क्या रेस कोर्स रोड के नाम लोक को कल्याण मार्ग से बदल देने पर भारतीय प्रधानमन्त्री की कार्यकुशलता ज्यादा बढ़ जायेगी?

Posted on by Arnab
 
  

“नाम में क्या रखा है?” अंग्रेजी कवि शेक्सपियर ने बहुत ही आलंकारिक तरीके से पूछा था‌।

नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (एनएमडीसी) ने हाल ही में घोषित किया कि ल्युटियन की दिल्ली के रेस कोर्स रोड, आरसीआर के नाम से चर्चित, का नाम बदल कर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया है। यह निर्णय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली मीटिंग में लिया गया था।

Race Course Road

रेस कोर्स रोड, आरसीआर के नाम से चर्चित, का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया है

जबकि दिल्लीवासी सड़कों का नाम, जिनका अपना ऐतिहासिक महत्व है, बदले जाने से क्रुद्ध हो रहे हैं, इसके लिये जिम्मेदार अधिकारीगण, नाम में भारतीयता की भावुकता से अपने आप को रोक नहीं पा रहे हैं। बहुत पहले इसका नाम दिल्ली रेस कोर्स के बदले रखा गया था, जो 1940 में स्थापित दिल्ली रेस कोर्स का हिस्सा था।

इस सड़क का बहुत महत्व है क्योंकि प्रधानमंत्री का अधिकारिक निवास इसी सड़क पर स्थित है। बीजेपी की मीनाक्षी लेखी के अनुसार, रेस कोर्स रोड नाम “भारतीय नैतिकता और मूल्यों के साथ मिलान” नहीं करता है। यह कहते हुये उन्होंने सभी तरह के परिदृश्यों को जोड़ा: पिछला नाम “सामान्य जनता से अलग होने के भाव को देता है और यह किसी भी प्रधानमंत्री के लिये प्रेरणा नहीं बन सकता है।

Jaipur Polo Grounds Delhi

पोलो का खेल एक स्वदेशी खेल है जिसे हमारे शाही लोगों द्वारा खेला जाता था

उनकी “भारतीय नैतिकता” कुछ ज्यादा भ्रामक है, अगर मूर्खतापूर्ण नहीं है। जयपुर पोलो मैदान, रेस क्लब का एक हिस्सा भूतपूर्व रेस कोर्स में स्थित था, पूरी तरह से भारतीय भावनाओं से ओत-प्रोत है। पोलो का खेल एक स्वदेशी खेल है जिसे हमारे शाही लोगों द्वारा खेला जाता था। यहाँ तक कि घुड़दौड़ भी एक विदेशी विचार नहीं हैं। जहाँ तक बात रही शब्दों की, हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि अंग्रेजी भारत की कार्यकारी भाषा है; हमारा संविधान इसी भाषा में लिखा गया है!

हम सभी तरह से अपने प्रधानमंत्री का सम्मान करते हैं, लेकिन एक सड़क का नाम बदलना जिसमें वह रहते है जनसामान्य के विचारों को बहुत मुश्किल से बदल पायेगा। लुभावने और उच्च आलंकारिक शब्दों के अतिरिक्त, लोक कल्याण मार्ग बहुत मुश्किल से किसी महत्व को स्पष्ट करता है। यह नाम इस एहसास को देता है कि यह भारत के भीतरी प्रदेश में स्थित है, जहाँ आधे पढ़े बाबुओं का समूह किसी अच्छे काम को करने के बजाय नामकरण करते हैं।

Lok Kalyan Marg

लुभावने और उच्च आलंकारिक शब्दों के अतिरिक्त, लोक कल्याण मार्ग बहुत मुश्किल से किसी महत्व को स्पष्ट करता है

अगर आप दिल्लीवासी हैं, और आप औरंगज़ेब सड़क से कनॉटप्लेस तक जाने के लिये गुजरते हैं तो आप एक ऐसे ऐतिहासिक क्षेत्र से गुजरते हैं जिसमें आज भी कॉलोनी की सुंदरता बह  रही है लुभावने और उच्च आलंकारिक शब्दों के अतिरिक्त, लोक कल्याण मार्ग बहुत मुश्किल से किसी महत्व को स्पष्ट करता है। दिल्ली के गोल ऐतिहासिक बाज़ार का नामकरण राजीव चौक दो दशक पहले किया गया था आज यह महत्वहीन हो गया है। आज, राजीव चौक, जिसका नाम भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर कांग्रेस शासन के दौरान किया गया था, सिर्फ एक मेट्रो स्टेशन है।

आप केवल अभिप्राय पाते हैं……………

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