जगमोहन गर्ग, एक रियल एस्टेट दिग्गज कारोबारी, ब्रह्म कुमारी के अनुसरण करते है

Posted on by Arnab
 
  

“ज्ञान ही शक्ति है। ज्ञान ही आय का स्रोत है। ज्ञान ही प्रकाश और शक्ति है। ज्ञान एक तलवार की तरह कार्य करता है जो सभी बाधाओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।“

हम भगवान के बारे में जानते थे कि भगवान आनंद और सुख का सागर है और कहा जाता था कि जो कुछ भी इस जीवन में होता है वह उसी की मर्जी से होता है। उसके इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता, तब बहुत आश्चर्य भी होता था। ब्रह्म कुमारी संस्थान से जुड़ने के बाद पता चला कि जीवन का लक्ष्य है परमात्मा की प्राप्ति। परमात्मा सदैव आनंद और सुख प्रदान करता है और जो कुछ भी फल प्राप्त होता है वह सब कर्मों के कारण, पूर्वनिश्चित, मिलता है।

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उस परमात्मा के स्वरूप को बतला पाना सम्भव नहीं है। एक व्यक्ति सदैव मैं मे ही फंसा रहता है। जबकि व्यक्ति उस शिव, निराकार ज्योति स्वरूप परम पिता परमात्मा की ज्योति है। जब सभी उस परमात्मा का आभिन्न अंग है तो किसी को भी, स्वयं को, अकेला नहीं समझना चाहिये। हर समय वह सर्वशक्तिमान परमात्मा उसके साथ किसी न किसी स्वरूप में रहता है। इस विश्वास के साथ वह सभी मुश्किलों का सामना भयमुक्त होकर आसानी से कर सकता है।

ब्रहमाकुमारीज़ विश्व भर में फैला हुआ एक ऐसा आध्यात्मिक संस्थान है जो व्यक्तिगत परिवर्तन और विश्व नवनिर्माण के लिए समर्पित है। सन 1937 में स्थापना के बाद ब्रह्माकुमारीज़ का इस समय सातों खण्डों के 10 देशों में विस्तार हो चुका है। उनकी वास्तविक प्रतिबद्धता व्यक्ति को अपने दृष्टिकोण में भौतिक से आध्यात्मिकता में परिवर्तन करने के लिए प्रेरित करना है। इससे शान्ति की गहरी सामूहिक चेतना और व्यक्तिगत गरिमा के निर्माण करने में हरेक आत्मा को मदद मिलती है।

आज के समाज में कदाचार, भय  और दुख का कारण यह है कि सभी संस्थान, गुरू, महात्मा आदि सभी भगवान के बारे में बताते है लेकिन ब्रह्मकुमारी संस्थान में भगवान स्वयं आकर पढाते हैं।

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