मैंने अपने भविष्य के लिये बहुत कड़ी मेहनत की है, एक एससी या एक एसटी को मेरी नौकरी चुराने का कोई अधिकार नहीं है!

Posted on by Srishti Jain
 
  

मैंने हाल ही अपनी स्नातक डिग्री पूरा किया और अन्य सभी आकर्षक उम्मीदवारों की तरह, एमबीए प्रवेश परीक्षा के लिये तैयारी शुरू कर दिया है। कैट परीक्षा मेरा लक्ष्य था, और मैंने अपनी कुछ भी कर सकने की क्षमता से अधिक मेहनत किया क्योंकि मैं जानता हूं कि मुझे उसमें जाने के लिये बहुत संघर्ष करना पड़ेगा। लेकिन मैंने अपना विश्वास रखा।

284356-cat-exam

उत्तीर्णांक अप्रत्याशित ऊंचे रहे और उसमें भी समस्या यह रही कि ऐसे लोग जो अल्पसुविधा प्राप्त थे-एससी और एसटी- उनके लिये अंश था। उन्हें मेरे जैसे उम्मीदवारों के ऊपर प्राथमिकता दी गई थी।

मेरे परिणाम घोषित किये जाने के दिन पर, मैं अपने अभिभावकों के सामने सर झुकाये खड़ा था। मैंने 85 प्रतिशत अंक प्राप्त किए था, लेकिन क्या वह उच्च संस्थानों जैसे आईआईएम, में प्रवेश पाने में सहायता के लिये पर्याप्त था? उच्च प्रबंधन संस्थानों द्वारा आपको स्वीकार नहीं किया जायेगा।

अब इसे कल्पना करिये। आपको आईआईएम से एक फोन आता है बिना किसी प्रवेश परीक्षा में शामिल हुये, या आप बहुत दूर रहते है लेकिन किसी तरह से संस्था में जगह पाने की व्यवस्था कर लेते हैं। आपका साक्षात्कार केवल एक प्रक्रिया से अधिक कुछ नहीं है। चिंता की कोई बात नहीं है भले ही आप हकलाते या अटकते हों, आपको ले लिया जायेगा। आखिरकार, आप अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के विशेष वर्ग से सम्बंधित हैं। आपको उन लोगों से अधिक प्राथमिकता दी जायेगी जो आप से ज्यादा हकदार हैं।

मजे की बात यह है कि, उच्च संस्थान जैसे आईआईएम सामान्य रूप से अपने उत्तीर्णांक घोषित नहीं करते हैं, लेकिन एक सामान्य वर्ग के छात्र ने, नाम दीपक मेहता, आरटीआई डाला था, आईआईएम से उनका उत्तीर्णांक घोषित करने के लिये पूछा था। इसका जवाब बहुत चौकाने वाला था!

सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिये, उत्तीर्णांक 98.28 और एसटी अभ्यर्थी के लिये 38.32 था। कोटा प्रणाली एक स्वस्थ परम्परा कभी नहीं हो सकती है। यह असश्क्त को कठोर परिश्रम करने से बचाता है। यह आसानी से उपलब्ध कराता है और मानसिकता को भ्रष्ट करता है।

हम आरक्षण क्यों चाहते हैं? इसका अंतिम उद्देश्य यह है कि, हर व्यक्ति को रोजगार पाने का बराबर मौका मिले। एससी और एसटी को मुख्यधारा में लाने, उन्हें डिग्री और रोजगार के साथ सशक्त बनाने का विचार है।

लेकिन मैं पूछता हूं कि, इन्हें आसानी से उपलब्ध कराने के बजाय, उन्हें ऐसी शिक्षा क्यों नहीं देते कि वे अपने पैरों पर खड़े होने योग्य हो जायें। सुविधावंचित लोगों को कौशल के साथ सम्पन्न क्यों नहीं किया जाता जिससे कि वह समाज में अधिकारपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकें?

Tagged , , |