दिल्ली में सम-विषम गाड़ी का नियम: क्या विषम है?- दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने एक नया तमाशा किया!

Posted on by Srishti Jain
 
  

ऐसा लगता है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री, अरविंद केजरीवाल, की स्वप्न यात्रा खत्म नहीं हो रही है, जैसा कि इस बार वह एक बार फिर अवास्तविक योजना के साथ सामने आये है। दिल्ली में सम/विषम संख्या तंत्र पर उनका विचार लोगों को हतोत्साहित कर रहा है। यद्यपि दिल्ली की वायु स्थिति, प्रदूषण के खतरे स्तर का संकेत देने के साथ, अपने खराब दौर में है और धूल शहर को ढ़क रही है, यह समाधान भी बहुत कारगर नहीं हो सकता है। हमारा स्वास्थ्य जोखिम पर है, हम दिन और रात में जो सांस लेते है उसके द्वारा हम संकट में हैं। हालांकि, इस कब्र जैसी स्थिति से बचने के लिये आप इससे अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण की आशा करते हैं, जिसे तुरंत से लागू किया जा सके।

Arvind Kejriwal

यह विचार कोई नया नहीं है, इसे विश्व के कई अन्य भागों जैसे बीजिंग, लंदन, पेरिस और अन्य देशों में पहले ही अपनाया जा चुका है। लेकिन इन तथाकथित विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में एक अधिक उन्नत और प्रभावशाली जन परिवहन जाल का आनंद उठा रहे हैं, जो राजधानी में नदारद है। अगर लोगों को अपनी निजी गाड़ी में मुक्त आवागमन की चुनौती का सामना करना है, तो यह एक भयंकर गड़बड़ी हो सकती है। स्पष्ट रूप से, मैं केजरीवाल के चुनाव के समय से इस तरह की घोषणाओं के साथ हाल ही में दिल्ली हाइकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद आये इस निर्णय के कारण हतोत्साहित हूं। यह शहर के प्रदूषण स्तर संकट को ध्यान देने के लिये सरकार को जगाने, उन्हें दिल्ली को गैस चैम्बर के जैसा बताने के लिये था।

Pollution in delhi

मैं इस तरह की असंगत खोज के लिये मफलर वाले आदमी की तारीफ क्यों नहीं कर सकता, क्योंकि यह दिल्ली की गाड़ियों की भीड़ को और इनका उत्सर्जन कम करने का प्रयास करेगा, इसकी बहुत बड़ी नाकामयाबी पूर्व निर्धारित है। राशनिंग करना एक अंजाने लक्ष्य पर अंधों की तरह निशाना लगाने जैसा है, यह बिना वास्तविक प्रभाव क्षेत्र को जाने लागू करने जैसा है। सबसे पहली बात, इसे जनसामान्य यातायात द्वारा बहुत अधिक समर्थन नहीं मिला है, जिसकी वजह से लोग सड़कों पर असहाय रहने को बाध्य हैं। दूसरी बात, दिल्लीवासी नम्बर प्लेटों को बार बार बदलने की नई चुनौती देंगे या वास्तविकता में वे खुशी खुशी दंड को अदा कर निकलने की कोशिश करेंगे। अगर आप लोगों के लिये अन्य समस्या देते हैं, तो विश्वास करिये वे नई होशियारियों के साथ विद्रोह कर देंगे।

pollution in delhi

मैं कहना चाहूंगा कि पश्चिमी देशों से लिये गये विचारों को ठीक उसी प्रकार लागू करना सहायता नहीं करेगा। इसके बजाय ट्रकों या डीज़ल से चलने वाली गाड़ियों पर पाबंदी लगाना कैसा रहेगा? दिल्ली का वायु प्रदूषण एक घातक मुद्दा है जो 2025 तक 32000 लोगों को मार देगा। यह बहुत अधिक तार्किक समाधान और सही रास्ता चाहता है।

Arvind Kejriwal

राजनैतिक प्रतियोगी खेल खेलना जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जलवायु समिति के लिये पेरिस में है एक अनाड़ी प्रवृत्ति को दर्शाता है।

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