अटल बिहारी वाजपेयी कहां हैं?

Posted on by Srishti Jain
 
  

अटल बिहारी वाजपेयी कहां हैं?

यह युगों बाद था कि मैंने अटल बिहारी वाजपेयी का नाम मीडिया में पाया, और वह भी सब गलत कारणों के लिए था। अपनी प्रकृति के अनुसार, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने, भूतपूर्व प्रधानमंत्री को भारत रत्न देने के प्रस्ताव के लिये नरेंद्र मोदी सरकार की निंदा किया।

टोपी गिराने पर भी विवाद को उभारने के लिये प्रसिद्ध, हैदराबाद से मुस्लिम एमपी को समय और अधिकार का तनिक भी ज्ञान नहीं है। व्हील-चेयर से बंधे वाजपेयी 90 वर्ष से अधिक के हो चुके है, इसलिये हमें राजनीति को एक तरफ छोड़ना चाहिये और उन्हें वह आदर देना चाहिये जिसके वे योग्य हैं।

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किसी भी कारण से, हमारे भूतपूर्व प्रधानमंत्री एकाकी और संघर्षपूर्ण जीवन जी रहे हैं।

अटल जी का निवास भाजपा मुख्यालय से केवल 15 मिनट की दूरी अशोक रोड पर है लेकिन उनका एसपीजी-सुरक्षित कृष्णा मेनन मार्ग बंगला रेगिस्तान के रूप में दिखता है।

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भारत के एकमात्र राजनीतिज्ञ प्रधानमंत्री, वाजपेयी अब से दशकों पहले सक्रिय राजनीति से दूर हो चुके हैं। 2009 में हुये स्ट्रोक  से पीड़ित होने के बाद वह व्हील चेयर पर रखे गये हैं और धीरे  धीरे लेकिन गुमनामी में खो गये हैं। किसी समय का यह दहाड़ता शेर कम होकर तुच्छ हो चुका है। यह किसी ऐसे आदमी का भाग्य होना स्वीकार्य नहीं है।

क्या भारत ने वाजपेयी का अपमान नहीं किया है। क्या हम, एक देश के रूप में, ऐसे वृद्ध राजनीतिज्ञ की अच्छाई के बारे में ध्यान देते हैं, विशेष रूप से एक ऐसा जिसने स्थायी विचार और ईमानदारी अपने पीछे छोड़ी हो?

भारतीय होने के नाते, हमें लोगों का ध्यान रखने वाले और दयालु को धन्यवाद देना चाहिये। वास्तविकता में, हम लोगों में से ज्यादातर लोगों को अपने वृद्ध अभिभावकों से कोई लगाव नहीं होता है, असम्बन्धी की तरह अकेला छोड़ दिया जाता है, भले ही वे प्रधान मंत्री ही क्यों न हों। काम का दबाव, शादीशुदा ज़िंदगी की मांग, बच्चे और अन्य व्यस्ततायें सारा समय ले लेती हैं। यह बाद में होता है, जब वे चले जाते हैं, कि हमें उनके जाने का अभाव होता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। केवल खेद रह जाता है।

वाजपेयी अविवाहित रहे और अपना कोई परिवार नहीं था। वे केवल कुछ निष्ठावान देखभाल करने वालों पर निर्भर है जो केवल उनके मित्र और चाहने वाले हैं।

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केवल एक व्यक्ति जो उनका साथ देता और नियमित देखने वाला है वह है उनके पुराने मित्र आडवाणी, एन एम घाटे लगभग साठ दशकों से नज़दीकी मित्र और बी सी खंडूरी (जनरल से राजनीतिज्ञ में परिवर्तित, जो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे) । वे उनके पास आते और बगल में बैठते हैं और हल्की बातें करते हैं। लेकिन वाजपेयी के चेहरे पर सादापन रहता है, कोई समझ का भाव नहीं आता है। उनकी पुत्री, नमिता, ने अपना सारा जीवन अर्पण कर दिया है और हर सम्भव देखभाल करती है।

एक अंदरूनी के अनुसार, “प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनके स्वास्थ्य के बारे में नियमित जानकारी रखते थे और निजी रूप से उनके जन्मदिन पर बधाई देना नहीं भूलते थे”।

लेकिन बिल्कुल भी गलत नहीं होगा, कि वाजपेयी दिमागी रूप से तेज़ हैं, उन्हें अपने चारों तरफ की पूरी जानकारी है। वे केवल स्ट्रोक के कारण बोल नहीं सकते। स्ट्रोक के पहले, वाजपेयी अपना बहुत सारा समय कविता और कहानियों को लिखने में खुशी से बिताते थे। आज, उनके पास करने को कुछ नहीं बस रिक्तता के साथ कुछ नहीं पर देखना है। वह अपने पास की बहरी खामोशी बहुत सफाई से देख सकते हैं। वे देख सकते हैं कि बहुत लोग जो उनका चाहने वाला बताते थे, आज उनके स्वास्थ्य की भी परवाह नहीं करते हैं। वह पार्टी में रक्षक के बदलाव देखते हैं, वह सबकुछ देखते हैं जो भारत और विश्व में गलत चल रहा है। वह केवल इन सब के बारे में कुछ कर नहीं सकते हैं।

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वाजपेयी के दिन बहुत अनुशासित थे। उनका अधिकतर समय फिज़ियोथेरेपिस्ट, डॉक्टर और नर्सों के साथ बीतता है और उन्हें उपचार के समय धीरे से करने के लिये कहा गया है।

वाजपेयी प्रॉन और चायनीज़ खाने के बहुत शौकीन थे लेकिन आज बहुत थोड़ा सा दिया जाता है। वह संकुचित हो चुके हैं और केवल निर्देशित खाद्य को केवल खाते हैं। केवल एक चीज़ जिसे लोग याद करते है कि वाजपेयी कभी बहुत बिमार हुये, उनकी हाजिरजवाबी, कविता और एक पंक्ति में कहना।

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संसद में, जब वे बोलते थे, यब उनके विरोधी भी चुप्पी साध लेते थे। वे उनके गुरूत्व और सच के प्रति संवेदना को धन्यवाद देते थे।

अटल बिहारी वाजपेयी भारत के शायद पहले प्रधानमंत्री होंगे जिन्हें विरोधी भी सम्मान और प्यार देते थे।