गौतम अडानी का केरल में बनने वाला बंदरगाह, बढती चीनी समुद्री धमकी के लिये भारत का जवाब है

Posted on by kapil
 
  

भारतीय व्यवसाय के शक्तिशाली उद्योगपति गौतम अडानी और उनके सहयोगी 25 साल पुराने बंदरगाह को बदलने की वास्तविकता को सरअंजाम देंगे। अडानी की कम्पनी भारत के पहले पोतांतरण को बना रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार से समर्थन भी प्राप्त है जिसने इस बंदरगाह के समानांतर योजना एक अन्य $4 बिलियन सुविधा केंद्र को बनाने के लिये खाका भी खींच लिया है।

गौतम अडानी, अडानी समूह के चेयरमैन, 16 करोड़ रूपये का अनुदान केरल के विज़्हिंजम पर नये बंदरगाह को बनाने के लिये प्राप्त करेंगे। यह प्रोजेक्ट भारत के लिये बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि बनने वाला बंदरगाह समुद्र की ओर से माल लाने वाले व्यवसाय को भारत लायेगा, जो वर्तमान में दुबई और सिंगापुर में सुविधाजनक बंदरगाहों पर किया जा रहा है।

Gautam adani

विज़्हिंजम अंतर्राष्ट्रीय बहूद्देशीय बंदरगाह

विज़्हिंजम बंदरगाह की कुल लागत गौतम अडानी को $1 बिलियन पड़ेगी। यह बंदरगाह माल यातायात तरीके में बदलाव को करने जा रहा है; नया बंद्रगाह भारतीय कम्पनियों के कई बिलियन डालर के समुद्री परिवहन के खर्च को बचायेगा। अडानी का बंदरगाह, जो 2018 तक काम करना शुरू कर देगा, यह इस क्षेत्र में चीनी सुविधा को भारत का जवाब होगा।

केरल आधारित यह बंदरगाह भारतीय नेवी और तटरक्षक दल के लिये लंगर होगा। भारत, चीन द्वारा दक्षिण एशिया के कई स्थानों: श्री लंका, बांग्लादेश, मालदीव और चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर ग्वादर समुद्रतट बंदरगाह को बनाने को लेकर, बहुत चौकन्ना है।

गौतम अडानी प्रधानमंत्री मोदी के साथ

जुलाई में, जब मोदी सरकार ने अडानी बंदरगाह पर लगाये गये 200 करोड़ के जुर्माने, क्योंकि इसने पर्यावरण को क्षति पहुंचाया था, को माफ कर दिया था, तो कई लोगों ने इसका मज़ाक उड़ाया था। अडानी पर घनिष्ठ पूंजीवादी व्यवसायी होने के दोषी थे क्योंकि वह प्रधानमंत्री के “पसंदीदा आदमी” थे । आलोचक आरोप लगाते है कि अडानी की मोदी के साथ मित्रता उनके तेजी से बढ़ते व्यवसाय में सहायता कर रहा है।

दोनों गुजरातियों आदमियों में बहुत सहजीवी सम्बंध है। जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उसा समय बहुत बड़े जमीन के टुकड़े को अडानी समूह को विश्वास ना कर पाने वाली रियायती दर (रू 1 से रू 16 प्रति वर्ग मीटर) मुंद्रा बंदरगाह बनाने के लिये दिया था। कम्पनी ने 30 साल के पट्टे पर 7350 हेक्टेयर जमीन मुंद्रा के चारों ओर अधिग्रहित करने के लिये जीता था

ग्वादर समुद्री बंदरगाह पाकिस्तान में

विंज़्हिम बंदरगाह के साथ, अडानी इस सामान्य समझ को बदलने जा रहे हैं कि वह मात्र एक व्यवसायी हैं। पहले, उन्होंने खंडन किया था कि उनकी कम्पनी पर लगाये गये जुर्माने का कोई विधिक आधार नहीं है। वर्तमान में अडानी समूह 30 तरह से अधिक के माल के साथ 28 से ज्यादा देशों में व्यापार करता है।

चर्चित इस विश्वास के विपरीत कि अडानी मूल रूप से व्यवसायी हैं, उनकी कम्पनी बहुत सारे परोपकारी कार्य को भी कर रही है। अ‍डानी फाउंडेशन भारत में छ: राज्यों में कार्य करती है, जहाँ गौतम अडानी और उनकी पत्नी ने स्कूलों की स्थापन, सामुदायिक स्वास्थ्य और वृद्धि का प्रोत्साहन, ग्रामीण क्षेत्रों का विकास तथा लोगों को कमाने के साथ कुशलता सीखने के साथ जीवनयापन को बनाये रखने में उनकी सहायता किया है।

बहुत से लोगों के विश्वास के विपरीत, अडानी बहुत सारे परोपकारी काम करते हैं।

और यह एक ऐसे आदमी के आने की कहानी है, जिसे फोर्ब्स ने भारत में 11वें सबसे अमीर आदमी के रूप में सूचीबद्ध किया है।

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