अगर आज तक भारतीय युद्ध अपराधियों की सूची नहीं बनायी गयी, फिर नेता जी कैसे उनमें से एक हो सकते हैं?

Posted on by Rubi
 
  

नेताजी का विवाद अंत होने का नाम नहीं ले रहा है जबकि गोपनीय दस्तावेज अब किसी भी तरह से विशिष्ट नहीं रह गये है। हाल ही में 100 गोपनीय दस्तावेजों को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 119 वें जन्म दिवस पर प्रकाशित किया गया जिसनें नयें विवादों का पिटारा खोल दिया। इस अवसर को, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां बोस के दर्जनों परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में दिल्ली के राष्ट्रीय अभिलेखागार भारत को उपलब्ध करायीं, सोशल मीडिया पर इन सूचनाओं को लेने वालों की उम्मीदों को पूरा करने के लिये भी भेजा गया।

हाल ही में 100 गोपनीय दस्तावेजों को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 119 वें जन्म दिवस पर प्रकाशित किया गया जिसनें नयें विवादों का पिटारा खोल दिया।

यह वाद विवाद स्पष्ट तथ्यों पर ध्यान देने पर होना स्वाभाविक था, जो दशकों से जमी धूल को हटाने के बाद उठ खड़ा हुआ है। रहस्यमय तरीके से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के अदृश्य होने के पीछे भी ऐसे कुछ षड़यंत्र के सिद्धांत हैं, और हम सब जानना चाहते है कि वास्तविकता में हुआ क्या था।

पिछले अक्टूबर में, प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया था, “इतिहास को दबाने की जरूरत नहीं है। राष्ट्र जो अपने इतिहास को भूल जाता है वह राष्ट्र बनाने की ताकत नहीं रखता है”। यह ट्वीट पहले से ही किनारे हो चुकी कांग्रेस पार्टी के लिये एक पूर्व संकेत था। इन सभी दस्तावेजों के बीच, एक ऐसा, जो भारत की सोच को बतलाता है, पत्र है, जो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा स्पष्ट रूप से लिखा गया था। उन्होंने बोस को एक “युद्ध अपराधी” कहा था।

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भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा लिखे गये पत्र में, उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को एक “युद्ध अपराधी” कहा

ट्विटर पर यह युद्ध दो हैस्टैग पक्षों- #NehrukilledBose और #Bhaktsfakeletter के बीच चल रहा है। एक पक्ष इस बात से सहमत है कि इस प्रखर नेता के मारे जाने के पीछे महात्मा गांधी और नेहरू द्वारा किये गये षड़यंत्र की भूमिका है, क्योंकि बोस गांधी जी के अहिंसा के विचार के लिये खतरा बन रहे थे। जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि यह बीजेपी द्वारा रचा गया षड़यंत्र है जो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और कांग्रेस की छवि को खराब करना चाहते हैं। यह एक मानक है लेकिन घिसा पिटा कथन भी है।

तथ्यों के मद्देनजर यह कोई नई बात नहीं है, कि बोस का अपना परिवार उनके गायब होने के विचार के ऊपर बटा हुआ है। चंद्र कुमार बोस, नेताजी के नाती ने, खबरों के अनुसार कहा, “मैं उनके हवाई दुर्घटना में मारे जाने के सिद्धांत में विश्वास नहीं करता हूं। हम सारे प्रश्नों का उत्तर आज नहीं पा सकते हैं, लेकिन मैं आशा करता हूं कि कुछ संकेत अवश्य मिल जायेंगे” । सुभाष चंद्र बोस की पुत्री, अनीता बोस, दूसरी तरफ कहती है कि उनके पिता की मृत्यु एक हवाई दुर्घटना में हुई।

एक कांग्रेस पक्ष के समर्थक ने ट्विटर पर संकेत दिया कि नेहरू का पत्र मात्र दिखावटी था, क्योंकि इसमें व्याकरणों और वर्तनियों की अशुद्धियों हैं साथ ही रहस्यमयी भी है। उसने अपने कथनों के समर्थन में पत्र की साफ की गयी छवि को डाला है। अगर इसे स्वीकार किया जाय, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता है कि जवाहर लाल नेहरू जिन्हें अंग्रेजी भाषा पर महारत हासिल थी, ब्रिटिश सरकार को ऐसे गलतियों से भरे पत्र को बिना देखे भेजने के बारे में सोचा कैसे होगा। और सबसे महत्वपूर्ण चर्चा का बिंदु यह है कि इस पत्र पर हस्ताक्षर भी नहीं हैं।

एक ट्विटर उपयोगकर्ता ने यह संकेत दिया है कि नेहरू का पत्र केवल दिखावटी मात्र है, क्योंकि इसमे व्याकरण और वर्तनी की अशुद्धियों भरी पड़ी हैं।

प्रख्यात इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने ट्विटर पर इस पत्र की प्रमाणिकता को नकारा है: “जो लोग पूछ रहे हैं, कि बोस के बारे में एटली को नेहरू द्वारा जानबूझकर लिखा गया पत्र, पूरी तरह से अप्रामाणिक है” ।

एक अन्य दस्तावेज जिसे उस दिन देखने के लिये रखा गया था। वह विशिष्ट दस्तावेज कहता है कि नेताजी के नाम को यूके द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति पर “युद्ध अपराधी” के रूप में प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है। फाइल के अनुसार, यूके में भारतीय उच्च आयुक्त ने कहा कि युद्ध अपराधियों की सूची केवल जापानी और जर्मन नागरिकों के लिये बनायी गयी थी। इस तथ्य के आधार पर आगे बढ़े तो नेहरू बोस को “युद्ध अपराधी” के रूप में अंकित करते हुये इंगलैंड को पत्र नहीं लिख सकते हैं। इस विशेष फाइल में, यद्यपि, नेहरू षड़यंत्र के बारे में बहुत कुछ नहीं बताया गया, जो मामले को समाप्त करे।

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दिखायी जाने वाली एक अन्य फाइल कहती है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत पर यूके द्वारा ‘युद्ध अपराधी’ के रूप में नहीं दर्शाया जा सकता था।

नेताजी की मृत्यु के चारों ओर के रहस्य का पर्दा केवल फीका पड़ रहा है। अब तक हुये खुलासे, मामले को शांत करने के बजाय, चिंताजनक मोड़ ले रहे हैं।

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