सुषमा स्वराज और उनके मानवीय स्पर्श ने एमईए को एक नया अर्थ दिया है। नौकरशाही की बाधायें गायब होती दिखायी दे रहीं है।

Posted on by kapil
 
  

कई सारे प्रशंसनीय प्रभावों में से एक जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सरकार में किया है वह सभी मंत्रियों के बीच एक सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को पैदा करना है। केवल दिखावे के लिये नहीं, प्रभावी तरीके से, सभी इस बात को समझते हैं कि उत्तरदायित्व कुंजी है, और यहाँ कामचोरों के लिये कोई जगह नहीं है। अब कोई भी धूर्त व्यक्ति मंत्री पद के लाभ का मज़ा नहीं ले सकता है…….मोदी, बड़े भाई की निगाह सब पर है।

Sushma Swaraj

सुषमा स्वराज नरेंद्र मोदी के साथ

लेकिन सुषमा स्वराज अपने कर्तव्यों का प्रभावी ढ़ंग से पालन नहीं कर रहीं है क्यों मोदी देख रहे होंगे। वास्तविक्ता में वह अब तक के सबसे अधिक मानवीय रूप का आनंद ले रही हैं. और वहाँ कोई भी गड़बड़ और धूमधाम उनके पास नहीं है। वह बहुत शान्ती के साथ अपना काम कर रहीं है। इन दो सालों के अंदर, इस कमजोर महिला ने अकेले ही विदेश मंत्रालय के चेहरे को ऊपर उठाया है जो लम्बे से नौकरशाही के चंगुल में फंसा था। यह नौकरशाही की श्रेष्ठता के कलंकित अभिमान से पीड़ित था, इस अनुभव के साथ कि यह सम्भ्रांत लोगों से सम्बंधित है और सामान्य लोगों की पहुंच यहाँ तक नहीं होनी चाहिये।

उन सभी ठोकरों को तंत्र से बड़े पैमाने पर हटाया जा चुका है। विदेश मंत्री, जो तेज तर्राक होने के साथ सबसे ज्यादा देखभाल करने वाली सदस्या हैं, विदेश में फंसे या बंधक बनाये गये भारतीयों को बचाने के लिये ट्विटर की ताकत का उपयोग कर रही हैं। उन्होंने अब तक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने और विदेश नीति को निर्धारित करने से ज्यादा लोगों की जानें बचायी है।

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सुषमा स्वराज अपने चीनी और रूसी प्रतिरूपों के साथ

पहली बार, सुषमा स्वराज के नेतृत्व में एमईए ज़मीनी स्तर पर काम कर रहा है। वह सोशल मीडिया के द्वारा प्राप्त जानकारी के माध्यम से परेशानी में पड़े भारतीयों के साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़ कर, बचाव अभियान की देखरेख और बंधक बनाये गये लोगों छुड़वाने के लिये समझौते का कार्य कर रही हैं।

उन्होंने दर्ज़नों अवसरों पर यह दिखाया है कि क्यूं एमईए सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं और विदेश नीति को बनाने के लिये नहीं है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका आम आदमी को मानवीय स्पर्श उपलब्ध कराने की रहती है। जिस तेजी के साथ वह परेशानी में पड़े लोगों के बुलावे पर अपनी प्रतिक्रिया देती है और उनकी व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की प्रवृत्ति ने भारतीय कूटनीति को एक नया, स्पष्ट अर्थ दिया है।

Anyone can reach out to Sushma Swaraj on Twitter. Just the way it should be.

