साठ के दशक में सोनिया गांधी और फ्रैंको लुइसोन के बीच प्यार की मंत्र मुग्ध करने वाली कहानी…. जब वह राजनीति से अछूती थी!

Posted on by Anand Mukherjee
 
  

हम में से अधिकांश ने कम से कम एक बार सच्चे प्यार का अनुभव किया है। कुछ प्रेम कहानियां समय की कसौटी पर खड़ी होती हैं जबकी अन्य कुछ धुल जाती हैं….. सोनिया गांधी, सभी व्यवहारिक उद्देश्यों के लिये भारत की ‘पहली महिला’, पहली बार बहुत भाग्यशाली नहीं थीं। साठ के दशक में उनका फ्रैंको लुइसोन के साथ प्रेम प्रसंग चार साल तक चला, राजीव गांधी के आने और सोनिया गांधी को अपने साथ लाने के पहले…..

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वह केवल किशोरी थीं जब वह फ्रैंको से मिली, लेकिन वह असली सेल्युलॉयड वंशावली के अधीन थीं। वह बहुत खूबसूरत, जीवन से परिपूर्ण और बिना किसी नियंत्रण के थीं। वह बॉलीवुड निर्माता की सपने की डाली हो गयी होती।

कुछ साल पहले एक इतालवी मैगज़ीन, ‘जेंटे’, के साथ दिये गये स्पष्टवादी साक्षात्कार में फ्रैंको ने एक अतीत का अनुभव किया जिसमें उसे भारत की सबसे मशहूर महिला राजनैतिक नेता के लिये तरस आता है! लेकिन वह कहता है कि वह उसके लिये खुश है।

वह महज 14 साल की थी जब वे पहली बार साठ के दशक जेसोलो के समुद्र किनारे मिले थे।

“अंतोनिआ माइनो (सोनिया गांधी का इतालवी नाम) के साथ मेरा प्रेम प्रसंग एक आशीर्वाद था…. हम हर जगह प्रेम और खुशी में थे”, फ्रैंको ने साक्षात्कार में याद किया।

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सोनिया मुझसे शादी करना चाहती थी!

फ्रैंको ने आगे खुलासा किया कि उनके परिवारों ने उनके रिश्ते को सहमति दिया था और सोनिया गांधी के माता-पिता खुशी से हर बार फ्रैंको का स्वागत करते थे जब भी वह ओर्बस्सानो, टयुरिन के पास,  में उनके घर का दौरा करते थे, जहाँ वे साठ के दशक में स्थानांतरित हुये थे। उन्होंने पत्रिका को बताया कि सोनिया गांधी उनसे शादी करना और अपनी बाकी की ज़िंदगी साथ बिताना चाहती थीं। ये एक भावनात्मक बंधन था जो शादी में बदला जाता, अगर राजीव गांधी की नज़र सोनिया पर ना पड़ी होती।

“मैं 26 साल का था जब समुद्र तट पर अपने छाते की छाया में उससे पहली बार मिला। मैं तब मशहूर था! यह गर्मियों की इश्कबाज़ी की तरह लग रहा था, लेकिन चार साल में खत्म हो गया। मैं एक फुटबाल खिलाड़ी था और वह मुझे अभ्यास सत्र में देखना चाहती थी…….”

“यद्यपि फुटबाल उसका ज़ुनून नहीं था। वह यह मेरे लिये करती थी। चैम्पियनशिप के बाद, गर्मियों के दौरान, हम सप्ताहांत का इस्तेमाल विसेंज़ा जाने के लिये करते थे!”

“मैं अंतोनिआ का पहला प्यार था। वह मुझसे चाहती थी कि मैं उससे शादी करने का वादा करू, लेकिन मैं इस विचार को अपने निज़ी कारणों से स्थगित कर देता था। दुर्भाग्य से, भाग्य ने उसके लिये अलग योजना रखी थी,”

उच्च शिक्षा के लिये सोनिया गांधी इंगलैंड चली गयीं जहाँ वो हमारे अपने राजीव गांधी से मिलीं।

अंत की शुरुआत

“1964 में, उसने इंगलैंड जाने का निर्णय लिया, यद्यपि मैं खुश नहीं था। उसने पत्र लिखा और मुझे धोखे में रखा था। एक बार वह छुट्टियों के लिये वापस आयी, वह बदल गयी थी। उसने भारत के “युवराज” राजीव गांधी से शादी करने का मन बना लिया था। यद्यपि इस बात ने मुझे बहुत चोट पहुंचायी, हमारी विदाई बहुत दुखद नहीं थी, हमने भाग्य को स्वीकार किया और एक दूसरे को अलविदा कहा………”

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फ्रैंको ने कहा, वह अब भी सोनिया के परिवार के सम्पर्क में है, त्यौहारों के दौरान उपहारों के आदान प्रदान के लिये साल में दो बार उनसे मिलता है। नोरा, फ्रैंको की पत्नी, याद करती हैं: “मैं सोनिया से ईर्ष्या करती थी, उसके सभी मित्र उसके बारे में बात करते थे, जब मैंने 1964 के अंत में हमारे रिश्ते की शुरुआत कि । मैं बहुत डरी हुई थी कि एक दिन सोनिया वापस लौट आयेगी और मैं फ्रैंको को खो दूंगी!” उसने कहा।

हम में से ज्यादातर लोग सोनिया को बाहरी व्यक्ति के रुप में देखते हैं। हमे ऐसा नहीं करना चाहिये। जब वह राजीव गांधी से जुड़ी, वह केवल एक लड़की थी, बिना किसी राजनैतिक महत्वाकांक्षा के। वह भारत के खिलाफ कोई षड़यंत्र नहीं करती है, वह केवल अपना योगदान देती है। भारत को उनका स्वागत करना चाहिये, न कि घृणा। वह भारत की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी, कांग्रेस पार्टी का, नेतृत्व कर रही है। उन्हें इसके लिये कुछ तो श्रेय देना चाहिये।

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