हाँ, एडॉल्फ हिटलर नस्लवादी था, लेकिन वह दुष्ट नहीं था! गोएरिंग और हिम्मलर द्वारा यहूदियों का संहार थोपा गया था!

Posted on by Samiksha Pathak
 
  

उस सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रवादी की मौत के लगभग 70 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक एडॉल्फ हिटलर के बारे में हम पर्याप्त नहीं जान सकते हैं।

हिटलर एक पैदाइशी चित्रकार था, उसकी कला ने लाखों जर्मनियों को चित्रकारी के लिये प्रेरित किया। नुर्मबेर्ग में. हाल ही में, उनकी 14 अनूठी जलरंग और चित्रकारी को लगभग 40,000 यूरो में निलाम किया गया। स्पष्ट रूप से, जर्मनी में हिटलर की कलाकृतियों को बेचना गैरकानूनी नहीं है जहाँ तक सम्भव है नाज़ी शब्द या प्रतीक दिखायी नहीं पड़ता, लेकिन ऐसे बहुत सारे लोग है जो हिटलर की कलाकृतियों को बेचना का विरोध करते है।

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हमारी यह धारणा है कि हिटलर एक दुष्ट आदमी था जो यहूदियों के संहार के लिये उत्तरदायी था। हिटलर ने लाखों यहूदियों को अपने यातना शिविरों और गैस कक्षों में मार डाला था, लेकिन यह उस समय की परिस्थितियों को प्रदर्शित करने में असफल रहा, जिन्हें हिटलर ने चुनौतियों के रूप में सामना किया।

1933 से 1945 तक जर्मनी के चांसलर के रूप में, 1934 से 1945 तक जर्मनी के नाज़ियों के लिये फ्युहरर, हिटलर ने उस समय की समस्याओं के बदले में ऐसी कार्यवाहियां कि। हम कैसे बाद में उनका मूल्यांकन कर सकते है?

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द्वितीय विश्व युद्ध के विनाश को देखते हुये हिटलर के ऊपर हमला करना काफी आसान है लेकिन उन्होंने जर्मनी पर उस समय नियंत्रण रखा जब विश्व के अन्य देश बहुत अधिक आर्थिक दबाव में थे। रूसी क्रान्ति के कारण, साम्यवादियों का खतरा पूरे यूरोप में फैला हुआ था। पश्चिमी शक्तियां जर्मनी को दबाने के लिये साजिश रच रहीं थीं। फासीवाद, फ्युहरर के लिये, जीवनशैली थी और हिटलर को विश्वास था कि वह जर्मनी को ज्यादा ऊंचाई तक ले जायेगा। वह राष्ट्रवादिता और शुद्ध नस्ल में विश्वास करता था, लेकिन यह अकेले जर्मनी के लिये बहुत कठिन था। ब्रिटिश सत्ता को भी ऐसा विश्वास था!

हम हिटलर की नस्लवादी धारणा का मजबूती से विरोध करते हैं लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि उस समय के वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया कि कुछ जातियां निम्नकोटि की होती हैं और उनकी शारीरिक संरचना अशुद्ध होती है। हिटलर को अंधविश्वासी सहमत आदमियों की मंडली में सम्मिलित होने के लिये दोषी माना जा सकता है।

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वस्तुत:, हिटलर को विभिन्न निंदनीय कार्यों के संदर्भ में अंधेरे में रखा गया था, उसके द्वारा किये गये बहुत सारे निंदनीय कार्यों के लिये वह सीधे तौर पर उत्तरदायी नहीं था। ‘तीसरे जर्मन साम्राज्य’ के बहुत सारे आदेश स्वयं हिटलर के पास से नहीं आते थे। यह पहले से ही सिद्ध किया जा चुका है कि हिटलर आर्यों की प्रजाति के श्रेष्ठता में विश्वास करता था और रक्त की शुद्धता को सुनिश्चित करना चाहता था, जिसके फलस्वरूप नरसंहार हुआ।

लेकिन कोई गलत नहीं, हिटलर मौत शिविरों को बनवाने के लिये जिम्मेदार नहीं था। उसके नीचे के अन्य दूसरों ने उसकी स्थिति का शोषण किया और फ्युहरर के नाम से आदेश जारी किया। हिम्मलर, उदाहरण के लिये, तीसरे जर्मन साम्राज्य की जातिवादी नीति में बहुत प्रमुख था, उसके ऊपर भी समान रूप से आरोप लगना चाहिये। गोएरिंग ने जियुस के विरोध अलग से आंदोलन चला रखा था।

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युद्ध अपराधों को शुरू करने के लिये हिटलर को अकेले क्यों जिम्मेदार बताया जाता है। जोसेफ स्टालिन ने आसुरी ‘गुलग्स’ बनवाया था जो नाज़ी शिविरों की तरह ही बुरा था, लेकिन स्टालिन के विरुद्ध हिटलर की तरह आवाज़ें नहीं उठीं। शायद, ऐसा इसलिये था क्योंकि यूएसएसआर मित्र राष्ट्रों के साथ था और पश्चिमी शक्तियां रूस के साथ वफादारी निभा रहीं थी!

वह, हो सकता है कि, मानसिक रूप से असंतुलित हो चुका हो। प्रथम विश्वयुद्ध में, हिटलर मित्र राष्ट्रों द्वारा बंदी बनाकर मार दिया गया था। उसे हर निरादर को सहन करना पड़ा जिसे हम आज दूसरों को पीड़ित करने के लिये उसे दोषी ठहरा सकते हैं। यह विश्वास किया जाता है कि वह कई अवसरों पर अपने फैसले की सफाई देते-देते अपना होश खो दिया था।

30 अप्रैल 1945, जब सोवियत की सेना ने हिटलर को शून्य किया तो उसने स्वयं को गोली मार लिया और इवा ब्राउन, उसकी पत्नी, ने एक साइनाइड कैप्सूल को खा लिया। उनके शरीर को बंकर के आपातकाल दरवाजे से सीढ़ियों द्वारा साम्राज्य के चांसलर के दफ्तर के पीछे ऊपर लाया गया, जहाँ उन्हें बम गड्ढे में पेट्रोल से भिगा कर रखा गया था।

मैं विश्वास करता हूं हिटलर दुष्ट नहीं था। वह नस्लवादी था और जर्मन श्रेष्ठता को सुनिश्चित करने के लिये अपनी हद तक चला गया था। किसी भी देश का नेता ऐसा जरूर चाहेगा, लेकिन हिटलर ने ऐसा सपना सच करने के लिये साहस किया। उसके तरीकों की तीखी आलोचना हो चुकी है, जैसे कि उन्हें किया जाना चाहिये, लेकिन उन दबाव परिस्थितियों को भी नहीं भूलना चाहिये। अपने अनुयायियों के साथ, हिटलर ने जर्मनी को प्रथम विश्व युद्ध के टुकड़ों से ऊपर उठा कर इसे बनाया था, यकीनन, 1930 के अंतिम दशक से 1940 के दशक के प्रारम्भ के दौरान सबसे शक्तिशाली राष्ट्र था।