क्या लॉर्ड लुइस माउंटबेटन, भारत के अंतिम वायसराय, एक बच्चों के साथ यौनाचार का दरिंदा था?

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यह एक प्रेम त्रिकोण था जिसने आधुनिक भारत के भविष्य को आकार दिया था। ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन, उनकी पत्नी लेडी एड्विना और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस रिश्ते में उलझे हुये थे, जो हॉलीवुड कि किसी बहुचर्चित फिल्म को भी फीका कर सकता है।

Lord Louis Mountbatten, Lady Edwina and Jawaharlal Nehru

(बायें से दायें) ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन, लेडी एड्विना और जवाहरलाल नेहरू १५ अगस्त 1947 को

नेहरू के आलोचक आरोप लगाते हैं कि इन तीनों में उभयलिंगी प्रवृत्ति थी और लॉर्ड माउंटबेटन का उल्लेख कि वे एक ‘खुश तिकड़ी’ थे, यह वाक्य वास्तविकता को स्पष्ट कर रहा है। लेकिन एड्विना अपने भारतीय प्रेमी के प्यार में पागल थी, इसके बारे में कोई संदेह नहीं है। माउंटबेटन की पुत्रियां, पैट्रीशिया और पामेला, ने बार-बार दुहराया है कि उनकी मां का नेहरू के साथ एक विशेष लगाव था।

लेकिन क्या एड्विना इसलिये नेहरू के प्रति आकर्षित हुयी क्योंकि उनका पति समलैंगिक था? यह बहुत प्रसिद्ध टिप्पणी थी कि लुइस माउंटबेटन एक समलैंगिक था, और यही वह कारण हैं जिसकी वजह से वह अपनी पत्नी के भारतीय नेता के प्रति प्रकट रूप से नज़्दीक होने पर भी असहज नहीं हुआ थे। ब्रिटिश उच्चकुलीन के यौनिक आचरण की तरफ उन्मुख होने से हमे उतना परेशान नहीं होना है जितना कि उन पर आयरलैंड में बालप्रेमी  दुस्साहस में शामिल होने का आरोप का लगना है।

माउंटबेटन पुत्रियों, पैट्रीशिया और पामेला, ने सार्वजनिक साक्षात्कार में बार-बार दुहराया है कि उनकी मां एड्विना (दायें) का नेहरू (बायें) के साथ एक विशेष बंधन था।

अप्रैल 1990 में , एक लेखक रॉबर्ट हर्बिंसन (उपनाम रॉबिन ब्रायन) ने डबलिन से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘नॉउ’ में कहा कि लॉर्ड माउंटबेटन और अन्य एक भूतपूर्व छात्र के गिरोह में शामिल थे जो ग्रामीण घरों के साथ-साथ किंकोरा छात्रावास में समलैंगिक व्यभिचार को चलाते थे।

साथ ही, एक पुस्तक वॉर ऑफ द विंडसोर, स्टिफन प्रायर द्वारा लिखित ( 18 नवम्बर २००२ को प्रकाशित) दावा करता है कि अफवाहों ने किंकोरा छात्रावास के चारों ओर फैले बदनाम घोटालों के साथ (लॉर्ड माउंटबेटन) का नाम जोड़ा है……हाल ही के सभी शाही लोगों में से, कोई भी लगातार अनैतिक और गैरसिद्धांतवादी नहीं था जैसा कि बाद में लॉर्ड माउंटबेटन थे।

The Kincora Boy's Home in Ireland.

