मेनका गान्धी के स्वामित्व वाली सूर्या ने भारत के पहले यौन घोटाले को 1978 में प्रकाशित किया था। कर्मा ने उसे अदा किया 38 साल के बाद!

Posted on by kapil
 
  

बीजेपी नेता वरूण गांधी एक बहुत बड़ी समस्या में है। पिछले हफ्ते, सांसद के चित्र इंटरनेट पर दौड़ रहे थे, जो उन्हें एक महिला के साथ समझौता करने की मुद्रा में दिखा रहे थे।

हालांकि वरूण ने सभी तरह के आरोपों का खंडन कर दिया है कि वह हनीट्रैप में फसाये गये थे और उन्हें सामरिक रहस्यों का रहस्योदघाटन करने के लिये ब्लैकमेल किया था। पार्टी की ओर से प्रवक्ता ने कहा कि वे इस मामले मे कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे जबकि वरूण ने इस मामले में पहले से ही सफाई दे दी।

Maneka Gandhi

वरूण गांधी पत्नी यामिनी राय और मां मेनका गांधी के साथ

एक बार चित्र को देखने पर कोई भी कह सकता है कि एमएमएस में दिखने वाला आदमी वरूण गांधी नहीं है बल्कि उनका कोई हमशक्ल है। वरूण गांधी किसी भी तरह से चित्र में अब से सालों पहले दिखाये गये आदमी की तरह नहीं दिख रहे हैं। और अगर ऐसा भी है, तो उस लड़के (जो मुझसे बहुत जवान है) जिसे पूछा जा रहा है सांसद स्वयं जिम्मेदार है, इसलिये मैं इस घोटाले को एक चूक की संज्ञा देना चाहूंगा। अगर युवा वरूण ने कुछ निजी क्षणों को एक महिला के साथ अतीत में साझा किया था, जो उनके अपने निजी जीवन से सम्बंधित है।

लेकिन क्या जिंदगी इतनी आसान थी। कई सालों पहले, वरूण की मां मेनका गांधी ने बहुत साहस करके भारत के पहले यौन घोटाले को सूर्या, मैगज़ीन जिसकी मालिक वह थीं, में महत्वपूर्ण पेज के रूप में प्रकाशित किया था। 1978 में उद्घाटित इस घोटाले में, उस समय के रक्षा मंत्री जगजीवन राम के 40 वर्षीय विवाहित पुत्र सुरेश राम और उनकी प्रेमिका, कॉलेज जाने वाली महिला, जो उम्र में उनसे आधी, शामिल थी। मेनका, जिनकी शादी संजय गांधी के साथ हुयी थी, बिना किसी प्रतिबंध के दो लोगों के निर्वस्त्र चित्र को सूर्या में उपयोग किया था।

Maneka Gandhi

एक युवा और साहसी मेनका गांधी ने सुरेश राम के यौन घोटाले की निर्वस्त्र तस्वीरें अपनी सूर्या पत्रिका में जारी की थी

कहने की जरूरत नहीं है कि, इन चित्रों ने उस समय के इंटरनेट विहीन भारत में हलचल मचा दिया था जब अश्लील सामग्री प्रयोग करने का माध्यम कामोत्तेजक वयस्क मैगज़ीनों में होती थी। सूर्या ने इस मैगज़ीन की कई प्रतियां बेची थी, और जगजीवन राम का राजनैतिक जीवन-यात्रा खत्म होने के कगार पर आ गयी थी। इस दुर्भावना के पीछे कई कारण थे। जगजीवन ने इंदिरा गांधी की कांगेस पार्टी को 30 साल तक सेवा करने के बाद छोड़ दिया, और जनता दल पार्टी से जुड़ गये जिससे लाभ की स्थिति प्राप्त हो सके।

