चालीस साल हो चुके हैं, और हम अभी भी आश्चर्यचकित है कि संजय गांधी ने इंदिरा गांधी को छ: बार थप्पड़ लगाया!

Posted on by Anand Mukherjee
 
  

इंदिरा गांधी और संजय गांधी के बीच का सम्बंध एक पहेली है। कोई निश्चित होकर यह नहीं बता सकता कि मां-बेटे ने प्यार के बंधन के आनंद को उठाया या उनके बीच तलवार खिंची थी।

लेविस एम सिमोंस, पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता वाशिंगटन पोस्ट संवाददाता, आपातकाल के समय जब दिल्ली में रूके थे, जिसे इंदिरा गांधी द्वारा निर्दयतापूर्वक लगाया गया था। दिल्ली कांप उठी जब साइमन ने दावा किया कि संजय गांधी ने अपनी प्रधानमंत्री मां, इंदिरा गांधी, को एक रात्रि भोज में छ: बार थप्पड़ मारा।

 

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अमेरिकी पत्रकार ने, एक ऑनलाइन वेबसाइट के साथ निष्पक्ष बातचीत में, याद किया कि कैसे उन्होंने सोनिया गांधी और राजीव गांधी की प्रतिक्रियाओं को समेटा जब वह आपातकाल के हटाये जाने के सालों बाद उनसे मिले।

लेविस सिमोंस के अनुसार, थप्पड़ मारने की घटना एक निजी पार्टी में आपातकाल लगाये जाने से पहले हुई थी। उन्होंने कहा: “पत्रकार सामान्यत: कोई बात तुरंत नहीं लिखते, बल्कि बाद के उपयोग के लिये बचा लेते हैं। मुझे नहीं याद है कि मेरे पास यह जानकारी है कि संजय ने क्या कहा होगा”।

उन्होंने फिर जोड़ा: “मुझे इस घटना का पता अज्ञात स्रोत से चला, जिसने इसके बारे में अनौपचारिक बातचीत में बताया। संजय और उनकी मां के बीच के सम्बंधों पर बातचीत के दौरान उस अज्ञात स्रोत, जो पार्टी में शामिल था, ने थप्पड़ वाली घटना को बताया। वह मेरी पत्नी और मुझसे मिलने आपातकाल से पहले एक शाम आया था”।

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यह कहानी जंगल में आग की तरह फैल गई। यह बहुत प्रभावकारी थी, फिर भी किसी भारतीय समाचार पत्र ने प्रेस पर नियंत्रण होने के कारण नहीं छापा।

इस लेख के कारण सत्ता के गलियारे में काफी नाराज़गी थी, और सिमोंस को भारतीय मिट्टी पर सम्भवत: नहीं रहने दिया जा सकता है।

उसने कहा: मुझे छोड़ने के लिये नहीं कहा गया था। मुझे नोटिस देने के पांच घंटे के अंदर छोड़ने का आदेश दिया गया था। और जैसा कि मैंने पहले संकेत दिया कि मुझे जाने का आदेश थप्पड़ वाली घटना के लिये नहीं दिया गया था, जिसे अब तक मैंने नहीं लिखा था। यह उस कहानी से सम्बंधित है जिसे भारतीय सैन्य अधिकारियों ने मुझे बताया था कि वे आपातकाल लगाये जाने और श्रीमती गांधी के नेतृत्व से असहमत थे”।

“मुझे बिना सूचना के राइफल धारी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था और प्रत्यर्पण कार्यालय लाया गया था।  मुझे कहा गया कि दिल्ली से बाहर जाने वाली पहली फ्लाइट में भेजा जायेगा। जब मैंने पूछा कि क्यों तो उन्होनें अपने आंख, कान और फिर मुंह पर अपने हाथ रख लिये।

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“पांच घंटे बाद, मुझे अमेरिकी दूतावास अधिकारियों द्वारा एयरपोर्ट लाया गया था। भारतीय कस्टम या प्रत्यर्पण अधिकारी ने मेरे दर्जनों या अधिक नोटबुक को जब्त कर लिया था। उन्हें कई महीनों बाद मुझे वापस किया था, लेकिन हर नाम को बड़ी सतर्कता के साथ लाल निशान लगाया था। उनमें से बहुत से लोगों को, मुझे याद है कि, जेल में डाल दिया गया था”, लेविस सिमोंस ने लिखा।

उन्हें प्लेन से बैंकाक लाया गया। यह वही जगह है जहां होटल के कमरे में, उन्होंने थप्पड़ मारने वाली घटना लिखी।

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जबकि भारत में, लेविस, उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चों को अधिकारियों के साथ बहुत परेशानी झेलनी पड़ी। लेविस को निर्वासित किये जाने के बाद, उसका परिवार पीछे छूट गया, लेकिन कई अड़चने डाली गयी। टेलीफोन काट दिया गया, घर के बाहर पुलिस बैठा दी गयी और बैंक खाते के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गयी।

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धूल छटने के बाद, सिमोन को एक निजी रात्रि भोज पर फिर आमंत्रित किया गया जिसमें राजीव गांधी और उनकी पत्नी सोनिया, अतिथि थीं। मेज पर किसी ने यह उद्घाटित किया कि यह वही पत्रकार है जिन्होंने थप्पड़ वाली घटना लिखी थी। राजीव ने सिर हिलाया और मुस्कराये।

“अच्छा?” मैंने उनसे मेज पर पूछा। उन्होंने अपना सिर हिलाया और फिर मुस्कराये। उन्होंने कुछ नहीं कहा। सोनिया ने गुस्से से देखा। उन्होंने ने भी कुछ नहीं कहा। मैं संजय से कभी नहीं मिला”।

76 वर्षीय बुजुर्ग अमेरिकी पत्रकार न्यु जर्सी, यूनाइटेड स्टेट्स में अपने परिवार के साथ रहता था।