगर मुसलमान हिंदू और सिख महिलाओं का बलात्कार करनी की इच्छा प्रकट करते हैं तो वह उन्हें ना तो इंकार करें न ही विरोध करें। इसके बजाय वह उनके साथ सहयोग करें। वह एक मृत के समान लेट और अपनी जीभ को अपने दांतों के बीच रख लें” । क्य वह वास्तविकता में ऐसा कह सकते हैं? मैं विश्वास नहीं कर सकता हूं!

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परिपक्वता मानसिकता द्वारा निर्धारित होती है। मुसलमान शासन के दौरान जो लगभग 800 सालों बाद समाप्त हुआ, हिंदू महिलाओं के साथ ऐसा सामान्य मुद्दा था। अपने सम्मान और पवित्रता को मुसलमान ऐयाशों से बचाने के लिये लाखों हिंदू महिलाओं ने अपने जीवन की कुर्बानी दे दी थी। विभाजन का जन्म होने के बाद पाकिस्तान क्षेत्र के बहुत सारे हिंदू परिवार मुसलमानों के आक्रमण का शिकार हुये और हिंदू महिलाओं का बलात्कार इसका अविभाजित अंग बनीं। जब 1946 में नोआखली में हिंदू बदले गये थे, हजारों हिंदू महिलायें मुसलमानों द्वारा बलात्कार की शिकार बनाई गयीं।

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विभाजन के दौरान, जब हिंदू और सिख पश्चिमी पंजाब से शरणार्थी के रूप में आना शुरू किये  और दिल्ली के शरणार्थी शिवारों में आकर पहुंचे, गांधी ने एक दिन शिविर का दौरा किया और कहा, “हिंदुओं को मुसलमानों के ऊपर नाराज नहीं होना चाहिये, उन्हें बहादुरी के साथ उनका सामना करना चाहिये” । गांधी ने अभिलेखित रूप से कहा था कि राणा प्रताप, गुरू गोविंद सिंह, राजा रंजीत सिंह और राजा शिवाजी भटके हुए राष्ट्रभक्त थे, क्योंकि उन्होंने मुसलमानों के साथ युद्ध किया था।

उनका आधारिक विचार था कि केवल हिंदुओं को ही बलिदान करना है। हिंदुओं से यह उम्मीद किया कि मुसलमानों के हर तरह के अपराध को बिना किसी शिकायत या विरोध के क्षमा और सहन करना होगा। लुरवानी, सिंद के खलीफा ने एक बार कहा: “गांधी वास्तविकता में मोहम्मदीय थे”!

क्या ये अशांत करने वाली कहानियां किसी की कल्पना से कल्पित की गयी हैं, या क्या कुछ ऐसा है जो इससे भी ज्यादा गहरा और अंधकारमय है?

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