भगत सिंह, धोखेबाज़ जिसे मरना ही था।

Posted on by Anand Mukherjee
 
  

भगत सिंह भारत के उच्चकोटि के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में से एक हैं। भारत के नौजवान भगत सिंह के द्वारा कहने पर हथियार उठाने के लिये प्रोत्साहित हुये और हिन्दुस्तान सोशियलिस्ट रिपब्लिकन एसोशिएशन की सेना शाखा की चुनौती द्वारा उत्साहित हुये जिससे वह, सुखदेव और राजगुरू सम्बंधित थे। उनका इंकलाब ज़िंदाबाद कहना स्वतंत्रता के लिये संघर्ष का युद्ध में चिल्लाना बना। नि:संदेह, वह हमारे देश की स्वतंत्रता क्रोधोन्मत्ता के साथ चाहते थे, लेकिन जिस चीज़ की उनके पास कमी थी वह था उनका विचार । जिस तरीके से वह स्वतंत्रता चाहते थे वह न्यायोचित नहीं थी।

Afghanistan, bhagat singh, bhagat singh death, bhagat singh's death, central legislative assembly, freedom fighters, India, inquilab zindabad, mahatma gandhi, martyr's day, naxalism, non violence, rajguru, sardar bhagat singh, shaheed bhagat singh, sukhdev, violence

प्यार किसी व्यक्ति के चरित्र को हमेशा ऊपर उठाता है। यह उसे कभी कम नहीं करती है, प्यार करना प्यार होना है। हाँ यह उनके बारे में कहा गया है लेकिन क्या उन्होंने वास्तविकता में प्यार दिया था? सरदार भगत सिंह 24 साल के युवा होने पर भी उत्साह से भरे हुये थे, लेकिन सभी प्रकार से व्यवहारिक नहीं थे। वह स्वतंत्रता को हिंसा के माध्यम से प्राप्त करना चाहते थे, जो कि सम्भव नहीं था क्योंकि पश्चिमी सैन्य शक्ति सम्पन्न था और कोई भी उनके साथ प्रतियोगिता नहीं कर सकता था अगर वह सैन्य ताकत पर आता है। यह कहा जाता है कि, एक बच्चे के रूप में, भगत सिंह प्राय: खेत में बंदूक की फसल उगाना चाहते थे, जिससे की वह ब्रिटिशों से लड़ सकें। महात्मा गांधी, बहुत अधिक अनुभवी और व्यवहारिक होने के नाते उग्रवादी राष्ट्रवाद आंदोलन के विरूद्ध थे जिसे भगत सिंह ने शुरू किया था। भारत अपनी संस्कृति और विचारों के लिये जाना जाता है, तब कोई व्यक्ति यह सब कुछ कैसे भूल जाता है और एक ऐसे रास्ते को चुनता है जो हमारे स्वतंत्रता लाभ को पाने के लिये नहीं है। भगत सिंह को मृत्युदंड देना सही था; अगर उन्हें मृत्यु दंड नहीं दिया गया होता तो हम कभी भी हिंसा से स्वतंत्रता नहीं पाते और ब्रिटिश आज तक हमारे ऊपर शासन कर सकते थे। या स्थिति और भी खराब होती जैसा कि अफगानिस्तान और रूस के बीच युद्ध के दौरान हुआ था। जहाँ कई छोटे उग्रवादी समूह (स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों) रूसियों और अन्य पश्चिमी सैन्य शक्तियों के विरूद्ध लड़े थे और उनको हटाने के लिये पीछा किया। लेकिन इसके बाद क्या हुआ। हर छोटा उग्रवादी समूह अफगानिस्तान के ऊपर नियंत्रण पाने के लिये आपस में ही लड़ने लगा था, जिससे उस समय की स्थिति और भी बद्तर हो गयी थी। उस समय पर, जब बात सैन्य शक्ति की आती थी तब ब्रिटिश लोग हमारी तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली थे। क्या वह स्थिति हमारे साथ भी हो सकती थी? भूलिये नहीं, जब दो समूह एक दूसरे के साथ भिड़ने में व्यस्त रहते हैं, तब बीच में रहने वाला ऊपर उठता है।

Afghanistan, bhagat singh, bhagat singh death, bhagat singh's death, central legislative assembly, freedom fighters, India, inquilab zindabad, mahatma gandhi, martyr's day, naxalism, non violence, rajguru, sardar bhagat singh, shaheed bhagat singh, sukhdev, violence

