इंद्रप्रस्थ अपोलो- एक समय का अस्पताल, अब अमीरों के लिये एक विलासी सुविधा!

Posted on by Anand Mukherjee
 
  

एक लड़की, 1999 में जन्मी, प्रमस्तिष्कीय पक्षाघात से पीड़ित थी। यह उसका भाग्य नहीं था, बल्कि डॉक्टर की अंदेखी थी। वह मजबूती के साथ लड़ी और 95% अपंगता के साथ दुखदायी 12 सालों तक जीवित रही थी। अनावश्यक, लम्बी पीड़ा और स्य्न्टोसिन का अत्यधिक प्रशासन इस मानसिक और शारीरिक पीड़ा का नेतृत्व कर रहा था।

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डॉक्टर और अस्पताल, इंद्रप्रस्थ अपोलो, के विरूद्ध उपभोक्ता आयोग में एक मुकदमा दायर किया गया था। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद और निपटारा आयोग (एनसीडीआरसी) ने अस्पताल प्रशासन और स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ0 सोहिनी वर्मा को 80 लाख और 20 लाख क्रमश: परिवार को अदा करने का अदेश दिया है। एनसीडीआरसी द्वारा दिया गया क्षतिपूर्ति का आदेश न्यायपूर्ण और उचित है लेकिन क्या यह ऐसे उदाहरणों का अंत है? यह एक ऐसा प्रश्न है जो अभी भी अनुत्तरित है।

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ऐसा पहली बार नहीं है कि इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल अनैतिक और गैरजिम्मेदाराना व्यवहार में सम्मिलित रहा है। ऐसे कई सारे उदाहरण है जिसने इस उद्योग जगत के सबसे प्रसिद्ध नामों में से एक को कलंकित किया है। डॉ0 सुशील कुमार अपोलो अस्पताल के रेज़ीडेंट डॉक्टरों में से एक, कई उदाहरणों में चिकित्सकीय अंदेखी के लिये उत्तरदायी नहीं थे। इस मामले के संदर्भ में अपराधी द्वारा दिये गये बयान के द्वारा अस्पताल के वातावरण को निर्धारित किया जा सकता है। उसने कहा, “”जो कुछ भी हुआ वह सहमति से था, और मैं उस बच्ची का पिता हूं” । वह किसी भी अपराध बोध को नहीं दिखा रहा था।

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यह उस खराब वातावरण के उदाहरणों में से एक है जिसमें तथाकथित पांच सितारा अस्पताल कार्य करता है। ऑनलाइन उपभोक्ता जनसभा और उपभोक्ता शिकायत ब्लॉग रोगी और उनके सम्बंधियों की समालोचना के साथ भरी हुई है और वे केवल अस्पताल के दुखी चित्रों को दिखाती है।

अस्पताल की अवधारणा बदल चुकी है। ये भव्य और विलासिता सम्पन्न, लोगों को स्वास्थ्य देखभाल सुविधा के बजाय पांच सितारा अस्पताल के जैसा एहसास देता है। अब अस्पताल रोगी की देखभाल से समझौता करके लाभ बनाने के सिद्धांत पर काम कर रहे है।

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चिकित्सकीय अंदेखी केवल एक मुद्दा नहीं है। प्रशासन ऊंचे हाथों में है और केवल उन्हीं की देखरेख करता है जो धनी और प्रसिद्ध हैं। एक रोगी, जो वित्तीय दृष्टि से कमजोर है, इस तरह के अस्पताल में अपना उपचार कराने के बारे में स्वप्न में भी नहीं सोच सकता है। अपोलो एक मात्र दोषी नहीं है।

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उच्च स्तर के रोगियों और ऊंचा धन लेने वाले डॉक्टरों के लिये मैक्स, फोर्टिस, मेदांता और एक ऐसे ही भव्य गलियारों, विलासिता युक्त कमरों वाले अस्पताल के बारे में सोचिये। इनके कमरों का किराया किसी सुविधायुक्त होटल से अधिक है, निजी अस्पताल सेवाओं को बेहतर उपलब्ध कराने के क्रम में वास्तविकता में वांछित सनक को पूरा कर रहे हैं। इन कमरों में वाई-फाई, एलईडी टीवी और अत्याधुनिक साजोसामान उच्चवर्गीय सीईओ और व्यवसायिकों को सोने के लिये बेहतर वातावरण देते हैं, भले ही अच्छा उपचार न हो।

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कुछ ऐसे भी है जो रातभर के लिये 30000 रूपये तक रोगी को सभी सहायकों और अन्य आराम और विलासिता के साथ रखने के लिये लेते हैं। दूसरी ओर, वहाँ अंदेखी भी है और अस्पताल कमजोरों की सामान्यतया सेवा नहीं करते हैं।

आजा के परिदृश्य में,जीवन की गुणवत्ता और स्वास्थ्य दोनों गिर रहे हैं। इसलिये क्या स्वास्थ्य की गुणवत्ता है।

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