क्या मैमुना बेगम, उर्फ इंदिरा गांधी ने संजय गांधी की मृत्यु में भूमिका निभायी थी? शोध और जांच इस सम्भावना को भी इंगित करते हैं।

Posted on by Anand Mukherjee
 
  

इंदिरा गांधी को भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली हस्ती के रूप में जाना जाता है। प्रथम महिला प्रधानमंत्री के रूप में, उन्होंने मजबूती से सभी मुद्दों के साथ व्यवहार किया और एक ही समय में वह खतरनाक और आदरणीय बन गयीं। आज, उनके राजनैतिक सम्बंधों के संदर्भ में भारत ने कई अनुभूतियों को स्थापित किया है, लेकिन पूरी पहचान के लिये मुश्किल से ही उनके व्यक्तिगत कार्य और दस्तावेज़ों की जानकारी मिल पाती है जो विवादास्पद और झझोरने वाली है।

सभी गौरवांवित अनुभवों के पीछे, इंदिरा गांधी का एक पक्ष था जो अशोभनीय और अभद्र था। अपने बढ़्ने के उम्र में वह ज्यादातर अकेली और किसी के भी निरीक्षण में नहीं थीं चूंकि पंडित जवाहर लाल नेहरू राजनैतिक कार्यों से ज्यादातर यात्रा पर थे और मां लगातार बिमारियों से पीड़ित थीं।

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एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में संजय गांधी की मौत रहस्य में घिरी हुई है, लेकिन इतिहासकारों द्वारा मुमकिन प्रकाशित सिद्धांत बताते है कि एक गलत खेल खेला गया।

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि संजय गांधी लोकप्रियता के चार्ट पर बहुत तेजी से चढ़ रहे थे। इंदिरा गांधी के लिये कहा जाता है कि वह असुरक्षित महसूस कर रही थीं और अपने ही खुन के द्वारा संकट महसूस कर रही थीं। संजय गांधी अक्सर मोहम्मद यूनुस के द्वारा इंदिरा गांधी को ब्लैकमेल करता था, जो संजय गांधी के पिता थे। संजय गांधी मुस्लिमों को तिरस्कृत करते थे और यह इंदिरा गांधी के डर का कारण भी था, उन्होंने बहुत जल्द संजय के एजेंडा का अंदाजा लगा लिया जो मुस्लिम वोट बैंक को प्रभावित कर सकता था। दुर्घटना न समझा सकने योग्य थी। यह एक नई मशीन थी और यह बिना फटे गिरने के लिये थी। ऐसा तब होता जब उसमें पर्याप्त तेल न होता। उड़ान रजिस्टर बताता है कि उड़ने के पहले तेल का टैंक पूरा भरा था। इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रभाव का उपयोग करके किसी भी पूछताछ के लिये पत्थर की दीवार खड़ी कर दी।

जब संजय गांधी की मौत का समाचार इंदिरा गांधी के पास पहुंचा तो उनका पहला प्रश्न था “उसकी चाभी और उसकी कलाई की घड़ी कहां है?” उन्होंने यह प्रश्न क्यों पूछा? अपने छोटे बेटे की मौत का समाचार सुनने पर कोई दुख नहीं था, केवल एक अलग तरह का संदर्भ था। इस बारे में नेहरू गांधी वंश के बारे गहरा रहस्य था।

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अच्छे परिधान और परिष्कृत पुरूष इंदिरा गांधी की कमजोरी थे

यह कोई अपराध नहीं है लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय को धारण करते हुये गैरकानूनी व्यवहार में संलिप्त होना क्या नैतिक रूप से सही है? ठीक अपने पिता की तरह, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी कई सम्बंधों में शामिल थीं। उनका पहला स्मरणीय सम्बंध शांतिनिकेतन में उनके जर्मन शिक्षक के साथ था। उनका अगला सम्बंध पिता के सचिव एम ओ मथाई के साथ था। बाद में, वह कथित रूप से अपने योग शिक्षक धीरेंद्र ब्रह्मचारी से सम्बंधित रहीं। तेज, बुद्धिमान और परिष्कृत पुरूष इंदिरा की कमजोरी थी। उन्हों ने अपने कार्यालय के प्रभुत्व का अपमान किया और कमजोर विचारों से अपना पथभ्रष्ट किया। दिनेश सिंह, इंदिरा गांधी के जीवन में एक अन्य व्यक्ति थे जो विदेश मंत्री थे।

वस्तुत:, यह सर्वविदित है कि संजय गांधी, फिरोज़ गांधी के पुत्र नहीं थे। वह एक अन्य मुस्लिम सज्जन मोहम्मद यूनुस के पुत्र थे।

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‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ का पथप्रदर्शक

ऑपरेशन ब्लूस्टार एक सैन्य ऑपरेशन था जिसे सिख आतंकवादियों को हटाने के लिये इंदिरा गांधी ने आदेशित किया था, जो अमृतसर में गोल्डेन टेम्पल को बचाने के लिये गोल्डेन टेम्पल में हथियार इकट्ठा कर रहे थे, जिससे उस पर उनका अधिकार रहे। जर्नैल सिन्ह भिंडरेवाला और उनके अनुयायी ने लोगों को नियम पालन करने और अमृतसर को बचाने के लिये मनाया। पूरे ऑपरेशन का उद्देश्य सिखवाद के नियंत्रण का उन्मूलन करके अमृतसर पर नियंत्रण प्राप्त करना था। इस ऑपरेशन ने गोल्डेन टेम्पल और अन्य गुरूद्वारों में 12000 से अधिक लोगों को मारा। हजारों निरपराध तीर्थयात्री और मंदिर के कार्यकर्ताओं ने इस पवित्र भूमि पर अपनी ज़िंदगी गवां दी। इंदिरा गांधी ने इस क्षति पर कोई संवेदना व्यक्त नहीं की, जो बाद में उनकी मौत का कारण बनीं।

उनके दो अंगरक्षकों, सतवंत सिंह और बेअंत सिंह, ने इंदिरा गांधी को मार दिया क्योंकि उन्होंने गोल्डेन टेम्पल और सिख समुदाय पर आक्रमण करने का निर्णय लिया था। कोई भी इस निर्णय को न्यायपूर्ण नहीं कह सकता, यह एक आतंकवादी कार्य था और उचित तरीके से कार्यवाही की गयी, लेकिन किसी को इसके मूल कारण को नहीं भूलना चाहिये।

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