मुम्बई के गिरोह: इन अपराधजगत के माफियाओं ने शहर पर साठ के दशक से नब्बे के दशक के मध्य तक शहर पर राज किया। इन्होंने समानांतर सरकार को चलाया!

Posted on by Srishti Jain
 
  

मुम्बई अपराधजगत की कहाँनियां बदले और क्षेत्रीय वर्चस्व को बतलाती है। बढने के साथ, मैं हत्या और तस्करी की नाटकीय घटनाओं के प्रति उत्सुक था। बॉलीवुड ने भी इनके शान को दिखाया है, इन माफियाओं को, अपराधी बनने के लिये प्रेरित होने को, चलचित्रों के माध्यम से दिखाया है। यह एक चर्चा का विषय है जिसे अवश्य होना चाहिये। क्या बॉलीवुड को ऐसे हत्यारे माफियाओं को महिमामंडित करना चाहिये?

बिल्कुल नहीं, लेकिन खून बेचना और जनता के प्रति उत्तरदायित्व बॉलीवुड का विषय नहीं है। चलचित्र जैसे शूटऑउट एट लोखंडवाला, सत्या, वंस अपॉन ए टाइम इन मुम्बई, वास्तव, गैंग्स्टर और साहिब, बीवी और गुलाम सभी सफल रहीं। लोगों का एक बहुत बड़ा समूह इन माफियाओं से प्रभावित रहा, और कुछ तो ऐसे बन भी गये। वे लगातार ऐसे चलचित्र बनाते रहते हैं, लेकिन यह हम पर निर्भर करता है कि इन्हें हम कैसे स्वीकार करते हैं।

आइये पिछले तीन दशकों में मुम्बई के सबसे अधिक कुख्यात माफियाओं के जीवन को देखते हैं।

अब्दुल करीम शेर खान, उर्फ करीम लाला- भारतीय माफिया का संस्थापक

अपराध का मसीहा और 1940 के दशक में पठान गिरोह का नेता, करीम लाला संगठित अपराध का अगुआ था। वह आभूषणों की तस्करी, अवैध शराब का कारोबार, जुआ के अड्डा, जबरन वसूली और हशीश को बेचने में शामिल था।

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हाजी मस्तान मिर्ज़ा, उर्फ हाजी मस्तान- भारत का चर्चित माफिया

गुंडा और बहुत बड़ा तस्कर, हाजी मस्तान ने 20 साल के लिये राज किया! उसने बॉलीवुड को प्यार किया और बहुत सारे सम्पर्क रखे। वह कुछ फिल्मों का निर्माता था और इस प्रक्रिया में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, दिलिप कुमार, राज कपूर, संजीव कुमार और कई अन्यों के साथ सम्बंधों को बनाया।

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वर्धमान मुनीस्वामी मुदालियर, उर्फ वर्धाभाई’- हाजी मस्तान के लिये अंगरक्षक

दो दशकों के लिये, वह सबसे अधिक डरावने माफियाओं, करीम लाला और हाजी मस्तान के साथ, में से एक था। वह, कुख्यात तस्कर, कस्टम कार्यालय में सम्पर्क रखता था।

वर्धा भाई के साथ, विवेकी माफियाओं के युग का अंत होता है, और एक घातक अध्याय का आरम्भ होता है। अस्सी और नब्बे का दशक बिल्कुल अलग था। खून, ड्रग्स, हत्या, बलात्कार और सभी तरह की अपराधिक गतिविधियां थी और अपराधी मजबूत, शक्तिशाली और ज्यादा सम्पर्क में हुये।

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दाउद इब्राहिम- भारतीय माफियाओं का धर्मपिता

डी-कम्पनी का संस्थापक वर्तमान में फोर्ब्स के शीर्ष 11 घातक अपराधियों की सूची में तीसरे स्थान पर है। मुम्बई में 2008 के आतंकी हमले और 1993 के मुम्बई बम विस्फोट के लिये भारतीय अधिकारियों द्वारा देखा गया, जिसमें वह शामिल था।

अबू सलेम- दाउद को हथियार और गोला बारूद पहुचाने वाला आदमी

टैक्सी चालक के रूप में अपना व्यवसाय शुरू करके, वह पहुंचाने वाला आदमी बना, और फिर कपड़ा बेचनेवाला, और अंत में भूमि भवन का एजेंट। उसने संजय दत्त को हथियार पहुंचाया, मनीषा कोइराला के निजी सहायक को मारा और टी-सिरीज़ के संस्थापक गुलशन कुमार की भी हत्या कि। वह 1993 के मुम्बई बम धमाकों में शामिल था।

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छोटा राजन- दाउद का अभिशाप!

बहुत सारे मुकदमों में वांछित, जिसमें शामिल है जबरन वसूली, हत्या, तस्करी, ड्रग का व्यापार और चलचित्रों को वित्त देना। उसने 1996 में धमाकों के बाद दाउद इब्राहिम का साथ छोड़ दिया और अपना स्वयं का गिरोह बना लिया।

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टाइगर मेमन- 1993 मुम्बई धमाकों का प्रमुख आरोपी

हाल ही में इसे मुम्बई बम धमाकों में अपनी भूमिका के लिये फांसी पर लटका दिया गया। एक-दिशीय सड़क पर 100 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार पर पुलिस द्वारा पीछा किये जाने पर भी निकल भागने के बाद टाइगर उपनाम रखा।

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छोटा शकील-कुछ समय के लिये हिंदी चलचित्रों को वित्त दिया

वह दाउद का एक नज़दीकी सहायक है।

अपराधजगत का ताना बाना बदल चुका है। निर्दयी बुरे लड़के को अपनी आपराधिक गतिविधियों के स्वर को बदलने के लिये मजबूर किया जा चुका है। बहुत अधिक पुलिसिया कार्यवाही के कारण हत्या और जबरन वसूली के बजाय कार्पोरेट क्षेत्र, विशेषरूप से रियल इस्टेट, में शामिल हो चुके हैं।

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