तमिलनाडु की खदान से महारानी एलिज़ाबेथ के मुकुट तक, हमारे कोहिनूर ने लम्बा सफर तय किया है, और अब हम इसे वापस चाहते हैं!

Posted on by Srishti Jain
 
  

किसी समय विश्व का सबसे बड़ा हीरा माना जाने वाले, कोहिनूर का मूल्य आज 100 मिलियन पाउंड है, और यह ब्रिटिश ताज की शोभा बढ़ा रहा है। यह 105 कैरेट का पत्थर भारत से सम्बंधित है, लेकिन हम बड़े दिलवाले राष्ट्र से हैं, इसलिये हमने इसे दे दिया….जबतक कि बॉलीवुड से कुछ देशभक्त तत्व और बहुत से व्यावसायिक घरानों ने ‘चलो कोहिनूर को वापस लाते है’ के लिये आंदोलन को शुरू नहीं किया।

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बॉलीवुड के सितारे और व्यवसायियों ने लंदन उच्च न्यायालय में अधिवक्ताओं को कोहिनूर हीरा वापस करने के लिये विधिक प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। बॉलीवुड सितारा भूमिका सिंह, इस समूह का हिस्सा है, ने कहा:  “कोहिनूर 105 कैरेट का केवल पत्थर नहीं है, बल्कि हमारे इतिहास और संस्कृति का हिस्सा है और निश्चित रूप से वापस होना चाहिये”।

डेविड डि सूजा, इंडियन लिज़ायर ग्रुप टिटोज़ के सहसंस्थापक, नई विधिक प्रक्रिया को कोष उपलब्ध कराकर सहायता कर रहे हैं और ब्रिटिश अधिवक्ताओं को उच्च न्यायालय में प्रक्रिया को शुरू करने का निर्देश भी दे चुके हैं। उन्होंने कहा, “कोहिनूर संदिग्ध परिस्थितियों के अंतर्गत भारत से लिये जाने वाली कई शिल्पकृतियों में से एक है। कालोनीकरण ने न केवल हम लोगों के धन को नष्ट किया, इसने हमारे देश की अपनी पहचान को नष्ट कर दिया”।

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इस हीरे को शासिका साम्राज्ञी को सिखों के अंतिम शासक दुलीप सिंह, 13 साल के मूर्ख बालक, द्वारा दे दिया गया था, जिसने 1850 में ब्रिटेन की यात्रा किया था जब उन्होंने महारानी विक्टोरिया को रत्न दिया था,  जिसके बाद ब्रिटिशों ने पंजाब को हड़प लिया था। यह रत्न महारानी मदर द्वारा 1937 में उनके पति राजा जार्ज षष्ठम के राज्याभिषेक के समय मुकुट में पहना गया था, और एक बार फिर से 1953 में महारानी एलिज़ाबेथ के राज्याभिषेक में पहना गया।

यह भारत की सम्पत्ति है और कोहिनूर को वापस करने के लिये किये गये सभी निवेदनों को ब्रिटेन द्वारा नकार दिया गया।

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दोनों देशों के बीच इस बहुमूल्य रत्न को लेकर एक रस्साकशी चल रही है….यह दिल्ली में मुगल शासकों के अधिकार में 213 सालों तक, अफगानों ने कंधार और काबुल में 66 सालों तक और ब्रिटिशों ने इसे 127 सालों तक रखे रहा है। मेरे लिये, भारत इस हीरे का सबसे बड़ा अधिकारी है। यह भारतीय खदानों से निकाला गया था।

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