विमुद्रीकरण ने भारत विरोधी उठापटक पर हमला किया है जिससे कालाधन पोषित कार्यक्रमों के लिये पूंजी की कमी हो गयी है

Posted on by kapil
 
  

कई दिनों से भारतीय मीडिया ने टीवी की स्क्रीन पर सीमा पार से होने वाली गोलीबारी समाचार को नहीं दिखाया है। क्या कश्मीर निष्क्रिय स्थिति में है। दंगों,पथराव या नरहत्या राजनीति या अलगाववाद के नाम पर होने की सूचना नहीं है। क्या हुआ? कहाँ गयी वो अराजकता और कसूरवार भारत के प्रति विरोध।

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मीडिया का ध्यान कश्मीर की अस्थिरता से खींच लिया गया है

नवम्बर 8 को, प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को एक अचानक से लिये गये निर्णय: 500 रुपये और 100 रूपये के विमुद्रीकरण से सबको चौंका दिया है। वर्तमान स्थिति बड़े चित्र को स्पष्ट चित्रित कर रही है। काला धन सभी आपाराधिक गतिविधियों का वाहक है। अपराध जगत धीरे-धीरे ऊपर से नीचे आदेशों की शृन्खला का पालन करता है, ठीक वैसे ही जैसे सफेद-पोश व्यावसायिक दिग्गज करते हैं। विमुद्रीकरण ने पिरामिड के ऊपरी स्तर को नष्ट कर दिया है और नीचे का ढ़ेर रेंग रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री मोदी का स्वच्छ भारत अभियान में काला धन की सफाई विशेषता भी शामिल थी।

पारदर्शी भारतीय अर्थव्यव्स्था की दिशा में उठाया गया कदम पाकिस्तान के धोखेबाज कार्यवाही को दबोच देगा। पहले, नकली नोटों को छापना हमारे घृणित पड़ोसी के लिये सबसे आसान था। नोट छापने को प्राप्त करना भी आसान था, और सबसे कठिन बात इसे बांटने में थी। वस्तुत:, भारत में विमुद्रीकरण अभियान ने पाकिस्तान को बहुत अधिक उत्तेजित कर दिया था, जब प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने भी इसी तरह की घोषणा किया, तब उन्हें पाकिस्तानी सेना प्रमुख द्वारा बहुत जोर देकर रोक दिया। इस हास्यास्पद नौटंकी को पूरे पाकिस्तान में राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारित किया गया था।

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पाकिस्तानियों को नकली भारतीय मुद्रा के साथ पकड़ा गया था

क्रिस्टोफर नोलन की मूवियों की तरह, इस कदम ने बहुत सकारात्मक टिप्पणियों को एकत्रित किया है, लेकिन ऐसे भी कुछ लोग हैं जो इस कहानी को समझ नहीं सकते है। सामान्य फेसबुक पोस्टों में चारों तरफ (सभी को बोलने का अधिकार है) घूम रहा है।

ऐसे पोस्ट ‘जागरूकता फैलाने के नाम’ और ‘भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ाई’ के स्थान पर भीड़ में उन्माद पैदा करने का काम कर रहा है। निश्चित रूप से कुछ गलत हो रहा है जब भ्रष्टाचार-विरोधी समाजसुधारक इस आंदोलन का विरोध कर रहे हैं। हमने जब इस समाचार को सुना था तब इस विरोध की तुलना तिनेन्मन स्क्वायर से होने की उम्मीद किया था। कृतज्ञता के साथ, 70 साल की धीमी अर्थव्यवस्था और कुटिल नौकरशाही निश्चित रूप से सामान्य आदमी को प्रबुद्ध करेगा।

अगर आप ध्यान से देखें, तो इसमें ऐसे कई लाभ है जो इससे होने वाले जोखिमों से ज्यादा है। महंगाई बहुत तेजी से नीचे आयेगी और भारतीय रूपये का मूल्य भी मजबूत होगा। प्रॉपर्टी खोजने वाले अब नौवें आसमान में होंगे,क्योंकि प्रॉपर्टी की कीमतें लगभग आधे से कम हो जायेंगी। यह इकट्ठा करने का समय है।

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बहुत सुबह का दृश्य: लोग बैंकों के खुलने का इंतजार करते हुये

दूसरा पहलू भी देंखें, तब हमें स्वीकार करना चाहिये कि इसका प्रबंधन ज्यादा अच्छे तरीके से किया जा सकता था। बैंकों के बाहर की लम्बी कतारें वृद्ध नागरीकों और ऑफिस जाने वालों के लिये समस्या बन गयी हैं। विमुद्रीकरण ने छोटे व्यवसाय मालिकों और दैनिक श्रमिकों, जिनके पास वैधानिक पहचानपत्र नहीं है, को प्रभावित किया है। इस घटनाक्रम ने मृत्यु की भी सूचना दिया है, जो उम्रदराज़ लोगों ने हृदयाघात की वजह से हुयी है। लेकिन एक बार फिर, इन मौतों के ऊपर भारत-विरोधी नौटकियों द्वारा राजनीति हो रही है। हम इस स्थिति का अंदाज़ा इस कोशिश से लगा सकते है जब एक चर्चित भारतीय समाचार-पत्र ने झूठे समाचार के लिये माफी मांगी थी, इस समाचार मे एक वृद्ध नागरिक की एटीएम कतार में मौत को प्रचारित किया गया था। यह सही जिसे उन्होंने कहा: जहाँ कहीं भी धुआं है वहाँ आग है।

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