अब, जगजीवन राम प्रधानमंत्री पद के लिये एक मजबूत दावेदार थे, और वह 1977 में सरकार से जनता पार्टी की सहायता करने में एक साधन थे। जनता दल इंदिरा गांधी के लिये आंख की किरकिरी थी क्योंकि यह कांग्रेस से मतभेद करने वालों मोरारजी देसाई, जगजीवन राम, हेमवती नंदन बहुगुणा (कांग्रेस लोकतंत्र के लिये), भारतीय जनसंघ सदस्यों अटल बिहारी वाजपेयी सामाजिक कार्यकर्ता जॉर्जफर्नांडीज़, चंद्रशेखर, मोहन ढारिया और कृष्ण कांत और भारतीय क्रांति दल के चरण सिंह से मिलकर बनी थी। कोई आश्चर्य नहीं तब मेनका- इंदिरा गांधी की पुत्र-वधू- ने सभी समर्थन को प्राप्त करते हुये पत्रकारिता की सभी नैतिकताओं को तोड़कर इन चित्रों को प्रकाशित किया जिसने जगजीवन राम की प्रधानमंत्री बनने की आकांक्षा को खत्म कर दिया।

Khushwant Singh and wife Kanwal with Manzoor Qadir and wife

खुश्वंत सिंह और पत्नी कंवल मंज़ूर कादिर और पत्नी के साथ

कहानी अभी बाकी है। सुरेश और उनकी प्रेमिका सुषमा चौधरी, जो उस समय सत्यवती कॉलेज में राजनीति विज्ञान की छात्रा थी, की इन सुस्पष्ट चित्रों को नेशनल हेराल्ड, कांग्रेस के समाचार पत्र में भी प्रकाशित किया गया था। प्रतिष्ठित लेखक और पत्रकार खुश्वंत सिंह, जो उस समय सूर्या के सलाहकार सम्पादक थे, ने कहा कि इन चित्रों को प्रेस में भेजने के पहले एक दूत जगजीवन राम की ओर से भेजा गया था, जिसने कहा कि राजनेता मोरारजी देसाई और जनता दल को छोड़कर इंदिरा गांधी की ओर लौट आयेंगे। लेकिन इसकी एक शर्त है: सूर्या को सुरेश राम के कामुक चित्रों को प्रकाशित करने की योजना को छोड़ना होगा।

लेकिन जगजीवन बात करने के लिये कभी नहीं आये, और बाकी सबकुछ वैसा हुआ जैसा कि उन्होंने कहा इतिहास है।

इस घटना के बाद, सुरेश राम के द्वारा एक घृणित प्रयास कहानी में नया मोड़ लाने के लिये किया गया था। उन्होंने दिल्ली पुलिस के पास एक एफआईआर यह कहते हुये दर्ज कराया कि वह और सुषमा एक मर्स्डीज़ में सफर कर रहे थे, जब उन्हें 10 लोगों ने बंदूक की नोक पर दो टैक्सियों में घेर लिया और दबाव डालकर उत्तर प्रदेश में लोनी में ले गये थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें और उनकी प्रेमिका को मार-मारकर बेहोश किया गया और नग्न तस्वीरों को भी खीचा गया था। इस मामले को उस समय समाप्त कर दिया गया जब दिल्ली हाईकोर्ट जज ने यह इंगित किया कि एफआईआर को बहुत देर से दर्ज कराया गया था, और चित्रों को बलप्रयोग के द्वारा नहीं लिया गया था।

Suresh Ram (L) with Pandit Nehru

प्रफुल्लित जगजीवनराम (बायें) पंडित नेहरू के साथ

सुरेश राम बहुत दिनों तक इस घटना के बाद जीवित नहीं रहे। कुछ ही सालों बाद, वह हृदयाघात से 46 वर्ष की उम्र में मर गये थे। सुषमा का सुरेश राम से स्पष्ट विवाह हुआ और उनके साथ उनकी मृत्यु, 1986,  तक उनके साथ रहीं।

इतिहास अपने आप को 38 साल के बाद दुहरा चुका है और कर्मा ने मेनका गांधी को अदा किया और कैसे!उनका पुत्र वरूण अभी एक यौन विवाद में घिर गया है जो उनके राजनैतिक जीवन यात्रा की मौत की कील हो सकता है। और सुरेश राम अपनी कब्र में नृत्य कर रहे होंगे, जबकि सुषमा दिल्ली के किसी कोने में जरूर हस रही होंगी।

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