आतंक आईएसआईएस यौन दासियों को अपने वश में नहीं कर सकता है। यज़ीदी लड़कियां वहाँ से भाग कर मौत को खुशी से स्वीकार करना चाहती हैं।

Posted on by kapil
 
  

आईएसआईएस से बचे हुये लोगों की बहुत सारी कहानियां जिन्हें मैं पढ़ चुका है, उससे एक बात जो सामान्य रूप से उभर कर सामने आती है : गिरफ्त में रखी गयी महिलाओं का पशुओं की तरह व्यापार किया जाता है। आईएसआईएस की यौन दासियां कई हाथों से गुजरती है और हर बार उनसे हड्डी तोड़ देने वाले काम दिन में कराये जाते हैं, और रात में उनको गिरफ्त में रखने वाले यौन चरित्रहीनों लोगों के लिये शिकार की तरह होती है। मर्यादा को बचाने के लिये, अगर हम यह कह सकते कि, कुछ फिरफ्त में रखने वाले (जो आईएसआईएस के लड़ाके नहीं थे) उन्हें प्रतिदिन मारते पीटते नहीं रहे होंगे।

ISIS slaves

आईएसआईएस की यौन दासियां कई हाथों से गुजरती है और हर बार हड्डी तोड़ देने वाले काम दिन में कराये जाते हैं, और रात में उनको गिरफ्त में रखने वाले यौन चरित्रहीनों लोगों के लिये शिकार की तरह होती है

जबकि हम आईएसआईएस लड़ाकों की क्रूरता से भयभीत है, हम दएश के चंगुल से बचकर भागने में इन लड़कियों के द्वारा दिखाये गये चरित्रबल पर आश्चर्यचकित होकर रूक नहीं सकते हैं। लेकिन एक मनुष्य की आत्मा ऐसी कैसे है। जबतक हमारे ऊपर बहुत विषम परिस्थितियां नहीं आती है तबतक हमें अपने साहस को नहीं पहचान पाते हैं। और यज़ीदी लड़कियों के लिये जिन्होंने उनको कैद में रखने वालों के चंगुल से भागने की कोशिश किया था, मृत्यु को स्वीकार करना ज्यादा आसान था बजाय इसके कि वे आईएसआईएस आदमियों की यातनाओं को प्रतिदिन सहती रहें। उनके ऊपर किया जाने वाला हमला ज्यादातर मानसिक होता था न कि शरीरिक होता था।

नादिया मुराद, अब आईएसआईएस की यातना से बचने वाली के रूप में जानी जाने वाली, पिछले दिसम्बर में भागी थी। उसने तीन महीने तक नर्क की यातना को भोगा क्योंकि उसे उम्मीद थी कि एक दिन वह यहाँ से भागने के काबिल हो जायेगी। अगर भागते हुये नादिया को पकड़ लिया जाता तो उसे मार दिया गया होता। लेकिन क्रूर दैत्य बहुत बड़े थे इसलिये उसने “मरने को प्राथमिकता दिया और अंतत: यहाँ पर रूकी”।

नादिया मुराद, अब आईएसआईएस की यातना से बचने वाली के रूप में जानी जाने वाली, पिछले दिसम्बर में भागी थी

एक अन्य बचने वाली, लामिया हाची बशर, 18, ने अपनी कहानी विश्व को बतलायी। जब वह चौथी बार इराक के शहर हविजा से भागी थी, आईएसआईएस के आदमी उसके कदमों की आहट की ओर झपट पड़ रहे थे, इसी बीच एक बारूदी सुरंग उड़ गयी, और उसने अपनी दाहिनी आंख खो दिया। उसका चेहरा बुरी तरह से विकृत हुआ था।

लेकिन लामिया आशांवित है। एक आदमी के द्वारा वह बचायी गयी थी, जिसने उसे बाहर तस्करी कर दिया था, वह अपने आपको भाग्यशालियों में गिनती करती है। “यहाँ तक कि अगर मेरी दोनों आंखें चली जाती, तो भी यह मेरे लिये बहुत मूल्य रखता है, क्योंकि मै उन लोगों में से बच पायी हूं”। यह लड़की अपनी मात्र एक आंख और डरावने चेहरे के साथ जीने को प्राथमिकता देती है बजाय आईएसआईएस आदमियों के यौन दास की तुलना में, जो उनके क्रूरतापूर्ण व्यवहार यज़िदी लड़कियों पर होने के बारे में बतलाते हैं, हजारों अभी भी आईएसआईएस के शासन में बंदी है।

