नक्सली से चर्चित हस्ती तक? मैं ब्लैक बेल्ट मिथुन चक्रवर्ती को रॉबिन हुड जैसे विद्रोही के रूप में चित्रित कर सकता हूं!

Posted on by Samiksha Pathak
 
  

मिथुन चक्रवर्ती हाल ही में गंभीर दुराचरण के कारण खबरों में थे। वह वास्तविकता में क्षतिपूर्ति भर रहे थे। तृणमूल कांग्रेस के एमपी और कलाकर ने वो सारा धन प्रवर्तन निदेशालय को वापस कर दिया जो उन्हें सारदा समूह से मिला था। यह धन 1.19 करोड़ रूपये था। यह निश्चित रूप से कठिन था, लेकिन, उन्होंने इसे किया।

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उन्होंने प्रोत्साहन वीडियो और प्रचार में कार्य किया था जो सारदा समूह द्वारा निर्मित और टेलीविज़न पर प्रचारित किया गया था।

1976 में जब मिथुन चक्रवर्ती ने बॉलीवुड में मृगया फिल्म के साथ प्रवेश किया, जिसके लिये उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था, मिथुन दा, शायद स्वयं को पाने और स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे। निश्चित रूप से, यह बहुत आसान नहीं था। उनके बीते दिनों कि स्मृतियां उनकी भूमिकाओं में दिखायी पड़ जाती थीं। फिल्मों जैसे ‘डिस्को डांसर’, ‘गुलामी’, ‘जीते हैं शान से’, ‘बाज़ी’, में मिथुन को आलीशानता के साथ विरोधी के रूप में चित्रित किया गया। वह प्राकृतिक था।

बहुत से लोगों का यह विश्वास था कि मिथुन दा कोलकता में नक्सली थे और एक साम्यवादी क्रांतिकारी चारू मज़ूमदार के नज़दीकी सम्पर्क में थे।

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वह सभी नक्सलियों की तरह मार्शल कला में प्रशिक्षित किये गये थे और बंगाल पुलिस की वांछित सूची में भी उनका नाम था। वह अल्पाधिकार प्राप्त लोगों के अधिकारों के लिये नक्सलियों की ओर से लड़े भी थे। उन्होंने बन्दूक भी उठाया था, यह सोचते हुये कि वह उन परिस्थितियों को बदल देंगे, लेकिन वह वास्तविकता का एहसास करने के लिये निष्कपट थे।

हालांकि, वह अपने भाई की मौत के कारण इससे हट गये थे और अपने परिवार की सहायता के लिये नक्सलवाद को छोड़ दिया। जब वह अपने अतीत से पीछा छुड़ाने की कोशिश कर आगे बढ़ रहे थे, उस समय ख्वाजा अहमद अब्बास उनके साथ आ गये और मिथुन को अपनी फिल्म ‘द नक्सलाइट’ में काम करने का प्रस्ताव दिया।

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पहले, उन्होंने इससे मना कर दिया था क्योंकि यह उन दुखदायी यादों को जागता था, लेकिन निर्देशक के लगातार दबाव के अधीन आकर स्वीकार किया। यद्यपि इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, मिथुन ने निर्देशक को विभिन्न किरदारों की भूमिका निभाने का मौका देने के लिये धन्यवाद दिया।

शुरुआती दिनों में गौरंग चक्रवर्ती के नाम से पहजाने जानेवाले, मिथुन आज के जीवन में विभिन्न पहलुओं में उच्चआदर प्राप्त व्यक्ति हैं। वह एक गुणवान, चर्चित कलाकार, टीएमसी की ओर से एक राज्यसभा एमपी, गायक, निर्माता, सामाजिक कार्यकर्ता, उद्यमी और तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों के विजेता है और एक ऐसा कद जो बहुत सारे कलाकरों को नहीं मिलता है।

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नक्सली से चर्चित हस्ती तक, मिथुन चक्रवर्ती ने बहुत ऊंचा नीचा सफर तय किया है। 60 के दशक के मध्य में, मिथुन की आंखें आपको कुछ भ्रमित कर सकती हैं। जहाँ कहीं भी दर्द, क्षोभ या उदासीनता होती है वहाँ कुछ भी कह पाना कठिन हो जाता है।

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