एम्नेस्टी इंटरनेशनल को भारत के बाहर ग्रीनपीस का अनुसरण करना चाहिये

Posted on by kapil
 
  

सामान्य रूप से, सार्वभौमिक नैतिक कार्यक्रमों और मानवाधिकारों को सम्भालने का दावा करने वाली संस्थायें, गैर सरकारी संगठन, जांच परख किये जाने से सुरक्षित हैं क्योंकि उन्हें  किसी की तरफदारी करने वाला नहीं कहा जाता है। उन्हें उल्लंघन कृत्य को करने के लिये नियमित, विवेचनात्मक समीक्षा, प्रोत्साहन करने से सुरक्षा प्राप्त है।

यद्यपि सभी बुरे नहीं है। कुछ गैर सरकारी संगठन अच्छे हैं तो कुछ बुरे है, और निश्चित रूप से कुछ बहुत बुरे गैर सरकारी संगठन भी है। दुख की बात है कि प्रतिष्ठित समूह छुपे लाभ के साथ उन्हें निष्प्रभावी कर देते हैं, मुख्य रूप वे से पश्चिम के लाभों की देखभाल करते हैं।

Amnesty International

ग्रीनपीस का सक्रिय कार्यकर्ता वनमानुष के रूप में कोलकता में केएफसी के विरूद्ध विरोध करते हुये

ग्रीनपीस के विरूद्ध, भारत की आर्थिक प्रगति में बाधा डालने के लिये, भारत सरकार के द्वारा की गयी कार्यवाही एक सबक के रूप में कार्य करना चाहिये, लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशनल, स्पष्ट रूप से, इसकी कोई भी परवाह नहीं कर रहा है। लम्बे समय से प्रशंसात्मक और सम्मानीय, लंदन-आधारित संस्था इस विश्वास को तोड़ सकती है।

एमनेस्टी इंटर्नेशनल इंडिया के विरूद्ध राज-द्रोह का आरोप लगाया गया है, आगे बताये गये नारे भारत और भारतीय सेना के विरुद्ध शनिवार को शहर में संस्थान द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बोले गये थे। अंतर्राष्ट्रीय वकालत समूह को गैरकानूनी रूप से संगठित, शत्रुता और दंगे को प्रोत्साहन देने के लिये आरोपित भी किया गया है।

Amnesty International

एबीवीपी ने बंगलुरू में यूनाइटेड थियोलॉजिकल कॉलेज और एमनेस्टी इंटर्नेशनल इंडिया के विरूद्ध कार्यवाही की मांग के लिये विरोध प्रदर्शन को आयोजित किया था

अगर आयोजनकर्ताओं पर लगाया गया, आतंकियों और पाकिस्तान के लिये समर्थन का, आरोप सत्य पाया जाता है, तो एमनेस्टि इंटर्नेशनल इंडिया का साहस, समाप्त समझा जा सकता है।

एक समय पर जब कश्मीर की घाटी घेरेबंदी में है, मानव अधिकार इकाइयों को अपने उत्तरदायित्वों को सावधानी से पूरा करना चाहिये, विशेष रूप से उस समय जब भारत स्वतन्त्रता दिवस की आगोश में था। बंगलुरू में यह कार्यक्रम राष्ट्र-विरोधी भावनाओं के प्रति अपने रूझान को बतलाने के लिये एक सोची समझी चाल है, ऐसा प्रतीत होता है। अगर  एमनेस्टी इंटर्नेशनल भारतीय सरज़मी पर अपना स्थान बनाना चाहती है, तो उसे यह याद रखना होगा कि गैर सरकारी संगठन बहुत लम्बे समय तक जांच से बचने का आनंद नहीं उठा सकते हैं। एक गैर सरकारी संगठन द्वारा किया गया कोई भी कार्य जो राष्ट्र की सम्प्रभुता, उसकी वित्तीय वृद्धि को नुकसान पहुंचाता है, तुरंत संज्ञान में लाया जायेगा और उसी दिन कार्यवाही की जायेगी।

एमनेस्टी इंटर्नेशनल के विरूद्ध राष्ट्र-विरोधी नारे कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में लगाने के लिये एफआईआर पंजीकृत कराया जा चुका है।

एमनेस्टी इंटर्नेशनल, हजारों कर्मचारियों और कई करोड़ के बजट के साथ, पूरी धरती पर कार्य करता है। एमनेस्टी इंटर्नेशनल के कई सारे मालिक इच्छुक धनी नागरिकों के किये गये दानों में से लाखों का गबन करते हुये देखे गये हैं, ये इच्छुक नागरिक दान देकर विश्व के निर्धनों की सहायता करना चाहते है, साथ ही पहले से धनी लोगों को ज्यादा धनी बनने से रोकना चाहते हैं।

एमनेस्टी इंटर्नेशनल पूंजीवाद के आसान भ्रष्टतंत्र का बहुत बड़ा उदाहरण हो सकता है।

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