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बंदी यज़ीदी लामिया हाची बशर पहले और अब। उसने अपनी एक आंख खो दिया जब एक बारुदी सुरंग आईएसआईएस की गिरफ्त से भागते समय फट गयी थी।

बहुत सी खबरों के अनुसार, इस्लामिक राज्य ने 2000 से 4800 यज़ीदी महिला और बच्चों को बंदी बना रखा है, अगस्त 2014 में, जब दएश लड़ाके अपने गांव की तरफ उत्तरी इराक में कुर्द-बोलने वाली अल्पसंख्यकों को खत्म करने के लिये भागे थे क्योंकि यह एक प्राचीन मत था। तब से, अरब और कुर्द तस्करी करने वाले हर एक महीने में औसतन 134 लोगों को आज़ाद कराने का प्रबंध कर रहे हैं। लेकिन मई के बाद से, पिछले एक डेढ‌ महीने में यह संख्या कम होकर 39 रह गयी।

बचायी गयी यज़ीदी महिलाओं द्वारा डरावनी कहानियों को ध्यान से समझा जाय तो एक बात बहुत साफ है। आईएसआईएस, स्वयं को इस्लाम का रक्षक कहने वाला, कल्पना से परे गुमराह संगठन है। जिसे उदारशील लोग विक्षिप्त मस्तिष्क या मनोरोगी कि संज्ञा देंगे, आईएसआईएस इस कृत्य को, इस्लाम को सुरक्षा प्रदान करने के बहाने कर रहा है।

यज़ीदी धर्म, तथ्यों में, लगभग 6000 साल पुराना होने का विश्वास जताया जाता है। उन्होंने 73 जातिसन्हार का सामना किया है, हाल ही में आईएसआईएस का।

क्योंकि इस्लाम में “आनंद” की अनुमति नहीं है, दएश आदमी बंदी लड़कियों से उनके “पैशाचिक धर्म” से उन्हें शुद्धीकरण के बहाने शादी करते है। वास्तविकता में, वे शादी उनके साथ बिना किसी अपराधबोध के बलात्कार करने के लिये करते है, और एक बार ऊब जाने पर अन्य लड़ाकों को उन्हें बेच देते हैं। लेकिन सबसे बड़ी क्रूरता इन असहाय महिलाओं के ऊपर बंद दरवाजों के पीछे होती है वह इस्लाम या विश्व के किसी अन्य धर्म से समर्थन न मिलना है।

इसी अप्रैल 2015 की एक फोटो में, एक यज़ीदी महिला ने अपने मित्र के साथ यज़ीदी नव वर्ष के लिये आतंकियों द्वारा अधिग्रहित मोसुल, इराक के उत्तर में 57 किलोमीटर दूर, लालिश के पवित्र तीर्थ स्थल पर इच्छा मांगी।

जबकि हम आईएसआईएस के राक्षसी कृत्यों को पढ़कर सहम जाते हैं, ये बेनाम यज़ीदी लड़कियां अपनी खुद की लड़ाई साहस और घृणा के साथ उल्लेखनीय ढ़ंग से लड़ रही है। वे अपने पूरे परिवार को खो चुकी हैं, महीनों से कैद में रखी गयी हैं, अपने मुज़रिमों से चाबुक और संगठित बलात्कार का दंश झेल रही हैं, लेकिन कुछ भी उनके मस्तिष्क को गुलाम बनाने के योग्य नहीं हैं।

आईएसआईएस उन्हें डराता नहीं है और वे स्वतंत्रता की एक झलक पाने के लिये अपनी ज़िंदगी का खुशी से व्यापार कर रही है। यह लुटी हुयी यज़ीदी लड़कियों का साहस है जिसे हम सलाम करते हैं।

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