क्या नेहरू का खून संजय दत्त की नसों में बह रहा होगा?

Posted on by Samiksha Pathak
 
  

क्या संजय दत्त और उनकी उत्पत्ति के बारे में उनके जन्म दिन के बजाय किसी अन्य दिन बात कर सकते हैं? 29 जुलाई, ‘खलनायक’ 56 साल का हो गया, लेकिन बॉलीवुड के वास्तविक बॉडीबिल्डर ने अपने आपको अपेक्षाकृत अच्छे आकार में रखा है, और महाराष्ट्र के पुणे स्थित यरवदा कारागार से बाहर आने पर चलचित्रों के प्रस्ताव पर ध्यान देते हैं।

sanjay 3

मई 2013 से, संजय दत्त को 1993 मुम्बई विस्फोट से पहले एके 56 राइफल अवैध रूप से रखने और विनाश करने के लिये पांच साल की सजा चुकी है। हालांकि, वह बार बार छुट्टी और पैरोल अवधि में आनंद भी उठा रहे हैं। मई 2013से मई 2014 तक, उन्होंने 118 दिन से ज्यादा बाहर बिताये हैं, या तो पैरोल या विशेष छुट्टी पर। वह हर मिलने वाले मौके पर पैरोल या छुट्टी के लिये आवेदन करने के अभियुक्त हैं और प्राय: उन्हें ये छुट्टियां मिल भी जाती हैं।

sanjay 2

बहुत बार यह बिंदु उठाया जा चुका है कि कांग्रेस, जब कभी भी हो सकता है, संजू बाबा की ज़िंदगी को आसान बना चाहती है। जब शक्ति में थी, उसके पास समय था और कलाकार को बाहर समय बिताने में सहायता करती थी।

एक बहन और कांग्रेस एमपी, प्रिया दत्त के लिये यह प्राकृतिक सवेदना है कि वह अपने भाई के कारणों के लिये लड़ें, यह एक राष्ट्रीय पार्टी के लिये सामान्य नहीं है कि वह इस रैली में शामिल हो। कांग्रेस और संजय दत्त में, प्रकृतया, बहुत गहरा जुड़ाव रखते हैं।

संजय दत्त की मां, नरगिस दत्त की खुशबू और खूबसूरती ने लाखों लोगों के लिये दिल को लूट लिये, लेकिन कोई सोच सकता है कि वह मोतीलाल नेहरू की नातिन थी? इतिहासकारों द्वारा इस दिशा में बहुत सारी टिप्पणियां की जा चुकी है।

sanjay12

दिलचस्पी से, मोतीलाल नेहरू रोशन जान के कोठे पर जाया करते थे जहाँ वह एक तवायफ दलीप जान द्वारा आकर्षित हुए। उनके इस सम्बंध से एक नाजायज पुत्री, जद्दनबाई का जन्म हुआ। नरगिस, जद्दनबाई, मुजरा लड़की और उत्तमचंद मोहन, जो शादी करने के लिये मुसलमान बने, की उत्पत्ति थीं। वास्तविक दिलचस्प वंशावली।

sanjay7

मोतीलाल नेहरू का कहना था कि स्वतंत्रता के प्रथम युद्ध (1857) में उनका परिवारिक इतिहास नष्ट हो गया, लेकिन वास्तविकता कुछ अलग ही दिखायी पड़ती है। मुस्लिम समुदाय से सम्बंधित, मोती लाल नेहरू के पिता ब्रिटिश प्रकोप से बचने के लिये अपना नाम बदल लिया था। मेघनाद देसाई, जिन्होंने पत्नी कीश्वर के साथ सितारों की आत्मकथा के लिये शोध किया, ने यह उद्धृत किया कि जद्दनबाई ने एक बार जवाहरलाल नेहरू को राखी बांधी थी।

‘संजय दत्त को बचाओ’ आंदोलन के पीछे लगे लोग बिना थके काम करते रहे जिससे उन्हें स्वतंत्रता मिल जाय। मैं, भी, विश्वास करता हूं कि अब उन्हें छोड़ा जाय। उन्होंने अपना समय पूरा कर लिया है लेकिन वह स्वीकार करने में असफल रहे कि उनका नियमित बाहर निकलना उन्हें अतिविशिष्ट के रूप में वर्गीकृत कर रहा है। भारत में अतिविशिष्ट को बहुत प्रेम नहीं मिलता है। इस स्थिति में कोई अन्य व्यक्ति संजय दत्त की तरह सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पायेगा और न ही निरंतर पायेगा।

sanjay4

दत्त के लिये समय एक समान नहीं था

संजय दत्त केवल सलाखों के पीछे ही नहीं हैं, वह खराब स्वास्थ्य से भी पीड़ित है। बहुत पहले नहीं, उन्होंने पैरोल की मांग की थी जिससे कि वह परिधीय धमनी रोग के उपचार के लिये जा सकें। संजय की यह स्थिति बहुत अधिक धूम्रपान करने के कारण हुई………उनके पैरों को रक्त वाहिकाओं द्वारा कम ऑक्सीजन की पूर्ति होती है।

sanjayjail

संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त की उनकी अपनी समस्यायें है। वह दो बार एमपी रहीं लेकिन 2014 के पिछले चुनाव में, वह पहली बार खड़ी, पूनम महाजन राव, दिवंगत बीजेपी नेता प्रमोद महाजन की पुत्री से चुनाव हार गयीं। इस हार के पीछे का प्रमुख कारण संजय दत्त का पैरोल विवाद अनुमानित किया जाता है जो चुनावों से पहले शुरू हुआ था।

मुन्नाभाई एमबीबीएस की छवि से प्रशंसकों में विश्वास है कि उन्हें सजा को पूरा करना चाहिए, उन्हें तूफान को शांत करना चाहिये, अपनी पत्नी की बीमारी के निमित्त नियमित पैरोल के लिये आवेदन नहीं करना चाहिये।

कारागार में जीवन

हथियार रखने की एक अबोध गलती, मैं विश्वास करता हूं, ने उनका जीवन बदल दिया। वह यरवदा जेल पुणे में उबाऊ काम कर रहे हैं। उन्हें एक बार 25 रूपये की दैनिक मजदूरी पर कागज का थैला बनाने का प्रस्ताव दिया गया था। उन्होंने उपयोगी बनाने के द्वारा अपनी शिक्षा का लाभ उठाया। उन्होंने कारागार अधिकारियों के लिये महत्वपूर्ण बाबूगीरी का काम किया।

sanjay11

संजय दत्त का भाग्य भी निश्चित रूप से निर्दयी है। नशा। जेल। पिता की मौत। कई सारी चीज़ें उनके जीवन से जुड़ी। बॉलीवुड में कम मांग, कुछ उभरी भूमिका को बचाया। वह धीरे धीरे गायब होते दिखायी देते हैं। यह रोमांचक कहानी का दु:खद अंत है। कोई यही उम्मीद कर सकता है कि वह बाहर आने पर दुबारा शुरू कर सकते हैं।