शशी थरूर; पॉलीग्राफ जाँच करवायें और अपना नाम साफ करें! हम सुनंदा पुषकर को चाहते है; लेकिन हम आप में भी विश्वास करना चाहते हैं!

Posted on by Anand Mukherjee
 
  

शशी थरूर को अपनी पत्नी, सुनंदा पुष्कर, की रहस्यात्मक मृत्यु के सम्बंध में पॉलीग्राफ के लिये ऐच्छिक रूप से जाना चाहिये। कांग्रेस के बहुत महत्वपूर्ण राजनीतिज्ञ को उनके लिये झूठ पकड़ने वाले मशीन पर, जांच सम्बंधी न्यायालय के आदेश का इंतज़ार नहीं करना चाहिये। विशेष जांच समूह (एसआईटी) ने पहले ही न्यायालय से दर्ख्वास्त की है और किसी भी वक्त बुलावा आ सकता है।

शशी थरूर को उनके अपने लिये बड़ा समर्थन मिलेगा अगर वह जांच कराने के लिये शुरूआत और प्रस्ताव करते हैं, यह सत्य की गहराई में जाने के लिये उनके सहयोग और इच्छा को व्यक्त करता। छ: लोगों ने इस चलती हुई जांच के संदर्भ में झूठ पकड़ने की जांच को करवाया, लेकिन शशी थरूर ने इस मुद्दे से लगातार पीछा छुड़ाया है। मजेदार बात यह है कि, शशी थरूर के एक नज़दीकी मित्र, संजय दिवान, उन छ: लोगों में से एक जिन्होंने जांच करवाया है। प्रकट रूप से, वह लीला में शाम को, लगभग 5 बजे के आस-पास आये थे, और सुनंदा पुष्कर का मृत शरीर मिलने तक वहाँ रूके थे।

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संजय दीवान पूछताछ के दौरान बहुत बार स्थिर नहीं थे। वास्तविकता में, दिल्ली आने के बारे में अपने स्पष्टीकरण को भी बताने में असफल थे, जब कि उन्हें, उस दुर्भाग्यशाली दिन, वास्तविकता में मुम्बई में होने की उम्मीद की जा रही थी। संजय का अपनी यात्रा में बदलाव का अस्पष्टीकरण उन कारणों में से एक है जो शशी थरूर शक के दायरे में नम्बर एक पर खड़ा करता हैं! क्या वह ऐसा कर सकते हैं या ऐसा किया गया?

सुनंदा पुष्कर 52 वर्ष की थी जब उनकी मृत्यु हुई । प्रथम दृष्ट्या साक्ष्यों के आधार पर एक गलत खेल की आशंका होती है। यहाँ तक कि डॉक्टर ने उनकी मौत के मामले में अनियमितता को पाया है, निष्कर्ष पर पहुचने पर यह पाया जाता है कि यह ड्रग्स की अतिरिक्त मात्रा के कारण होने वाली आत्महत्या नहीं हो सकती है।

शशी थरूर और सुनंदा पुष्कर के खुशहाल जोड़ा था। उनका सम्बन्ध जनता के समक्ष हमेशा आनंदायक दिखायी देता था। कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता था कि सुनंदा पुष्कर, बहुत अकेली महिला थीं, प्यार और आकर्षण के लिये मायूस थी। शशी थरूर ने, जो सुनंदा पुष्कर के तीसरे पति थे, बहुत उदासीनता से मीडिया को सम्बोधित किया, यह कहते हुये कि उनकी मौत की शाम को उन दोनों में गलतफहमी हो गयी थी। उतार-चढ़ाव भरे घटनाक्रम को स्वीकार करते हुये, शशी थरूर हो सकता है कि मनोवैज्ञानिक खेल कर रहे हों। स्वयं की जानकारी के अनुसार, वह जांच करने वाले अधिकारी के साथ साख को सुनिश्चित कर रहे हैं। वह ईमानदारी की छाप भी छोड़ सकते हैं। क्या अधिकारियों ने प्रलोभन लिया है, समय ही बतायेगा।