आयरलैंड, बेल्फेस्ट में किंकोरा का छात्रावास। 1982 में शुरुआत करके, सैंकड़ों दस्तावेजों को बेल्फेस्ट में सार्वजनिक रिकॉर्ड कार्यालय से जारी किया, लेकिन एक भी किंकोरा घोटाले से सम्बंधित नहीं था

यह पुस्तक एक परेशान करने वाले वर्णन को बतलाता है; “(लॉर्ड माउंटबेटन) ने भी कहा उसे समलैंगिकता में रूचि है और विशेष रूप से काम करने वालों लड़कों के समूह के प्रति किशोरावस्था में आकर्षित होता था।

किंकोरा छात्रों के आवास, १९५८ में स्थापित, में काम करने वाले लड़कों को रखा जाता था। इसे आयरलैंड में प्रोटेस्टेंट पैरामिलिट्री संगठन के सदस्य के द्वारा चलाया जाता था। यहाँ पर प्रोटेस्टेंट समूह के युवा लड़कों को न्यायालय या राज्य के अभिभावकत्व में देखभाल के लिये रखा जाता था।

William McGrath, Kincora Boys' Home

विलियम मैक्ग्रॉ (दायें), किंकोरा के घर के मालिक, को जासूसों के द्वारा ‘क्रूर व्यक्ति’ की उपाधि दी गयी थी। किंकोरा घर के तीन आदमी 1960 से 1980 के बीच उनकी देखभाल में 11 साल के लड़के के साथ यौन व्यभिचार के दोषी पाये गये थे।

किंकोरा, जो आज की तारीख में आयरलैंड में ऐतिहासिक संस्थानिक दुर्व्यवहार की जांच का विषय बन चुका है, कई उच्च-श्रेणी ब्रिटिश आदमियों के आनंद का अड्डा बन गया है, जो बार-बार इस घर पर असहाय युवा लड़कों के साथ व्यभिचार करने में शामिल करने के लिये आते हैं।

वॉर ऑफ विंड्सोरस पुस्तक किंकोरा में आने वालों पर कोई अभियोग न लगाने और प्राधिकारियों द्वारा किंकोरा घर में दुर्व्यवहार मामले में दखलंदाजी से 1981 के अंत तक विमुखता के बारे में बात करती है। किंकोरा बालप्रेमी गिरोह चलाने वाले लोगों पर १९८१ में अभियोग चलाया गया था, लेकिन कोई भी आरोप उच्चवर्गीय महत्वपूर्ण ग्राहकों के विरूद्ध नहीं लाया गया था

Lord Mountbatten (R) and Prince Charles

लॉर्ड माउंटबेटन (दायें) राजकुमार चार्ल्स का परदादा और सलाहकार था

आन्तरिक ब्रिटिश खुफिया इकाई एमआई5 लम्बे समय तक किंकोरा छात्रावास पर यौन दुर्व्यव्हार पर पर्दा डालने की दोषी है। दशकों से लगातार यह आरोप लगाया जाता रहा है कि एक बालप्रेमी गिरोह को घर में चलाने की अनुमति दी गयी थी, जिससे कि एमआई5 बाद में समलैंगिक घोटाले के माध्यम से शक्तिशाली अपराधियों को ब्लैकमेल कर सके।

शाही परिवार के एक सदस्य, लॉर्ड माउंटबेटन राजकुमार चार्ल्स के परदादा और परामर्शदाता थे। इस प्रकार का सम्बंध केवल आरोपों को बल प्रदान करता है अगर लॉर्ड माउंटबेटन के विरूद्ध लगाये गये आरोप सही पाये जाते हैं तो हम एड्विना-नेहरू के सम्बंध को हेय दृष्टि के साथ देखने को रोककर और उनके भाग्य के प्रति सहानुभूति दिखाने की शुरुआत कर सकते हैं।

स्रोत:

https://theukdatabase.com/uk-child-abusers-named-and-shamed/childhood-abuses/uk-childrens-homes-crisis/kincora-boys-home/
http://www.independent.co.uk/news/uk/kincora-boys-home-historic-abuse-inquiry-to-examine-abuse-claims-a7057116.html
https://www.theguardian.com/society/2015/feb/15/mi5-kincora-childrens-home-northwen-ireland-sexual-abuse

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