स्वतंत्रता मिलने के एक साल बाद ही, कृष्ण मेनन ने भारत के पहले घोटाले में सेना कोष से गबन किया

Posted on by Anand Mukherjee
 
  

भ्रष्टाचार ने भारतीय कार्य तंत्र में बहुत पहले ही अपना घर बना लिया था जबतक कि यह सामान्य रूप से स्वीकार कर लिया जाता। ब्रिटिश शासको द्वारा भारतीय नेताओं के हाथों में छोड़ जाने के बाद, युवा भारत अपनी पकड़ को बनाने की कोशिश कर रहा था।

एक नवजात की तरह देश आधुनिक जीवन पद्धति के साथ बाहर आने की कोशिश कर रहा था, लेकिन ठीक इसी समय कुछ देशीय ठग अपने ही लोगों को लूटने के लिये कमर कस रहे थे। इन सबके बीच एक शख्स कृष्ण मेनन था, जिसने भारी मात्रा मे धन को प्राप्त करने के लिये अनाड़ियों की तरह से सैन्य समझौता किया। मेनन, जो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सीधे सम्पर्क में थे, उन्होंने प्रभावित होकर एक समझौता किया जबकि वह यूनाइटेड किंगडम में उच्चायुक्त के रूप में कार्य कर रहे थे।

jeep4

भारत इन सब मामलों में अनाड़ी था, और मेनन ने भारत के इस भोलेपन का उपयोग, 1948 में घृणित जीप घोटाले के द्वारा अपने खजाने को भरने में किया, जिसे भारत के पहले घोटाले के रूप में जाना जा सकता है। मेनन ने 80 लाख का समझौता एक यूके(UK) स्थित संस्था के साथ हस्ताक्षर किया और 1500 जीपों के लिये भुगतान भी किया हालांकि केवल 155 की ही आपूर्ति की गयी थी, और सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इस गाड़ी को इस्तेमाल करने में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इस दूसरे दर्जे की जीप को भारतीय सेना द्वारा सिरे से नकार दिया गया था।

जैसे ही मीडिया ने इस मामले को उछाला, एक नौकरशाह के निर्भीक भ्रष्टाचार से पूर्ण समझौते के लिये जनता का गुस्सा फूट पड़ा। राजनैतिक और मीडिया के बहुत अधिक दबाव के कारण मेनन को अपने कार्यालय से इस्तीफा देना पड़ा। कुछ सालों बाद गृह मंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने जांच समिति के निवेदनों को अंदेखा करते हुये घोषणा किया कि इस मामले को बंद कर दिया गया है।

jeep1

नेहरू के लाड़ले अधिकारी मेनन को एक मंत्री के तौर पर बिना किसी विभाग के मंत्री के रूप में अपनी कैबिनेट में भी शामिल कर लिया था, जिसे बाद में चलकर 1956 में रक्षा मंत्री के रूप में पदोन्नति किया गया था। और जैसे ही यह मामला घटित हुआ, जीप का यह मामला तुरंत ही अदृश्य हो गया था।

यद्यपि, यह मात्र एक शुरुआत थी; आने वाले वर्षों में, कई सारे रक्षा घोटालों ने देश को हिला डाला था। लेकिन एक आदमी मेनन को, जिसने इन सभी घोटालों में लाभ प्राप्त किया, शर्म आनी चाहिये। खराब हवाई जहाज से लेकर बराक मिसाइल तक, कॉफिन से लेकर स्टिंग आपरेशन तक पूर्व प्रधानमंत्री जॉर्ज फर्नांडीस ने इस सबका सामना किया था।

jeep3

स्पष्ट रूप से, 2000 में, फर्नांडीस ने उस समय के रक्षा सलाहकार एपीजे अब्दुल कलाम की सलाह को अंदेखा करते हुये, इज़रायल से बढ़ी हुयी दर पर समझौते को अंतिम रूप दे दिया। इस मामले के कुछ साल पहले यही मंत्री और कुछ सेना अधिकारी कॉफिन घोटाले में शामिल होने के दोषी पाये गये थे, जब कारगिल के शहीदों के शव को उनके परिवार तक पहुंचाने के लिये युद्ध कॉफिन को खरीदा गया था।

jeep2

यह बहुत ही दुखद मामला है कि सैन्य अधिकारी, जो देश के लिये अपना सबकुछ न्यौछावर कर देते हैं, भ्रष्टाचारी अधिकारियों और रक्षा मंत्रियों के हाथों हुये गलत समझौतों के कारण खत्म हो जाते हैं। यह बहुत बड़ी विडम्बना है कि उनकी अंतिम यात्रा, कॉफिन, में भी समझौता किया गया जिससे कुछ अन्य लोगों की जेबों को भरा जा सके, जबकि उनके परिवार न बदले जा सकने वाले दुख से पीड़ित रहते हैं।

Tagged , , , , , , |