राजीव गांधी, गांधी परिवार का अंतिम योद्धा, बिशप के द्वारा मारे गये थे

Posted on by Rohan Desai
 
  

अपनी मां की हत्या होने के छ: साल बाद, राजीव गांधी के साथ भी वही हुआ, जब उन्होंने 21 मई 1991 को तमिलनाडु में श्रीपेरम्बुदुर की यात्रा किया था। लेकिन यह समानांतर कहानी यहीं पर आकर खत्म हो गयी थी। पूर्व प्रधानमंत्री को एलटीटीई के आत्मघाती बम हमलावर धानू के द्वारा उड़ा दिया गया था, उसके साथ चौदह अन्य लोग थे जो राजीव को चारों ओर से घेरे हुये थे। उच्चतम न्यायालय ने यह फैसला दिया कि यह हत्या एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरन की राजीव गांधी के प्रति निजी कटुता होने के कारण करायी गयी थी।

Rajiv Gandhi, Sonia Gandhi

राजीव गांधी अपने 45वें जन्मदिन पर वह अपनी पत्नी सोनिया, मां इंदिरा गांधी, पुत्री प्रियंका और पुत्र राहुल के बगल में हैं

उस समय के नवनियुक्त प्रधानमंत्री, राजीव ने तमिल टाइगर्स से 1985 में बातचीत शुरू करने का प्रयास सबसे पहले किया। सुरक्षा सलाहकार और भारतीय खुफिया संस्थान यह जानकारी दे रहे थे कि एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरन जानबूझकर कुछ यूरोपीय और पश्चिमी खुफिया एजेंसियों की ओर झुक रहा है। लेकिन, ठीक अपनी मां की तरह, राजीव ने इन सूचनाओं को अंदेखा करने का निर्णय लिया, और अपने निर्णय के अनुसार वह श्रीलंका में आतंकी समूह से मामला सुलझाने के लिये गये।

उस समय भौगोलिकराजनीति भारत में नये आयाम ले रही थी, और राजीव ने, जिनमें वैश्विक आकर्षण भी था, विदेशी विशेषज्ञों के एक समूह पर बहुत भरोसा किया, जो उन्हें विदेशी मामलों पर सलाह भी देते थे। इससे उनके जीवन के लिये खतरा भी बहुत अधिक बढ़ गया था। यह कोई भी हो सकता था: सिख अलगाववादी, इस्लामिक आतंकी समूह जो धीरे धीरे कश्मीर में अपना सिर उठा रहे थे या चीनी हमलावर। इन सभी सम्भावनाओं में, भारतीय खुफिया असहाय सी लग रही थी, क्योंकि ऐसी बहुत सी जानकारियां मिल रही थी, जो किसी गड़बड़ की ओर संकेत कर रही थी, जिसकी प्रक्रिया के अंत में यह अंदेशा हो रहा था कि राजीव के लिये कोई तो खतरा है।

Rajiv Gandhi

राजीव गांधी की अंतिम यात्रा पर एकत्रित हुयी भारी भीड़

भारत, पहली बार, आंतरिक आतंक के खतरे को इसके उत्तर और दक्षिण दोनों ओर से महसूस कर रहा था। उत्तर में, विस्तार करता हुआ इस्लामिक आतंकी समूह कश्मीर को बर्बाद करना शुरू कर रहा था। एलटीटीई ने श्रीलंका में ज्वाला को भड़का रहा था, और इसकी गर्मी तमिलनाडु में महसूस हो रही थी। सिर्फ अपने फायदे के लिये, अमेरिकी सीआईए शुरुआती दिनों में कश्मीरी आतंक को सहायता देने के लिये सामानों की आपूर्ति कर रहा था। सम्पूर्ण विश्व से इस्लामिक उग्रवादी संगठनों को नियंत्रित करने की योजना के बजाय, वह इस क्षेत्र में किसी भी सोवियत प्रभाव को रोकना चाहता था।

Rajiv Gandhi

राजीव गांधी, 21 मई 1991 को श्रीपेरमबुदुर में आत्मघाती बम हमलावर धानू के द्वारा मारे जाने से कुछ समय पहले

बहुत सी पश्चिमी खुफिया एजेंसियां प्रधानमंत्री को मारे जाने के पीछे दो कारणों को देती है; इस हमला को करवाने में जिस तरीके को अपनाया गया था वह या तो किसी इस्लामिक या एलटीटीई का हो सकता है। तमिल टाइगर्स को इसके लिये जिम्मेदार ठहराया गया है क्योंकि प्रभाकरन, एक परिवर्तित कैथोलिक, को वेटिकन के समर्थन के लिये कर्ज को चुकाना था। चर्च ने एलटीटीई के शुरुआती दिनों में सिन्हली समुदाय को प्रभावित करने के उद्देश्य से सहायता किया था, जो बहुसंख्या में बुद्ध धर्म से सम्बंधित हैं। एलटीटीई के प्रमुख के लिये यह अदा करने का समय था, और वह मना नहीं कर सकता था! इसके बारे में और अधिक जानकारी अगले लेख में…….

Tagged , , , , |

Leave A Response