भारत में नकली खाद्य अपना सिर उठा रहे हैं लेकिन क्या हम ऐसे कई सिर वाले विनाशकारी राक्षसों को कुचलने के लिये आवश्यक कदम भी उठा रहे हैं?

Posted on by Anand Mukherjee
 
  

भारत भ्रष्टाचार रूपी कई सिर वाले राक्षस से कड़ा संघर्ष कर रहा है। लालच की यह जंग हमारे दैनिक जीवन के हर भाग पर जड़ जमाये बैठा है, यहां तक कि जो खाद्य हम उपभोग करते हैं वह भी अछूता नहीं है। अपने अधिक धन कमाने की होड़ में, खाद्य निर्माता अपने उत्पादों में अब भारी मात्रा में टॉक्सिन को मिलाने लगे हैं। वे अपने लिये तेजी से धन तो बना लेते हैं, लेकिन हम लोगों को अनगिनत बीमारियों के लिये डॉक्टर के क्लीनिक पर लाइन लगाना पड़ता है जिसकी वजह से हम बिस्तर पकड़ लेते हैं।

भारत के खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा संचालित किये गये जांच में पाया गया कि पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल और आंध्र प्रदेश- में 90% से अधिक मिलावटी खाद्य की जानकारी मिली है।

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2012 में, एफएसएसएआई ने पाया कि भारत का दो तिहाई से ज्यादा दूध मिलावटी है, इसमें नमक और डिटर्जेंट जैसी सामग्रियां मिलायी गयी होती है।

फूड सेनेटरी, विश्व के खाद्य स्रोतों की निगरानी करने वाली कम्पनी, के अनुसार भारत खाद्य उल्लंघन करने वाला विश्व का सबसे खराब देश है। यहां यह खतरे की घंटी बजा रहा है, एक तिहाई से ज्यादा खाद्य में अधिक या अवैध पेस्टीसाइड, पैथोजन मिश्रण और गंदगी या अस्वास्थ्यकारी परिस्थितियों की उपस्थिति के कारण मिलावट होती है। खबरों के अनुसार, सबसे अधिक उल्लंघन उन खाद्यों में होता है जो कच्चे या कम प्रसंस्करित होते है जिसमें समुद्री भोजन, सब्जियां, फल, मसाले, दुग्ध उत्पाद, मांस और अनाज शामिल हैं।

इंडियास्पेंड की खबरों के अनुसार, दूध भारत में सबसे सामान्य मिलावटी खाद्य है इसके बाद तेल और अंडे का क्रम आता है। 2012 में एफएसएसएआई ने पाया कि भारत में दो तिहाई दूध नमक और डिटर्जेंट जैसे सामानों के कारण मिलावटी है।

जून 2015 में, उत्तर प्रदेश फूड एंड ड्रग एड्मिनिस्ट्रेशन ने दिल्ली आधारित दुग्ध उत्पादक मदर डेरी के उत्पादों को जांचा और उसमें डिटर्जेंट को पाया। दुग्ध उत्पादक ने बिना समय को गवायें इस दावे का विरोध किया और कहा कि नियामक द्वारा लिये गये सैम्पल को जांचा नहीं गया था। सहकारी संगठन ने कहा कि जिस दूध को जांचा गया था वह “ ग्रामीण स्तर पर लिया गये खुले दूध का सैम्पल था” जो मदर डेरी द्वारा अब तक स्वीकार नहीं किया गया था।

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प्राय: शांत रहने वाले मामलों हैं, आइसक्रीम उत्पादकों द्वारा गैर अनुमति रंगों, कृत्रिम मिठासकों और संदेहास्पद जेली का उपयोग करना है जो भारतीय मानकों पर खरा नहीं उतरता है।

एक अन्य दुग्ध उत्पाद, अपराधी न दिखने वाली, आइसक्रीम भी स्वास्थ्य के लिये गम्भीर खतरा है।जो मामले प्राय: शांत रहते है उनमें शामिल है, आइसक्रीम उत्पादकों द्वारा गैर अनुमति रंगों, कृत्रिम मिठासकों और संदेहास्पद जेली का उपयोग करना है जो भारतीय मानकों पर खरा नहीं उतरते हैं। हमारे बच्चे इस नुकसानदायक जाल में फंस जाते है, बिना इस बात को जाने कि इसमें कितनी खतरानाक सामग्री मिली हुई है।

गैर लाभकारी अंग सेंटर फॉर साइंस एंड इंवायर्मेंट ने 2003 में कीड़ों से भरा एक केन खोला था, जब इसने घोषणा किया था कि भारत में जो कोला बेचा जाता है उसमें पेस्टीसाइड मिलाया गया है। इसके बाद लोग, कोला की दिग्गज कम्पनियों पेप्सीको और कोका कोला का सड़कों पर विरोध करने निकल आये थे, इन दोनों बहुदेशीय कम्पनियों ने इन लगाये गये आरोपों का खंडन किया था। उनके किये गये लम्बे चौड़े दावे कुछ साल बाद समाप्त हो गये, जब सन्युक्त संसदीय कमेटी ने सीएसई के निष्कर्षों को समर्थन किया।

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माउंटेन ड्यू 100 से अधिक देशों में, यूरोपियन यूनियन को शामिल करते हुये, प्रतिबंधित है लेकिन भारत में, हम लगातार इसे पी रहे हैं, जिसे टीवी चैनलों पर चर्चित बॉलीवुड सितारों द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है।

भारत की तुलना में, यूरोप और अमेरिका में उच्च खाद्य मानकों को अपनाया जा रहा है। लेकिन ऐसे बहुत से उत्पाद है जो यूरोपियन यूनियन में प्रतिबंधित होने पर भी भारत में प्रचलित खाद्य के रूप में बेंचे जा रहे हैं। बुलबुलों से शुद्ध किये गये सुगंधित रसदार पेय माउंटेन ड्यू 100 से अधिक देशों में यूरोपियन यूनियन को शामिल करते हुये, प्रतिबंधित किया गया है लेकिन हम इसे लगातार अपने गले से नीचे उतारने में लगे हुये हैं जिसे टीवी चैनलों पर चर्चित बॉलीवुड सितारों द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है।

2010 में, राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र, द हिंदू, ने खबर दिया कि जो शहद चर्चित भारतीय ब्रांड डाबर, हिमालया और बैद्यनाथ द्वारा बेचा जाता है उसमें हानिकारक एंटी-बायोटिक्स मिला हुआ था। कठोर खाद्य सुरक्षा नियम भारत में बने शहद को विदेशों में बेचने से रोकते हैं।

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2010 में, यह खबर दी गयी कि जो शहद चर्चित भारतीय ब्रांड डाबर, हिमालया और बैद्यनाथ द्वारा बेचा जाता है उसमें हानिकारक एंटी-बायोटिक्स मिला हुआ था।

यह सूची बहुत लम्बी हो सकती है। घूस कई सारे मामलों में इस मुद्दे का समाधान करता है, और दुखद है कि हम सरल खाद्य नियमों के कारण हानिकारक खाद्यों का लगातार उपभोग कर रहे हैं। हम इसके लिये चाहते हैं कि, एक कठोर खाद्य नियामक अंग बने, जो लाल फीताशाही से स्वतंत्र हो। आखिर, खाद्य सुरक्षा हमारी अगली पीढ़ी को टॉक्सीन से मुक्त वृद्धि को सुनिश्चित करेगा।

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