आज़म खान, प्रधानमंत्री के पद को सोचना छोड़ दें, आप राज्य के अग्रणी नेता पद के योग्य नहीं हैं!

Posted on by kapil
 
  

हाल ही में मीडिया ने बहुत साधारण प्रश्न समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आज़म खान से पूछा: केंद्र को उरी आतंकी हमले के परिदृश्य में क्या करना चाहिये था? उत्तर प्रदेश  के राजनीतिज्ञ ने रूखाई से उत्तर दिया कि केंद्र को अपनी इच्छा द्वारा दृढ़ नहीं होना होगा। सच है!

लेकिन खान, एक अनुभवी राजनेता जो लम्बे समय से सपा के साथ जुड़े हुये है, अपनी सनक को प्रकट करने से बच नहीं सके थे। नेता, जो अल्पसंख्यकों पार्टी की तरफ खींचने के लिये जाने जाते हैं, शेखी किया कि उनके पास भारत का प्रधानमंत्री बनने के सारे “गुण” हैं।

Azam Khan

आज़म खान को प्राय: भारतीय राजनीति में “उत्तरदायित्व लेने वाले” के रूप में जाना जाता है। यद्यपि यह बहुत छोटा मतलब देता है।

आज़म ने कहा, “मुझे भारत देश का प्रधानमंत्री बनाइये और तब मैं दिखाउंगा का देश कैसे चलाया जाता है…..मेरे पास अनुभव और शिक्षा दोनों है” ।

आज़म ने अपनी इच्छा प्रकट रूप से रखी, लेकिन बिना किसी नाटक को जोड़े नहीं, “तथ्य जो आड़े आयेगा वह यह है कि मै एक मुस्लिम हूं, इसके अतिरिक्त मेरे अंदर कोई कमी नहीं है” । हाँ, आपने सही सुना है। उन्होने अपने धार्मिकता वाले पत्ते को खेला, उस कारक का बीन बजाया जो भारत का प्रधानमंत्री बनने के लिये आवश्यक ही नहीं है।

इस प्रकार के दैनिक धारावाहिक प्रकार की टिप्पणियां न केवल भारत के अखंडता को चुनौती देते है, बल्कि उस जनसमूह का अपमान करते है जो अपने प्रधानमंत्री का चुनाव करते हैं। भारत के सबसे बड़े राज्य का मंत्री होने के नाते, खान यह महसूस करते है कि धार्मिक राजनीति उत्तर प्रदेश के राजनैतिक घटनाक्रम में निर्णय करने के लिये एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्या आज़म खान और अन्य मंत्री जो धर्म की राजनीति करते है इससे कुछ सीख सकेंगे।

लेकिन जनसमूह के साथ विपरीत मनोवैज्ञानिक खेल, अपने आपको एक अल्पसंख्यक नेता के रूप में दिखाना असंतोषजनक है। भारतीय कभी भी मुस्लिम नेताओं के विरूद्ध नहीं थे। मौलाना आज़ाद से लेकर हमारे पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम तक, हमने उन सभी को गले लगाया है जो हमारे आदर्श के रूप में बन सके है।

एक मुस्लिम होना “भारत में कोई कमी कमजोरी” नहीं है, जैसा कि मंत्री ने गलत बिंदु को उछाला है। प्रधानमंत्री होने के लिये, किसी को विशेष धर्म के साथ सम्बंधित होना भी आवश्यक नहीं है।  इसके लिये साहस ज्यादा मायने रखता है न कि भगवान के सामने राज्यनिष्ठा की कसम उठाना है।

Azam Khan

आज़म खान के पास प्रधानमंत्री बनने का कोई मौका नहीं है

केवल अपनी पार्टी को “बांधे” रखना ही पर्याप्त नहीं है। आज़म खान को श्रेष्ठ योग्यता का परिचय जनसमूह के नेतृत्व करने के लिये दिखाना होगा बजाय क्षुद्र टिप्पणियों को करना। हम ऐसे प्रधानमंत्री को नहीं चाहते हैं जो साम्प्रदायिकाता का उदाहरण स्थापित करता हो।

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2 Comments so far. Feel free to join this conversation.

  1. Varfolmeysa May 16, 2017 at 6:07 pm -

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