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गर्मागर्म बहस जिसके बारे में शशी थरूर ने बताया, वह उनकी पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के साथ गलत विवाहेत्तर सम्बंध से जुड़ा था। उनकी मौत से कुछ दिन पहले, सुनंदा पुष्कर और मेहर तरार ट्विटर पर एक गर्मागर्म बहस में शामिल थे। सुनंदा ने मेहर को उनके पति के साथ सम्बंध रखने के लिये अरोपी ठहराया था। आरोप एक दूसरे पर लगते रहे, इस बात की उम्मीद के साथ कि, उनकी शादी का अंत निकट ही है। लेकिन अगले ही दिन, थरूर फिर मुस्कुराते हुए आये, सबको यह बतलाते हुये कि उनके बीच सबकुछ ठीकठाक है।

थरूर के लिये इससे ज्यादा घातक क्या हो सकता है कि एम्स के विधि चिकित्साशास्त्र प्रमुख, डॉ0 सुधीर गुप्ता ने कहा कि उन पर शव-परीक्षा का दबाव दिया और प्रभावित किया जा रहा था?

इसके अलावा, और महत्वपूर्ण भी है, सुनंदा को आईपीएल से सम्बंधित सौदों की धुंधली जानकारी भी थी और उसकी इच्छा थी कि वह इसे जनता के सामने लायें। कुछ ऐसे भी संकेत हैं जिससे की इस भ्रष्टाचार में रॉबर्ट वाड्रा भी शामिल हो सकते है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने, बीजेपी के प्रखर वक्ता, पहले ही खुलासा किया था कि सुनंदा की मौत रूसी जहर से हुई थी और बाद में यह भी जोड़ा कि उनके पास सबूत भी है। यह मामला अभी न्यायालय में है और स्वामी ने कहा इस मामले को वह जनता के बीच सही समय आने पर ले जायेंगे। इस सिद्धांत को जोड़ते हुए, प्रमुख पत्रकार, नलिनी सिंह ने, आरोप लगाया कि सुनंदा पुष्कर बड़ी कठिन परिस्थितियों में थीं। वह बहुत चिंतित और मौत से कुछ घंटे पहले वह रोयी थीं। नलिनी सिंह वह अंतिम महिला थीं जिससे सुनंदा ने बात किया था।

बातचीत की जड़ क्या है? सुनंदा ने उन्हें बताया कि शशी ने उनके साथ हेरा फेरी किया था और तरार से मिले अपने सारे संदेशों को ब्लैकबेरी मोबाइल से खत्म कर दिया था। वह नलिनी से उन सारे संदेशों को पाने में मदद चाहती थीं।

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सभी साक्ष्य, चाहे वह परिस्थितिजन्य रहे हों या नहीं, शशी थरूर की ओर इशारा करते हैं। नज़दीकी परिवारी मित्र ने यहाँ तक कहा कि सुनंदा बहुत दुखी और अकेली महिला थीं। उनके मंत्री पति के पास उनके लिये बहुत कम समय था और उन्हें अकेला छोड़ दिया था। केवल कुछ सालों पहले, उन्होंने अपने मित्रों को गुप्तरूप से बताया कि उनका अंत निकट है। कौन विश्वास कर सकता है कि उनकी ये सारी बाते इस तरह से सच हो सकती थीं! वह और अधिक तनाव में रहने लगी थी जैसे जैसे शशी थरूर से उनकी दूरी बढ़ती गयी। इस बात का एहसास कि उनका तीसरा पति उनसे दूर हो रहा, घोर निराशा में जाने के लिये मजबूर कर दिया।

उन्हें सामजिक समारोहों में अकेले जाना होता था, और बाद में बताना पड़ता था कि वह राजनैतिक कार्यों में व्यस्त थे.. कांग्रेस पार्टी को उनकी बड़ी उड़ान का समर्थन नहीं करना चाहिये था और शशी को उनकी भावनायें समझने का समय देना था। वह सभी समारोहों को अपनी चमक और खूबसूरती के साथ जीवंत बना सकती थी।

शशी थरूर जीवन में उनसे प्यार नहीं कर सके। कम से कम मृत्यु के समय, उन्हें आदर देना चाहिये था और इस मामले में अधिकारियों से बचने के द्वारा अपराध की एक छाप छोड़ने के बजाय सहायता करना चाहिये।

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