कोई भी क्यक्ति ट्विटर के माध्यम से सुषमा स्वराज तक पहुंच सकता है। जैसे उसे पहुचना होगा।

कोई भी अन्य मंत्री इतनी आसानी से पहुंच में नहीं है जैसे की सुषमा स्वरावज पहुंच में हैं। वह भारतीय राजनीति की सुपरवुमन बन चुकी है, एक ऐसी महिला जो हर किसी को सहायता देने के लिये तैयार है। विश्व में जब हिंसा और विनाश बढ़ रहा है, तब वह उम्मीद के प्रकाशस्तम्भ की तरह उदीयमान हुयी है।

उनका सहायता का हाथ हाल ही में एक बार फिर दिखायी पड़ा। जब उनकी जानकारी में आया कि 10000 भारतीय साऊदी अरब की रेतों पर, अनियंत्रित बेरोजगारी के कारण, आ गया है, वह तुरंत ही कार्यवाही में आ गयीं, केवल वहाँ पहुचने, बचाव को शुरू और राहत कार्यवाही की देर थी। मंत्री में, 30 जुलाई से शुरू की ट्वीट की श्रृन्खला में, नियमित रूप से विकास और आपदा के समय अपनाये गये मानकों का नवीनतम उल्लेख किया है।

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एक अन्य उदाहरण सुषमा स्वराज के सबसे अधिक उत्तरदायी होने का

चाहे वह मामला एक भारतीय महिला को बचाने का रहा हो, जिसे दक्षिण अफ्रीका में घर के अंदर कैद किया गया था, एक महिला की सहायता करना जिसने अपना पासपोर्ट और पैसा जर्मनी में खो दिया था, 168 भारतीय बंधकों को इराक में बचाने की सहायता, या यमन आपदा के दौरान भारतीयों को बचाने के लिये बड़े पैमाने पर संयोजन की कोशिश को करना, सुषमा स्वराज ने लगभग सभी भारतीयों के साथ मानवीय समबंधों को जोड़ा है। उनकी कोशिशों का नाराज़गी भरे विरोध होने के बावज़ूद प्रशंसा किया जा रहा है।

श्रम मंत्रालय, मानव संसाधन मंत्री, या कृषि मंत्री, उदाहरण के लिये एमईए से एक या दो अध्याय सीख सकते हैं। विदेशों में श्रमिक परेशान हैं, और भारत में छात्र और किसान भी कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। बहुत मुश्किल से मंत्रियों बंडारू दत्तात्रेय , प्रकाश जावड़ेकर या राधा मोहन सिंह को जमीनी स्तर पर लोगों के साथ जुड़ते हुये देख पाते हैं। वे हो सकता है अपना काम अच्छे से कर रहे हों, लेकिन ज़मीनी स्तर पर लोगों से जुड़ना भी अत्यावश्यक है। केवल तब ही हम अपने आपको ‘गुंजायमान’ लोकतंत्र कह सकते हैं।

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, राज्य/सरकार के मुखियाओं के साथ इंडिया पैसेफिक आइलैंड के फोरम के द्वितीय सम्मेलन में एक सामूहिक फोटो को खिंचाते हुये

यह हमारे नेताओं के लिये बहुत ही आवश्यक होगा कि वे अपने आराम क्षेत्र से बाहर आयें और लोगों के साथ सम्बंध स्थापित करें। सीधा सम्बंध उन लोगों में विश्वास को लम्बे समय तक स्थायी रखता है, जो यह मानते है कि राजनीतिज्ञ हमेशा पहुंच से बाहर रहते हैं। कठोरता राजनीति में एक अभिशाप है। यह केवल कुछ साल का कार्यकाल दिलाता है।

विनम्रता, जैसा सुषमा स्वराज द्वारा दिखाया गया, भारतीय राजनीति से लगभग लुप्त होती जा रही है। अगर यह प्राकृतिक रूप से शक्तिशाली राजनीतिज्ञों में शुरू नहीं होती है, तब मोदी हर बार ऊंचे पदों पर बैठने वाले राजनीतिज्ञों के ऊपर कुछ न कुछ दंड अवश्य लगायेंगे।

कई अन्य मंत्रियों को एक या दो सबक सुषमा स्वराज से सीखने चाहिये

चुनौती भरी परिस्थितियो से सुरक्षा ने श्रीमती सुषमा स्वराज को नेतृत्व करने की योग्यता को आकार और स्वरूप दिया है। अगर हमारे आधे राजनीतिज्ञ भी इसे सुलझाने कि कोशिश करते हैं तो भारत का भविष्य बहुत ही उज्ज्वल हो जायेगा।

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