भगत सिंह भारत के लिये लड़े और हिंसा के पक्षधर थे, और ब्रिटिशों के द्वारा आतंकवादी माने गये। आजकल, नक्सलवाद भारत के लिये खतरा है, लेकिन ये लोग भी तो सरकार के विरूद्ध न्याय के लिये लड़ रहे हैं और बहुतों द्वारा शहीद के रूप में स्वीकार होते हैं। लेकिन वह जो कुछ भी कर रहे हैं वह अपने भले के लिये कर रहे हैं। यह लोगों की संवेदना पर निर्भर करता है। इस सिद्धांत के अनुसार, भगत सिंह पहले नक्सली थे।

Afghanistan, bhagat singh, bhagat singh death, bhagat singh's death, central legislative assembly, freedom fighters, India, inquilab zindabad, mahatma gandhi, martyr's day, naxalism, non violence, rajguru, sardar bhagat singh, shaheed bhagat singh, sukhdev, violence

यह कहा जाता है कि भगत सिंह की मौत के पीछे महात्मा गांधी कारण थे। लेकिन वास्तविकता में, भगत सिंह जानते थे कि वह मृत्यु दंड से नहीं बच सकते थे, इसलिये उन्होंने इस मौके को भुना लिया और चाहा कि महात्मा गांधी उनकी मौत का कारण बनें जिससे कि वह लोगों के दिलों में रह सके और सहानभूति पा सकें। गांधी ने भगत सिंह को बचाने का शतप्रतिशत प्रयास किया। उन्होंने इस बारे में वायसराय से बात किया, लेकिन वायसराय ने कहा, ‘अगर आप चाहे, मैं 1000 अपराधियों को छोड़ सकता हूं लेकिन मैं भगत सिंह को नहीं छोड़ सकता हूं’।

Afghanistan, bhagat singh, bhagat singh death, bhagat singh's death, central legislative assembly, freedom fighters, India, inquilab zindabad, mahatma gandhi, martyr's day, naxalism, non violence, rajguru, sardar bhagat singh, shaheed bhagat singh, sukhdev, violence

भगत सिंह, सिख होने के बावजूद, उन्होंने दाढ़ी साफ करायी और अपने बाल भी कटाये। इस तरह के कार्य द्वारा, उन्होंने अन्य सिखों को इसी तरह करने के लिये उत्तेजित किया जिससे लोग उनके अंधभक्त हो जायें। वह शुद्ध रूप से अपने धर्म के विरूद्ध थे और एक नास्तिक थे। एक व्यक्ति जो अपने धर्म के प्रति विश्वासी नहीं हो सकता, अपने देश के लिये विश्वासी कभी नहीं हो सकता है।

Afghanistan, bhagat singh, bhagat singh death, bhagat singh's death, central legislative assembly, freedom fighters, India, inquilab zindabad, mahatma gandhi, martyr's day, naxalism, non violence, rajguru, sardar bhagat singh, shaheed bhagat singh, sukhdev, violence

8 अप्रैल, 1929 को, भगत सिंह और बी.के.दत्त ने सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली में ‘बहरों को सुनाने के लिये’ बम को फेंका था, जैसा कि उनके पर्चे उनके कार्य के कारण को बता रहे थे। यद्यपि यह कहा गया कि उस विस्फोट से किसी को कोई चोट नहीं लगी, भगत सिंह ने उस बम को खुद बनाया था। लेकिन हम कैसे जानते, उनका उद्देश्य क्या था। हो सकता है कि वो लोगों के दिमाग में विध्वंस को बनाकर अपना नियंत्रण चाहते रहे हों।

Afghanistan, bhagat singh, bhagat singh death, bhagat singh's death, central legislative assembly, freedom fighters, India, inquilab zindabad, mahatma gandhi, martyr's day, naxalism, non violence, rajguru, sardar bhagat singh, shaheed bhagat singh, sukhdev, violence

भगत सिंह 24 साल के थे जब उन्हें मृत्यु दंड दिया गया था। हम यह नहीं कहते कि, हम भगत सिंह के विरूद्ध हैं, लेकिन वह समान रूप से अपने मृत्यु दंड के लिये जिम्मेदार हैं और उन्हें मृत्यु दंड दिया जाना पर्याप्त उचित है। क्योंकि उनकी उपस्थिति में, हम उस शान्तिपूर्ण स्वतंत्रता को कभी नहीं पा सकते थे। हम हिंसा के साथ किसी को या कुछ भी नहीं जीत सकते थे। अहिंसा ही एक मात्र कुंजी है जिससे की विश्व में कुछ भी जीता जा सकता है। भगत सिंह हो सकता है इतना चाहते रहे हों कि अपने कार्यों से सुर्खियों और प्रसिद्धि को पा सकें।