पाकिस्तान के ‘अच्छे आतंकी’ कश्मीर में क्रियाशील है और बुरे रॉ के लिये कार्य करते है

Posted on by kapil
 
  

दुनिया के अधिकांश हिस्सों के लिये, आतंक सबसे ज्यादा नुकसानदायक विपदा और मानवता पर हमला है। अन्य कई देशों के बीच, पाकिस्तान आतंक के हिंसक कार्यवाहियों को दशकों से अधिक लम्बे समय से चला रहा है।

 लेकिन जबकभी यह आतंक पाकिस्तान की मिट्टी पर हमला करता है तो उंगली हमेशा अमेरिका की सीआईए या भारत की रॉ की तरफ उठाई जाती है। इस तरीके से पाकिस्तान आने वाले झटको: अपने ऊपर लगने वाले आरोपों को किसी अन्य के ऊपर लगाने के द्वारा, डटकर सामना करता है।

taiba1

हाफिज़ सईद, चित्र के बीच में, जमात-उद-दावा संगठन का मुखिया और लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक

पाकिस्तानी नेताओं द्वारा आतंकी हमले के दौरान दिये गये बयानों की परवाह नहीं की जाय तो, देश बहुत ही दृढ़ता के साथ अच्छे तालिबान और बुरे तालिबान के विचार में विश्वास करता है। सामान्य विचार यह है कि अच्छे आतंकी जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा है जो कश्मीर में सक्रिय है, बुरे आतंकियों की सूची में तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) शामिल है और यह ठीक वैसा ही है जैसा रॉ द्वारा बनाया गया है।

इसका कारण बहुत सीधा है: पाकिस्तान की खुफिया इकाई आईएसआई इन लड़ाकों को अपने युद्ध में लड़ने और आतंक को फैलाने के लिये तैयार करती है। लेकिन जब इनमे से कुछ अपने घर में बड़े हुये राक्षस ज्यादा बड़े हो जाते है और अपने आकाओं के विरूद्ध खड़े होते हैं, तब वे उसे त्याग देते हैं और उन्हें एक अवैध सेना बतलाते हैं जिसे भारतीय रॉ द्वारा तैयार किया गया है।

taiba3

जनवरी महीने में बाचा खान विश्वविद्यालय पर हमले में 35 लोग मारे गये थे

विडम्बना रूप में, पाकिस्तान विश्वास करता है कि  रॉ देश के अंदर सभी राज्य-विरोधी गतिविधियों को चला रहा है। वह सभी आतंकी गतिविधियों: नीचतापूर्ण तरीके से पेशावर सैन्य स्कूल पर, जिसमें 141 से अधिक मासूम बच्चों की हत्या हुयी थी, हमले से शुरू करते हुये इस साल जनवरी में बाचा खान विश्वविद्यालय पर हुये हमले तक के लिये भारत को जिम्मेदार ठहराता है।

यह मामला नही था कि टीटीपी ने सैन्य स्कूल पर हूये हमले के लिये जिम्मेदारी का दावा किया था, और इसे ज़र्ब-ए-अज़्ब, उत्तरी वज़ीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना की कार्यवाही के लिये बदले के रूप में बतलाया।

टीटीपी इस्लामिक आतंकियों के उपद्रवी दल का समूह है जो कठोर धार्मिक नियमों को लागू करना चाहता है जैसा कि अफगानिस्तान में 1990 के दौरान स्थापित किया गया था। टीटीपी का अस्तित्व आधिकारिक रूप से दिसम्बर 2007 में घोषित किया गया था। एक साल के अंदर ही 25 अगस्त 2008 को, पाकिस्तान ने इस समूह पर पाबंदी लगा दिया था, इसके बैंक खातों और अस्तियों के लेन-देन पर रोक लगा दिया था और इसे मीडिया के माध्यम से सामने आने पर रोक दिया गया था। टीटीपी के अस्तितव में आने का प्रमुख कारण इस्लामाबाद में सरकार से उनकी शत्रुता है।

Peshawar Army school attack

पेशावर सैन्य स्कूल हमले में 141 बच्चे मारे गये थे। पाकिस्तान का मानना है कि इस हमले को रॉ द्वारा कराया गया था, यद्यपि टीटीपी इस हत्या को कराने की जिम्मेदारी अपने ऊपर लिया था।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने टीटीपी की धमकी प्रतिक्रिया पर सैन्य बल और दमन के द्वारा जवाब दिया था। इस मामले में समस्या को सुलझाने के लिये थोड़ा या कुछ भी प्रयास नहीं किया गया है जो सीमांत क्षेत्रों, सीमा क्षेत्रों पर बड़ी मात्रा में हथियारों का प्रयोग और दशकों से चली आ रही असहिष्णु पारम्परिक धार्मिक सिद्धांतों के रूप में आर्थिक और राजनैतिक हाशिये की जड़ों में घुसा हुआ है।

इसके बजाय, वह भारत की तरफ उंगली घृणा को फैलाने के लिये उठाता है। खुलेआम झूठ बोलना पाकिस्तान के सैन्य मुद्दे को नहीं सुलझा सकता है और सीमा के दूसरी तरफ बैठे अधिकारियों को यह बात समझनी चाहिये।

Tagged , , , , |

Leave A Response