सोनिया गांधी: इटली की मधुशाला वेट्रेस से ‘भारत की बहू’ तक!

Posted on by Anand Mukherjee
 
  

सोनिया गांधी, एड्विगो एंटोनियो अल्बिना मायनो में जन्मी, 2004 में फोर्ब्स मैग्ज़ीन द्वारा विश्व की तीसरी शक्तिशाली महिला घोषित की गयीं। यह इस बात का प्रतिबिम्ब है कि वह ज़िंदगी में कितनी दूर तक आ चुकी हैं। यह इस बात का भी प्रतिबिम्ब है कि कैसे, अगर आप अपने आपको प्रसिद्ध परिवार के साथ जोड़ते हैं तो, आप वास्तविकता में दुनिया पर शासन कर सकते हैं। जैसा कि किस्मत ने चाहा होगा, उन्होंने राजीव गांधी को पाया- ऐसा गांधी परिवार की तुलना में शानदार और दिग्गज कहीं और न मिलता।

लेकिन यह केवल सिद्धांत है हम अभी इससे बचेंगे और सोनिया गांधी की उपलब्धियों पर ध्यान देंगे।

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1965 में कैम्ब्रिज में एक छोटे भाषा कॉलेज में सोनिया मायनो 18 वर्ष की एक छात्रा थीं। उन्हें अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था और वह अपने दोस्तों को पसंद करती थी, वह विश्वविद्यालय के रेस्त्रां से नौकरानी के रूप में जुड़ी। अपने काम पर रहने के दौरान वह, एक भारत के इंजीनियरिंग छात्र, खूबसूरत नौजवान से मिलीं, और तुरंत महसूस किया कि राजीव गांधी ही वह चाभी है जो उनकी सभी समस्याओं का हल हो सकती है। वह अमीर ज़िंदगी जी और अपने सारे सपने पूरी कर सकती थी।

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अपने एक निर्भीक साक्षात्कार में उन्होंने कहा: “मुझे एक अस्पष्ट विचार था कि भारत विश्व में अपने सांपों, हाथियों और जंगलों के साथ कहीं होगा, लेकिन वास्तविकता में कहां है और यह पूरी तौर पर वास्तविकता में क्या है, मैं सुनिश्चित नहीं थी। सोनिया गांधी ने इसी सूर्य के नीचे सभी ऐश्वर्य का आनंद लिया; उनके एक इशारे पर उनकी सेवा के लिये नौकरों और देखभाल करने वालों की कतार लग जाती थी।

उन्होंने1968 में राजीव गांधी से विवाह किया और इंदिरा गांधी की बहू बनकर वापस आयीं। उस समय के बाद, उनके लिये कोई रूकावट नहीं थी।

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यद्यपि उनका अतीत अब भी उनको प्रताड़ित करता है। वह कथित रूप से गलत दावा करती हैं कि वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की छात्रा थीं; कैम्ब्रिज ने यह सुनिश्चित किया है कि उनके विश्वविद्यालय में होने का कोई भी रिकार्ड नहीं है। यह अनुमान लगाया जाता है कि सोनिया गांधी ने हाईस्कूल से अधिक की पढ़ाई नहीं की है।

श्रीमती सोनिया गांधी 25 फरवरी 1973 को भारत का नागरिक बनने के लिये योग्य बन गयीं। लेकिन उन्होंने इटालियन नागरिक बने रहने का चुनाव किया।

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यह भी याद रखना चाहिये कि सोनिया गांधी ने सम्पूर्ण भारत की महिलाओं के लिये मानक को स्थापित किया। एक मधुशाला की नौकरानी भी वह सब कुछ कर सकती है जो वह ज़िंदगी में चाहती है। यहां तक कि अगर कोई ज़िंदगी में सबसे नीचे से भी शुरू करे तब भी ऊंचाइयों पर पहुंच सकता है। सोनिया गांधी ने हिंदी को स्वीकार किया, उन्होंने अपने व्यक्तित्व को बदला और एक अलग तरह के भारतीय स्वरूप में रूपांतरित किया। बहुत पहले गार्जियन अखबार ने उन्हें “पचास के दशक में श्रेष्ठ परिधान” में नामित किया था।