बिल गेट के परोपकार का दूसरा पक्ष: 30,000 भारतीय लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन की जांच के लिये बली के बकरे के रूप में प्रयोग किया गया था।

Posted on by Rohan Desai
 
  

वैक्सीन के लिये क्या परोपकार किया गया है, हम आश्चर्यचकित हो रहे है, विशेषकर तब जब यह मामला बिल गेट्स से जुड़ा हुआ है। विश्व के सबसे अधिक धनी व्यक्ति ने अपार धन छोड़ देने का निर्णय किया है जिसे उन्होंने कम्प्यूटर को बेच कर प्राप्त किया था। यह एक परोपकार था जिसे विश्व ने पहले प्रमाणित नहीं किया था। श्रीमान गेट्स ने, अपनी पत्नी बिलिंडा के साथ, एक फाउंडेशन को बनाया जो इस अर्जित सम्पत्ति को गरीब देशों जैसे अफ्रीका, भारत और ऐसे अन्य देशों में जिन्हें स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता हैं, में बाटेंगा।

bill2

बिल गेट्स ने, अपनी पत्नी के साथ, एक फाउंडेशन को बनाया जो अर्जित धन को बाटेगा गरीबों में: अफ्रीका, भारत और ऐसे अन्य देशों में जिन्हें स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता है

बिल गेट्स भारत के खराब स्वास्थ्य क्षेत्र को धन क्यों उपलब्ध करा रहे है? 2014 में एक अर्धसत्य लेकिन नकारात्मक उत्तर आना शुरु हो गया, जब देश के उच्चतम न्यायालय ने इस बारे में प्रश्न उठाते हुये पूछा कि भारत के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में फाउंडेशन के क्रियाकलाप क्या है।

2009 में, आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले के अदिवासी बच्चों को ह्यूमन पैपीलोमा वायरस (HPV) वैक्सीन को सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिये दिया गया था। 9 से 15 साल की उम्र वाली लगभग 16,000 लड़कियों को राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा गार्ड्सिल ( मर्क द्वारा उत्पादन की गयी) की तीन खुराक दी गयी थी। यह मामला ध्यान में तब आया जब कुछ महीनों बाद कई लड़कियों का स्वास्थ्य खराब होने लगा और आने वाले महीनो में पांच लड़कियों की मौत हो गयी। ऐसे दो मौत के मामले गुजरात वडोदरा से सामने आये, जहाँ 14,000 आदिवासी बच्चों को एचपीवी वैक्सीन सर्वैरिक्स को लगाया गया था जिसे ग्लैक्सो स्मिथ्क्लाइन (GSK) के द्वारा बनाया गया था।

इंदौर के 16 वर्षीय अमन धवन ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव को पाने के लिये गार्डसिल 9 दवा के परीक्षण में नामांकन कराने के बाद अपना वजन और ताकत खो दिया। उस यह नहीं मालूम था कि उसे इस प्रयोग के लिये चुना गया था।

जिस समय यह मामला प्रकाश में आया ठीक उसी समय उत्तरी कोलम्बिया में ऐसे ही समान लक्षण वाली जवान लड़कियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सन्योगवश, इन लड़कियों को भी गार्ड्सिल की खुराक दी गयी थी।

जब एक गैर सरकारी संगठन ने आंध्र प्रदेश का दौरा किया तो बहुत भयानक जानकारियां मिलना शुरू हुई। उस गैर सरकारी संगठन की एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता समा ने मार्च 2010 में खम्मम का दौरा किया था और पाया कि 100 से ज्यादा लड़कियां मिर्गी, पेट में दर्द और सर में चक्कर की शिकार हुयी थी, लड़कियों ने जल्दी मासिक धर्म और मासिक ऐंठन के साथ अधिक रक्त स्राव की भी शिकायत किया। समा ने इस मुद्दे को उठाया कि इन छात्राओं को स्वास्थ्य देखभाल सुविधा उपलब्ध कराने से पहले बली का बकरा बनाया गया था। अनपढ़ माता पिताओं को वैक्सीन के असली प्रभाव के बारे में अंधेरे में रखा गया था और उनमें से बहुत सारे लोगों ने अपनी सहमती अंगूठे के निशान को लगा कर दिया था।

Sana Ansari

उन्नीस वर्षीय सना अंसारी इंदौर में अपने घर पर। वह सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिये एक वैक्सीन के एक परीक्षण में नामांकित थी।

अमेरिकी गैर सरकारी संगठन, प्रोग्राम फॉर एप्रोप्रिएट टेक्नॉल्जी इन हेल्थ (PATH) ने इस अध्ययन को कराया था। वे इस बात का परीक्षण कर रहे थे कि सर्वाइकल कैंसर की दवा युवा महिलाओं पर कैसा असर करेगी। और पाथ का यह अनैतिक परीक्षण किसी और के द्वारा नहीं बल्कि बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा था। बड़े दुख की बात है कि इस अध्ययन को फाउंडेशन के द्वारा सफल स्वीकार किया गया था। बिल गेट्स फाउंडेशन ने पाथ को अफ्रीका और एशिया में रोटावायरस वैक्सीन और नियुमोकोक्कल वैक्सीन के अध्य्यन के लिये भी अनुदान दिया था।

कुछ दिनों के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2009 में घोषित किया कि दो एचपीवी प्रकार सर्वाइकल कैंसर के कारक है, पाथ ने विश्व के भिन्न भिन्न भागों: पेरू, वियतनाम, युगांडा और भारत में अपना पांच साल का प्रोजेक्ट शुरू कर दिया।

गरीबों की ज़िंदगी का कोई मूल्य नहीं होता, विशेषकर अगर वे तृतीय विश्व के देशों से सम्बंधित हों। मानव पर परीक्षण का गलत निर्णय बिना किसी अधिक झमेले के किया जाता है और अधिकारीगण किसी अन्य ओर देखना पसंद करने लगते हैं जब उसमें लाखों डॉलर शामिल हो जाता है।

Tagged , , , , , , |

Leave A Response