10-रूपये के नोट से महात्मा गांधी सेवानिवृत हो रहे हैं! उन्हें दूसरी अन्य जगहों से भी हटाया जाना चाहिये, बदलाव को रास्ता देने के लिये!

Posted on by Samiksha Pathak
 
  

जल्द ही हमारे ‘मुद्रा नोटों’ पर ताज़गी दिखायी देगी। कुछ 10 रूपये के नोट प्रचलन में हैं और उसमें महात्मा गांधी का चित्र नहीं है। इसके बजाय, अशोक स्तम्भ का चित्र नोटों पर शोभा बढ़ाता है। यह बदलाव बहुत पहले ही हो जाना चाहिये था। हमें अपने आपको ज्यादा दिनों तक पैसे के लेन देन करते समय महात्मा गांधी को याद करने की जरूरत नहीं होगी। स्वतंत्रता में उनका सहयोग अब फीका पड़ चुका है। महात्मा गांधी, पर्याप्त हो चुका है। उन्हें शांति के साथ आराम करने दिया जाय। गांधी जयंती पर, हम सबको उन्हें शौक से याद करना चाहिये।

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सुप्रीम कोर्ट ने यह नियम जारी किया है कि महात्मा गांधी का चित्र भविष्य के सभी उत्पादों से हटे। यहाँ तक कि, रबिंद्रनाथ टैगोर थे जिन्होंने गांधी को ‘महात्मा’ का शीर्षक दिया। मजेदार बात यह है कि, गांधी ने उस समय यह शीर्षक को लेने से इंकार कर दिया था, कहा बड़ी योजनाओं में यह सब अप्रासंगिक है। विशेषज्ञों का कहना हैं कि मुद्रा नोटों पर महात्मा लिखना किसी भी प्रकार से असंवैधानिक है।

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महात्मा गांधी, नई पीढ़ी के लिये, बीते हुये कल की एक वस्तु हैं। वह भगवान नहीं केवल एक मानव थे। इसलिये यह समझने योग्य है कि उन्हें अनावश्यक आदर लम्बे समय तक नहीं मिलेगा। उनके मायावी तरीके की कहानियां बह के फट चुकी हैं, बेचैन कर रहीं है और हम नहीं चाहते कि हम परेशान हों। इसे हमारे जीवन को क्यों प्रभावित करना चाहिये।

यह अच्छा है कि वह 10 रूपये के नोट से जा रहे हैं। यह एक शुरूआत है। इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार करें।

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जैसे भगत सिंह, राजगुरू और लाल बहादुर शास्त्री ने राष्ट्र के लिये शायद महात्मा गांधी से ज्यादा, योगदान दिया है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया और भारत सरकार को इस सकारात्मक बदलाव में आगे की ओर चलना चाहिये और सभी भारतीयों को इसे स्वीकार करना चाहिये। महात्मा गांधी ने हमारे नोटों को भारत के जन्म से सुशोभित किया है, यह एक लम्बा सफर रहा है। लेकिन हर अच्छी वस्तु का अंत आता है।

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